Home » राजस्थान » Rajasthan textbook omits reference to Alauddin Khilji seeing Padmini in mirror, in the chapter ‘Mughal Akraman: Prakar aur Prabhav’
 

खिलजी द्वारा पद्मावती को आईने में देखने की घटना को राजस्थान सरकार ने टेक्स्ट बुक से हटाया

कैच ब्यूरो | Updated on: 23 June 2018, 13:35 IST
padmini

राजस्थान बोर्ड ऑफ़ सेकेंडरी एजुकेशन (RBSE) के 12वीं की इतिहास टेक्स्ट बुक के नए एडिशन में अल्लाउद्दीन खिलजी द्वारा राजपूत रानी 'पद्मावती' को आईने में देखने के संदर्भ को हटा दिया गया है.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, 'भारत का इतिहास' का 2018 संस्करण हाल ही में बाजार में उपलब्ध कराई गई है, इसमें 'मुगल अक्रमण:  प्रकार और प्रभाव चैप्टर के 'पद्मिनी की कहानी' में कथित घटना का कोई जिक्र नहीं है जब खिलजी ने दर्पण में पद्मिनी प्रतिबिंब देखा.

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पुस्तक के 2017 संस्करण में लिखा है कि "आठ वर्ष तक घेरा डालने के बाद भी जब सुल्तान चित्तौड़ को नहीं जीत पाया तो उसने प्रस्ताव रखा कि यदि उसे पद्मिनी का प्रतिबिंब ही दिखा दिया जाए तो वह दिल्ली लौट जाएगा". आगे इसमें कहा गया है कि "राणा ने इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया. दर्पण में पद्मिनी का प्रतिबिंब देखकर जब अल्लाउद्दीन वापिस लौट रहा था उस समय उसने राणा रतन सिंह को कैद कर लिया और रिहाई के बदले पद्मिनी की मांग की."

टेक्स्ट बुक के 2018 संस्करण में इस घटना का उल्लेख नहीं किया गया है इसमें लिखा है: "आठ वर्ष तक घेरा डालने के बाद भी जब सुल्तान चित्तौड़ को नहीं जीत पाया तो उसने संधि प्रस्ताव के बहाने धोखे से रतन सिंह को कैद कर लिया और रिहाई के बदले पद्मिनी की मांग की."

टेक्स्ट बुक के नए एडिशन में 'पद्मिनी की कहानी' चैप्टर के शुरुआत में बताया गया है कि 'पद्मिनी' के बारे में विवरण 1540 ई० में मलिक मुहम्मद जायसी द्वारा लिखित 'पद्मावत' पर आधारित है.  

First published: 23 June 2018, 13:35 IST
 
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