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मोदी सरकार को अपनी बहुचर्चित जन-धन योजना के खाते क्यों करने पड़ रहे हैं बंद ?

सुनील रावत | Updated on: 3 February 2018, 12:50 IST

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सबसे चर्चित योजनाओं शामिल जन-धन योजना क्या अब सरकार के लिए सिरदर्द बनती जा रही है. टाइम्स ऑफ़ इंडिया की रिपोर्ट की माने तो सरकार ने शुक्रवार को संसद में जानकारी दी कि 20 दिसंबर 2017 तक उसने 49.50 लाख जन-धन खाते बंद किये गए हैं. इनमें से करीब 50 प्रतिशत खाते उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, गुजरात, तमिलनाडु और राजस्थान के थे.

सरकार ने जानकारी दी कि देशभर में 31 करोड़ जन-धन खाते हैं, जिनमें 24.64 करोड़ खाते ही ऑपरेशनल हैं. इन खातों में खाताधारक ने 24 महीनों में लेनदेन किया. बता दें कि सरकार जनधन खातों का इस्तेमाल डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर के तौर पर करती है,साथ ही खाताधारकों को एक्सिडेंट और लाइफ इंश्योरेंस भी मिलता है.

सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार बंद होने वाले खातों में उत्तर प्रदेश के सबसे ज्यादा 9.62 लाख खाते हैं. जबकि मध्य प्रदेश में 4.44 लाख, गुजरात में 4.19 लाख, तमिनाडु में 3.55 लाख, राजस्थान में 3.11 लाख, महाराष्ट्र में 3 लाख, बिहार में 2.90 लाख, पंजाब में 2.28 लाख, पश्चिम बंगाल में 2.23 लाख और दिल्ली में 1.65 लाख खाते बंद हुए हैं.

सरकार के लिए सिरदर्द क्यों बन रहे हैं जन-धन खाते 

जन-धन योजना मोदी सरकार के लिए इसलिए भी सिरदर्द बनी रही क्योंकि अधिकतर खातों में जहां जीरो बैलेंस रहा वहीं नोटबंदी के बाद  जनधन खातों में बड़ी संख्या में पैसे जमा किये और निकाले गए. मार्च 2017 में प्रकशित इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार सरकार को 11 करोड़ जन-धन खातों का बोझ खुद उठाना पड़ रहा था. जीरो बैलेंस वाले कई खातों में तो बैंकों को खुद पैसे डालने पड़े. रिपोर्ट के अनुसार इन खातों में खुद बैंक अधिकारियों को एक एक रुपया डालना पड़ा. 

नोटबंदी के बाद पैसे हुए जमा 

एक आरटीआई के अनुसार 18 सार्वजानिक बैंकों के 1.05 करोड़ जन धन खातों में 1 रुपया जमा किया गया. साल 2014 में जहां जीरो बैलेंस अकॉउंट से संख्या 76 प्रतिशत थी वहीं साल 2015 में यह 46 प्रतिशत हो गए और इस साल 2017 अगस्त में यह 24.35 प्रतिशत रह गए थे. 

नोटबंदी का सबसे बड़ा असर देशभर में खोले गए जनधन खातों पर पड़ा। ताज़ा आंकड़ों के अनुसार पिछले 14 दिनों में देश के जनधन खातों में 21,000 हजार करोड़ जमा हो गए। इनकम टैक्स विभाग इस बात पर नजर जरूर रखेगा कि देश के 25 करोड़ जनधन अकाउंट में जहाँ 9 नवम्बर तक 45 हजार करोड़ जमा हुए थे वह दो हफ्ते में इतने कैसे बढ़ गए.

सरकार के लिए इसमें सबसे बड़ी मुसीबत यह है कि जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जनधन योजना शुरू की तो इसमें जीरो बैलेंस पर जनधन खाते खोलने की अनुमति दी गई. रिजर्व बैंक ने इसके लिए अकाउंट खोलने में केवाईसी नियमों में ढील दे ऱखी है। यानी बिना किसी प्रूफ के केवल लिखित जानकारी देकर भी अकाउंट खोला जा सकता है.

First published: 3 February 2018, 12:47 IST
 
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