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क्या योगी के साथ मंच साझा करने वाले हत्या के आरोपी अमनमणि होंगे भाजपा में शामिल?

कैच ब्यूरो | Updated on: 6 May 2017, 10:59 IST
(सीएम आदित्यनाथ का पैर छूते नौतनवां से निर्दलीय विधायक अमनमणि त्रिपाठी (पीटीआई))

हाल ही में यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को गोरखपुर में एक कार्यक्रम के दौरान हत्या के अभियुक्त अमनमणि त्रिपाठी के साथ मंच साझा करते देखा गया, जबकि 5 साल पहले दाग़ियों के मामले में इन्हीं आदित्यनाथ के सुर कुछ और थे. त्रिपाठी हाल ही संपन्न हुए चुनावों में नौतनवां सीट से निर्दलीय उममीदवार के तौर पर चुनाव जीते हैं. अमनमणि का ‘महाराज जी’ (योगी को अक्सर इस रूप में भी संबोधित किया जाता है) के साथ इस प्रकार एक मंच पर दिखना इन अटकलों को बल दे रहा है कि अमनमणि जल्द ही भाजपा में शामिल हो सकते हैं.

2012 में इन्हीं योगी आदित्यनाथ ने बसपा के बाबू सिंह कुशवाहा के पार्टी में शामिल होने पर नैतिक आधार पर आपत्ति जताई थी. कुशवाहा 15,000 करोड़ रुपये के एनआरएचएम (राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन) घोटाले में अभियुक्त रहे हैं और भाजपा उन्हें पूर्वी उत्तर प्रदेश से पार्टी उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ाना चाह रही थी.

कुशवाहा का विरोध करते हुए उस वक्त योगी ने कहा था, "हमने संसद के भीतर व बाहर भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाया है. भ्रष्टाचार के खिलाफ पार्टी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी ने भी रथयात्रा निकाली थी. सपा- बसपा से भ्रष्ट नेताओं के पार्टी में शामिल होने से भ्रष्टाचार के खिलाफ हमारी लड़ाई को धक्का लगा है."

और तो और आदित्यनाथ ने भाजपा उम्मीदवार के पक्ष में प्रचार करने से इनकार कर दिया. इस पर पार्टी ने तुरंत ही कुशवाहा को पार्टी में शामिल करने का विचार त्याग दिया. परन्तु अब लगता है योगी के विचार बदल गए हैं.

कौन हैं अमनमणि?

पिछले साल नवंबर में अमनमणि को अपनी पत्नी की हत्या के आरोप में सीबीआई ने गिरफ्तार किया था. उसके माता-पिता अमरमणि त्रिपाठी और मधुमणि त्रिपाठी लखनऊ निवासी कवयित्री मधुमिता शुक्ला की हत्या के आरोप में उम्र कैद की सज़ा काट रहे हैं. 

उक्त राजनीतिक घटनाक्रम को देखते हुए सरकार द्वारा मामले को अमनमणि के पक्ष में करने की आशंका के चलते सारा की मां सीमा सिंह और मृत कवयित्री मधुमिता शुक्ला की बहन निधि ने कहा है कि अगर अमनमणि भाजपा में शामिल होंगे तो वे आमरण अनशन पर बैठ जाएंगी. 

मधुमिता की बहन निधि, अमरमणि और उनकी पत्नी को सज़ा दिलवाने के लिए तत्कालीन सरकार से अकेले ही लड़ पड़ी थीं. लखनऊ में निधि ने संवाददाताओं से कहा, "सरकार अमनमणि और उनके पिता अमरमणि के प्रति कुछ नरम रवैया अपना रही है. दोनों ही हत्या के आरोपी हैं और दोनों को ही ऐशो आराम की ज़िंदगी वाली सुविधाएं दी जा रही हैं."

अमनमणि की सास सीमा सिंह ने निधि का समर्थन करते हुए भाजपा को निशाने पर लिया. उन्होंने कहा, "कौन कहता है कि अमनमणि और उसके हत्यारे पिता को समाजवादी पार्टी और मुलायम सिंह यादव ने संरक्षण दिया."

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि हत्या के अभियुक्तों और दोषियों को जेल में सारी सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं और अब अमनमणि सत्ता का फ़ायदा उठाने के लिए भाजपा के साथ नजदीकियां बढ़ा रहे हैं. अगर अमनमणि भाजपा में शामिल हो जाते हैं तो सीमा सिंह और निधि ने जंतर मंतर पर आमरण अनशन पर बैठने की चेतावनी दी है.

सारा हत्या मामला

अमनमणि का दावा है कि वह अपनी पत्नी सारा के साथ जुलाई 2015 में छुट्टियां मनाने कार से दिल्ली जा रहे थे. तभी कार दुर्घटना में सारा (27) की मृत्यु हो गई. हालांकि सारा की मां ने संदेह जताते हुए अमनमणि और उसके परिवार के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवा दी. एफआईआर में सीमा ने कथित तौर पर सारा की हत्या करने और मामले की सीबीआई जांच की मांग की. सीबीआई जांच में पाया गया कि यह ‘पूर्व नियोजित हत्या’ का मामला है और अभियुक्त के खिलाफ शारीरिक प्रताड़ना के भी आरोप लगाए गए हैं. 

2016 में यूपी की राजनीति में एक वक्त ऐसा आया जब पहली बार किसी राजनीतिक परिवार के माता-पिता और पुत्र सभी हत्या के दो अलग-अलग मामलों में एक साथ जेल में थे. अमरमणि त्रिपाठी और उनकी पत्नी उम्रक़ैद की सज़ा काट रहे हैं, जबकि अमनमणि के ख़िलाफ़ अभी सुनवाई होनी बाकी है.

भजपा ने किया अटकलों को खारिज

भाजपा प्रदेश महासचिव विजय बहादुर पाठक ने इस बात से इनकार किया है कि अमनमणि पार्टी में शामिल हो सकते हैं. पाठक ने मामले में सफाई देते हुए कहा, "बात बस इतनी सी है कि उन्होंने नए विधायक होने के नाते मुख्यमंत्री का अभिवादन भर किया था. मौजूदा विधानसभा में हमारी पार्टी के 325 विधायक हैं. हमें किसी दाग़ी विधायक को साथ लेने की ज़रूरत नहीं है."

अपराधियों का साथ देने वाले मुलायम सिंह और शिवपाल यादव ने अमरमणि को कड़ा संरक्षण दे रखा था और हत्या के गंभीर आरोपों के बावजूद अमरमणि को मंत्रालय में शामिल किया. अमरमणि के खिलाफ एक मामला अपहरण का भी चल रहा है. उन्हें नौतनवां से उम्मीदवार बनाने में शिवपाल की भूमिका खास रही. दूसरी ओर अपने परिवार के भीतर ही कलह का सामना कर रहे पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अमनमणि को टिकट देने से इनकार कर दिया था.

First published: 6 May 2017, 10:59 IST
 
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