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अजमेर दरगाह ब्लास्ट: देवेंद्र गुप्ता और भावेश पटेल को उम्रक़ैद की सज़ा

कैच ब्यूरो | Updated on: 22 March 2017, 13:59 IST

अजमेर दरगाह ब्लास्ट मामले में एनआईए कोर्ट ने दो दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है. राजस्थान में ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की इस मशहूर दरगाह में 2007 में धमाके हुए थे. 

स्पेशल एनआईए कोर्ट ने इस मामले में दोषी करार दिए गए देवेंद्र गुप्ता और भावेश पटेल को आजीवन कारावास की सजा का एलान किया है. इससे पहले इस मामले में एक अन्य आरोपी स्वामी असीमानंद को अदालत ने बरी कर दिया था. 

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अजमेर दरगाह में 11 अक्टूबर 2007 को हुए धमाके के मामले में एनआईए की विशेष अदालत ने मुख्य आरोपी स्वामी असीमानंद समेत सात आरोपियों को बरी कर दिया था. वहीं तीन आरोपियों देवेन्द्र गुप्ता, भावेश पटेल और सुनील जोशी को दोषी करार दिया था. सुनील जोशी की 2008 में मौत हो चुकी है. 

जयपुर स्पेशल एनआईए कोर्ट के जज दिनेश गुप्ता ने इस केस में असीमानंद के अलावा हर्षद सोलंकी, मुकेश वासाणी, लोकेश शर्मा, मेहुल कुमार, भरत भाई को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया था. अदालत ने देवेन्द्र गुप्ता, भावेश पटेल और सुनील जोशी को भारतीय दंड संहिता की धारा 120 बी, 195 और धारा 295 के अलावा विस्फोटक सामग्री कानून की धारा 3(4) और गैर कानूनी गतिविधियों का दोषी पाया.

11 अक्टूबर 2007 को दरगाह ब्लास्ट

अजमेर दरगाह में 11 अक्टूबर 2007 को हुए ब्लास्ट में तीन जायरीनों की मौत हुई थी, जबकि एक दर्जन से ज्यादा लोग जख्मी हो गए थे. धमाका दरगाह के अहाता-ए-नूर परिसर में हुआ था. अजमेर में स्थित ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की ये दरगाह सदियों से लोगों को भाईचारे और अमन का पैगाम देती चली आ रही है. 

एक अप्रैल 2011 को केंद्र सरकार ने इस मामले की जांच एनआईए को सौंपी थी. आठ मार्च 2017 को संदेह का लाभ देते हुए एनआईकोर्ट ने मुख्य आरोपी स्वामी असीमानंद को बरी कर दिया था. साल 2006 से 2008 के बीच देश के अलग-अलग हिस्सों में कई ब्लास्ट हुए थे. इनकी जांच एनआईए को सौंपी गई थी. धमाकों के तार कथित हिंदू चरमपंथियों से जुड़े पाए गए थे. स्वामी असीमानंद की गिरफ्तारी 19 नवंबर, 2010 को उत्तराखंड के हरिद्वार से हुई थी.

First published: 22 March 2017, 12:54 IST
 
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