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सामाजिक बंधन तोड़ दुल्हन ने घोड़ी पर चढ़ घर-घर बांटे शादी के कार्ड

कैच ब्यूरो | Updated on: 30 January 2018, 12:26 IST
घोड़ी पर सवार दुल्हे और उसके आस पास ख़ुशी से झूमती पूरी बारात का दृश्य बहुत ही आम है. राजस्थान के झुंझनू कि लड़की ने इस तस्वीर को उलट दिया है. राजस्थान में शादी के पहले बिंदौरी परंपरा के तहत शादी से पहले कुछ रस्‍मों को पूरा किया जाता है.
 
आमतौर पर इस रस्‍म के तहत दूल्‍हा साफा बांधकर घोड़े पर सवार होकर दुल्‍हन के घर तक जाता है. और दुल्‍हन के संबंधियों को शादी में आमंत्रित करता है. इसके विपरीत ब्रिटेन से एमबीए पास एक दुल्‍हन जब झुंझुनू जिले के चिरावा कस्‍बे में घोड़े के रथ पर साफा बांधकर रस्‍म पूरा करने के लिए निकली तो लोग अचम्भे में आ गये.
 
दरअसल इसके जरिये वह लोगों की मानसिकता में यह बदलाव लाना चाहती हैं कि लड़का और लड़की बराबर होते हैं. गार्गी,
झुंझुनू की सांसद संतोष अहलावत की पुत्री हैं. उनकी इस मुहिम की लोग सराहना कर रहे हैं. गार्गी का कहना है कि ग्रामीण और कस्‍बाई लोग अखबारों और टीवी विज्ञापनों की तुलना में इस तरह के कामों से ज्‍यादा प्रभावित होते हैं. उनका कहना है कि इस तरह की शुरुआत को अन्‍य लोग भी देखेंगे और अपनाएंगे.
गार्गी की मां संतोष अहलावत 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' अभियान से जुड़ी हैं. झुंझुनूं सांसद संतोष अहलावत अपनी बेटी की शादी के साथ-साथ समाज को क्या संदेश दे सकती है, इसलिए उन्होंने एक यह बड़ा कदम उठाया है. साथ ही इस कदम से न केवल परिवार खुश है, बल्कि समाज के लोगों में भी बेटा-बेटी एक समान का संदेश जा रहा है. बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान के तहत यह एक वो संदेश है.
 
 
जिससे समाज में यह बात जरूर जाएगी कि शादी के वक्त घोड़ी पर बैठने की रस्म केवल बेटे ही नहीं, बल्कि बेटियां भी अदा करती है. इस बिंदौरी में खुद सांसद भी शामिल हो रही हैं और अन्य महिलाओं के साथ बेटी की शादी में थिरकने से भी खुद को रोक नहीं पा रही हैं.

First published: 30 January 2018, 12:26 IST
 
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