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प.बंगालः संघ के स्कूल होंगे बंद

कैच ब्यूरो | Updated on: 19 March 2017, 12:14 IST

पश्चिम बंगाल में कथित तौर पर निर्धारित पाठ्यक्रम का अनुसरण ना करने और धार्मिक असहिष्णुता फैलाने वाले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा संचालित स्कूलों पर गाज गिर सकती है.

पश्चिम बंगाल सरकार ने संघ से मान्यता प्राप्त सारदा शिशु विद्या मंदिर और सरस्वती शिशु विद्या मंदिर द्वारा चलाए जा रहे 125 स्कूलों को निर्देश दिए हैं कि वे पश्चिम बंगाल माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के पाठ्यक्रम को अपनाएं और उसी के आधार पर शिक्षा दें.

सरकार का कहना है, ‘‘ये स्कूल छात्रों के बीच धार्मिक वैमनस्य को बढ़ावा दे रहे हैं." शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी ने कहा, हम ऐसे स्कूलों का लाइसेंस रद्द कर देंगे जो छात्रों में आपसी नफरत और धार्मिक असहिष्णुता फैलाएंगे. फिलहाल हमने ऐसे 125 स्कूल चिन्हित किए हैं जो बोर्ड के पाठ्यक्रम के अनुसार पढ़ाई नहीं करवा रहे व धर्मोपदेश का प्रचार प्रसार करने में लगे हैं.

इन स्कूलों से कहा गया है कि वे अपने-पाठ्यक्रम शिक्षा विभाग में प्रस्तुत करें ताकि उसकी विषय-वस्तु का पुनरावलोकन किया जा सके. इनमें से ज्यादातर स्कूल कूच-बिहार, उत्तरी दिजनापुर, नाडिया और पश्चिम मिदनापुर में स्थित हैं. सरकार का दावा है कि इन स्कूलों में कक्षा 1 से 4 तक के विद्यार्थियों के लिए धार्मिक असहिष्णुता बढ़ाने वाले कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं.

पश्चिमी मिदनापुर जिले के केश्यारी में वनवासी कल्याण आश्रम ने आरएएस के कुछ समर्थकों को कार्यक्रम आयोजन के लिए एक कमरा किराये पर दिया. प्राथमिक स्कूल के बच्चों के लिए आयोजित किए गए इस कार्यक्रम के दौरान छात्रों को दूसरे समुदायों के खिलाफ भड़काने की कोशिश की गई.

 

पश्चिम बंगाल माध्यमिक शिक्षा बोर्ड को जब इस बारे में पता चला तो बोर्ड ने स्कूलों में ऐसे कार्यक्रम आयोजित करने से मना कर दिया. हालांकि वनवासी कल्याण आश्रम ने कहा, यह केवल एक योग आधारित कार्यक्रम था और छात्रों की एकाग्रता बढ़ाने के उद्देश्य से प्रवचन दिया गया था. यह आश्रम आदिवासियों के लिए काम करने वाले संगठन वनबंधु परिषद से मान्यता प्राप्त है.

आरएसएस कार्यकर्ता धार्मिक वैमनस्य फैलाने की बात से इनकार करते हैं. वे कहते हैं वर्ष 2015 में असम में आरएसएस द्वारा संचालित स्कूल के एक मुस्लिम छात्र ने सीबीएसई में प्रथम स्थान प्राप्त किया था. उन्हें इस उपलब्धि पर गर्व है.

आरएसएस प्रवक्ता जिश्नू बोस कहते हैं, ‘‘वामपंथी सरकार ने पश्चिम बंगाल में हमारे स्कूल स्थापित करने का विरोध किया था और अब टीएमसी सरकार भी
इसी राह पर चल पड़ी है. वे पश्चिम बंगाल को भी बांग्लादेश बनाने पर तुले हैं. वर्ष 2014 में बर्दवान में सिमुलिया मदरसा में हुए बम विस्फोट के बाद एनआईए ने 10,500 अवैध मदरसे बंद कर दिए थे.’’

सीपीआईएम नेता मानस मुखर्जी ने भी इन स्कूलों पर अपनी राय जाहिर की. उन्होंने कहा, ऐसे स्कूलों की बढ़ती संख्या से व्यथित हो कर मैंने विधानसभा में भी यह मामला उठाया था. मैंने राज्य सरकार से अपील की है कि धार्मिक असहिष्णुता फैलाने वाले स्कूलों का लाइसेंस रद्द कर दिया जाए. संघ संचालित स्कूल भाजपा और टीएमसी सरकार के बीच विवाद का कारण बने हुए हैं.

First published: 19 March 2017, 12:14 IST
 
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