Home » राजस्थान » Anandpal Singh Funeral: Dead body of dreaded gangster cremated on 20th day of encounter
 

एनकाउंटर के बाद 20 दिन तक पुलिस को पस्त करने वाले आनंदपाल की जली चिता

कैच ब्यूरो | Updated on: 14 July 2017, 12:23 IST
सौजन्य: राजस्थान पत्रिका

राजस्थान पुलिस ने गुरुवार की शाम उस वक़्त राहत की सांस ली, जब कुख्यात गैंगस्टर आनंदपाल सिंह का नागौर में अंतिम संस्कार हो गया. एनकाउंटर के 20वें दिन आनंदपाल के शव को शाम साढ़े छह बजे डीप फ्रिजर समेत सांवराद गांव के मुक्तिधाम लाया गया. अंतिम संस्कार के लिए कर्फ्यू में एक घंटे की ढील दी गई. इस दौरान गांव में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई.

इससे पहले चूरू के रतनगढ़ इलाके के मालासर गांव में 24 जून की रात को राजस्थान पुलिस और एसओजी ने पचास मिनट की कथित मुठभेड़ के दौरान आनंदपाल सिंह को मार गिराया था. हालांकि परिजनों ने इसे फर्जी करार दिया था. इस मामले में राजपूत करणी सेना की सभा के दौरान बुधवार को हिंसा भड़क उठी थी, जिसमें एसपी पारिस देशमुख समेत 21 पुलिस वाले जख्मी हुए थे, वहीं एक प्रदर्शनकारी की मौत हो गई थी. 

पढ़ें: 10 दिनों से कफ़न को मोहताज 11 साल तक दहशत फैलाने वाला आनंदपाल

सौजन्य: राजस्थान पत्रिका

परिजनों की सहमति के बाद अंतिम संस्कार

गुरुवार दोपहर को जिला प्रशासन ने राज्य मानवाधिकार आयोग के नोटिस को आनंदपाल के सांवराद गांव स्थित घर पर चस्पा किया गया. प्रशासन ने कहा कि शुक्रवार दोपहर तक या तो परिजन आनंदपाल के शव का अंतिम संस्कार करें, वरना प्रशासन को अंतिम संस्कार कराना पड़ेगा.

एडीजी अजीत सिंह, अजमेर के कमिश्नर एचएस मीणा, आईजी मालिनी अग्रवाल समेत आला अफसरों ने आनंदपाल के परिवार वालों से बातचीत की. इस दौरान किसी मांग को माने बिना अंतिम संस्कार पर रजामंदी बन गई. आनंदपाल के ममेरे भाई ने चिता को मुखाग्नि दी.

सौजन्य: राजस्थान पत्रिका

इंटरनेट पर बैन बढ़ा

इससे पहले नागौर पुलिस ने बुधवार रात को ही श्रीराजपूत करणी सेना के अध्यक्ष लोकेंद्र सिंह कालवी के अलावा राजपूत समाज के बड़े नेताओं को हिरासत में लिया था. इसके साथ ही 51 युवकों को गिरफ़्तार किया गया. वहीं 200 से ज्यादा लोगों को पुलिस ने हिरासत में लिया. 

पढ़ें: मोस्ट वांटेड 'ग्लैमरस गैंगस्टर' की लाश मांग रही है मानवाधिकार

सांवराद में डेगाना-रतनगढ़ रेलवे ट्रैक क्षतिग्रस्त होने की वजह से कुछ ट्रेनों के संचालन पर असर पड़ा. इस बीच जिला प्रशासन ने सोशल मीडिया के जरिए भड़काऊ संदेशों को रोकने के लिए इंटरनेट बंद रखने की मियाद 14 जुलाई रात नौ बजे तक के लिए बढ़ा दी है.

फरारी के दो साल बाद एनकाउंटर

तीन सितंबर 2015 को नागौर के परबतसर से फ़रार हुआ कुख्यात गैंगस्टर आनंदपाल सिंह 21 महीने और 22 दिन बाद राजस्थान पुलिस के हाथों 24 जून की रात को एनकाउंटर में मारा गया. 25 जून को रतनगढ़ के राजकीय जालान अस्पताल में आनंदपाल के शव का मेडिकल बोर्ड से पोस्टमार्टम कराया गया था. 30 जून को दोबारा रतनगढ़ एडीजे कोर्ट के आदेश पर चूरू के राजकीय डेडराज भरतिया अस्पताल में मेडिकल बोर्ड ने शव का पोस्टमार्टम किया. 

पढ़ें: आनंदपाल एनकाउंटर: 19 दिन बाद भी रोड पर 'राजपूताना' के राजपूत

आनंदपाल के शव को एक जुलाई की सुबह नागौर के लाडूनं स्थित सांवराद गांव में परिजनों के हवाले कर दिया गया था. लेकिन परिवार वालों ने इसे फर्जी एनकाउंटर करार देते हुए सीबीआई जांच की मांग की थी. हालांकि अब तक राज्य की वसुंधरा राजे सरकार ने सीबीआई जांच को लेकर कोई आश्वासन नहीं दिया है.

सौजन्य: राजस्थान पत्रिका

आनंदपाल की हिस्ट्रीशीट

अपराध की दुनिया में आनंदपाल की एंट्री साल 2006 में हुई थी. बताया जाता है कि बलबीर बानूड़ा के गैंग की वजह से उसने अंडरवर्ल्ड में जड़ें जमाईं. कहानी शुरू होती है 1997 से. तब बलबीर बानूड़ा और राजू ठेहट दोस्त हुआ करते थे.
दोनों शराब के कारोबार से जुड़े थे. 2005 में एक मर्डर ने दोनों को एक-दूसरे के खून का प्यासा बना दिया.

शराब ठेके पर बैठने वाले सेल्समैन विजयपाल और राजू ठेहट के बीच तकरार के बाद राजू ने अपने गैंग की मदद से विजयपाल की हत्या कर दी. विजयपाल बलबीर का साला था. विजय के मर्डर के बाद बलबीर ने राजू का गैंग छोड़कर अपना अलग गिरोह बना लिया. कुछ अरसे के बाद बलबीर के गैंग में आनंदपाल भी शामिल हो गया.

पढ़ें: आनंदपाल एनकाउंटर: 'लोगों को लड़ाकर मज़े लूट रही है वसुंधरा सरकार'

सौजन्य: राजस्थान पत्रिका

उस पर बीकानेर जेल फायरिंग समेत दर्जनों वारदात में शामिल होने का आरोप था. लूट, डकैती, गैंगवार और हत्या जैसे 24 मामलों में वो अभियुक्त था. साल 2006 में डीडवाना में जीवनराम गोदारा हत्याकांड के बाद जुर्म की दुनिया में आनंदपाल का सिक्का चलने लगा. आनंदपाल के ख़िलाफ़ डीडवाना में ही 13 मामले दर्ज थे. 8 मामलों में कोर्ट ने आनंदपाल को भगोड़ा घोषित किया था.

जुलाई 2014 में आनंदपाल और बलवीर बानूड़ा पर बीकानेर जेल में फायरिंग हुई थी. जिसमें बलवीर बानूड़ा की मौत हो गई थी, जबकि आनंदपाल जख्मी हुआ था. इस दौरान आनंदपाल के दूसरे साथियों ने दो लोगों की हत्या कर दी थी. इस वारदात के बाद आनंदपाल को अजमेर की हाई सिक्योरिटी जेल में शिफ्ट कर दिया गया था. 

(राजस्थान पत्रिका से मिले इनपुट के आधार पर)

First published: 14 July 2017, 12:10 IST
 
अगली कहानी