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प्रो-कबड्डी लीग 2019: यूपी योद्धा के खिलाड़ियों से समझिए कैसे करते हैं सफल एंकल होल्ड

कैच ब्यूरो | Updated on: 31 July 2019, 14:34 IST
(PKL Website)

कबड्डी में डिफेंस करना किसी कला से कम नहीं है. एक डिफेंडर जब बिना किसी गलती के, बड़ी महारत के साथ मैट पर रेडर का टखना पकड़ता है तब जाकर कहीं एक सक्सेसफुल टैकल करने में सफल होता है. अगर इस कड़ी में उससे कहीं भी थोड़ी सी भी चूक होती है तो उसे बाहर जाना पड़ा है और टीम को एक महत्वपूर्ण अंक गवाना पड़ता है.

एक डिफेंडर को एंकल टैकल करते समय काफी बेलेंस रहना पड़ता है उसे अपनी पूरी ताकत से साथ रेडर को अपनी तरफ खीचना पड़ता है. इस दौरान अगर डिफेंडर की पकड़ थोड़ी भी ढीली होती है तो टीम को इसका खामियाजा भुगतना पड़ता है. एंकल टैकल करना जितना आसान दिखता है मैट पर ये उतना ही कठिन है. एक डिफेंडर के लिए एंकल टैकल उसका सबसे बड़ा हथियार होता है तो वहीं रेडर के लिए किसी बुरे सपने से कम नहीं है.


 

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वहीं किसी रेडर के तौर पर मैच के दौरान अपने आप को एंकल टैकल से बचाना सबसे बड़ी चुनौती होती है. क्योंकि रेडर ही किसी टीम के जीत और हार की पटकथा लिखते है. पीकेएल सीजन 7 में यूपी योद्धा की तरफ से खेल रहे रिशांक देवाडिगा को चोटी का रेडर माना जाता है. रिशांक की माने रेड करने के दौरान आपको सबसे ज्यादा ध्यान कार्नर पर देना होता है कि आगे वाला किस तरह से मूव कर रहा है. जब भी रेडर बोनस के लिए जाता है को सबसे ज्यादा खतरा एंकल टैकल का ही होता है. बोनस पाइंट लेने के लिए हम सबसे पहले कार्नर पर खड़े डिफेंडर को भ्रमित करते है. क्योंकि इससे डिफेंडर के पास टैकल करने का समय नहीं होता है.

यानि अगर कोई डिफेंडर एंकल टैकल करना चाहता है तो उसे इसके लिए कुछ सेकेंड ही मिलते है और उसे ध्यान रखना होता है कि खिलाड़ी टू टच या फिर बोनस ना ले पाए.

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First published: 30 July 2019, 17:15 IST
 
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