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बच्चों की लंबी उम्र के लिए ऐसे रखें अहोई अष्टमी का व्रत, ये है शुभ मुहूर्त और पूजा का समय

कैच ब्यूरो | Updated on: 30 October 2018, 13:22 IST

हमारे देश में हजारों तीज-त्योहार मनाए जाते हैं. हर त्योहार को मनाने के पीछे कोई ना कोई वजह और कहानी जरूर छिपी हुई है. इन्हीं में से एक त्योहार है अहोई अष्टमी का. इस दिन मां-बाप बच्चों के अच्छे स्वास्थ्य, लंबी उम्र और हर दुख से बचाने के लिए व्रत रखते हैं और पूजा-पाठ कर उनके स्वस्थ और लंबी उम्र की कामना करते हैं.

इस साल अहोई अष्टमी का व्रत 31 अक्टूबर यानि बुधवार को रखा जाएगा. ये त्योहार विशेष रुप से उत्तर भारत में मनाया जाता है. इस दिन माताएं अपने पुत्र के जीवन में होने वाली किसी भी प्रकार की अनहोनी से बचाने के लिए अहोई अष्टमी का व्रत करती हैं. यह व्रत कार्तिक माह में करवा चौथ के चौथे दिन और दीपावली से अाठ दिन पहले किया जाता है, जो कार्तिक माह की कृष्णपक्ष की अष्टमी को अाता है.

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शास्त्रों में कार्तिक मास की काफी महत्ता है और इसकी महिमा का बखान पद्मपुराण में भी किया गया है. कहा जाता है कि इस माह में प्रत्येक दिन सूर्योदय से पूर्व स्नान करने, व्रह्मचर्य व्रत का पालन करने, गायत्री मंत्र का जप एवं सात्विक भोजन करने से महापाप का भी नाश होता है. इसलिए इस माह में आने वाले सभी व्रत का विशेष फल है. यह पर्व बच्चों को किसी भी तरह की अनहोनी से बचाने वाला है.

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क्यों रखा जाता है अहोई अष्टमी का व्रत

पुत्रों की भलाई के लिए माताएं अहोई अष्टमी के दिन सूर्योदय से लेकर गोधूलि बेला यानि शाम तक उपवास करती हैं. शाम के समय आकाश में तारों को देखने के बाद व्रत तोड़ने का विधान है. हालांकि कुछ महिलाएं चन्द्रमा के दर्शन करने के बाद व्रत का समापन करती हैं. हालांकि चंद्र दर्शन में थोड़ी परेशानी होती है, क्योंकि अहोई अष्टमी की रात चन्द्रोदय देर से होता है. नि:संतान महिलाएं पुत्र प्राप्ति की कामना के लिए अहोई अष्टमी का व्रत करती हैं.

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अहोई अष्टमी व्रत विधि

इस दिन सुबह उठकर स्नान करने और पूजा के समय ही पुत्र की लंबी अायु और सुखमय जीवन के लिए अहोई अष्टमी व्रत का संकल्प लिया जाता है. अनहोनी से बचाने वाली माता देवी पार्वती हैं इसलिए इस व्रत में माता पर्वती की पूजा की जाती है. अहोई माता की पूजा के लिए गेरू से दीवार पर अहोई माता के चित्र के साथ ही स्याहु और उसके सात पुत्रों की तस्वीर भी बनाई जाती है.

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माता के सामने चावल की कटोरी, मूली, सिंघाड़ा अादि रखकर कहानी कही और सुनी जाती है. सुबह पूजा करते समय लोटे में पानी और उसके ऊपर करवे में पानी रखते हैं. इसमें उपयोग किया जाने वाला करना वही होना चाहिए, जिसे करवा चौथ में इस्तेमाल किया गया हो.

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दिवाली के दिन इस करवे का पानी पूरे घर में भी छिड़का जाता है. शाम में इन चित्रों की पूजा की जाती है. लोटे के पानी से शाम को चावल के साथ तारों को अर्घ्य दिया जाता है. अहोई पूजा में चांदी की अहोई बनाने का विधान है, जिसे स्याहु कहते हैं. स्याहु की पूजा रोली, अक्षत, दूध व भात से की जाती है.

ये है अहोई अष्टमी व्रत रखने का सही समय

अष्टमी तिथि प्रारम्भ

बुधवार यानि 31 अक्टूबर 2018 सुबह 11:09 बजे

अष्टमी तिथि समाप्त

गुरुवार यानि 1 नवम्बर 2018 सुबह 09:10 बजे

अहोई अष्टमी पूजा मुहूर्त

शाम 5:32 से 6:51

पूजा अवधि1 घंटा 18 मिनट

तारों को देखने के लिये शाम का समय06:01 बजे

अहोई अष्टमी की रात चन्द्रोदय– रात्रि 11.50 बजे

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First published: 30 October 2018, 13:10 IST
 
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