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छठ पूजा के तीसरे दिन डूबते सूर्य को दें अर्घ्य, ऐसे करें पूजा अर्चना

कैच ब्यूरो | Updated on: 13 November 2018, 10:37 IST

आज छठ पर्व का तीसरा दिन है. इस दिन डूबते सूर्य को अर्घ्य देना का शुभ मुहूर्त है. छठ पर्व बिहार सहित देश के कई राज्यों में मनाया जाता है. छठ के तीसरे दिन यानि आज डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा. इस दौरान बड़ी संख्या में महिला घाटों पर इक्ट्ठा होकर पूजा-अर्चना करेंगी. वहीं बुधवार को उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देने के बाद व्रत का समापन होगा. बता दें कि इस साल छठ पर्व 11 से 14 नवंबर तक मनाया जा रहा है.

चार दिनों का छठ पर्व सबसे कठिन व्रत होता है. इसलिए इसे छठ महापर्व कहा जाता है. इस व्रत को महिलाएं और पुरुष दोनों कर सकते हैं. इसमें सूर्य की पूजा की जाती है. इस बार रविवार यानि सूर्य के दिन से छठ की शुरुआत हुई है. यह बहुत शुभ संयोग बना है. सूर्य षष्ठी यानि छठ में हर मनोकामना पूरी करेंगे.

बता दें कि बिहार के अलावा पूर्वी उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, पश्चिम बंगाल और नेपाल में भी छठी मइया को पूजा जाता है. इस पर्व की खासियत यह भी है कि इसमें धार्मिक भेदभाव, ऊंच-नीच, जात-पात को भुलाकर लोग एक साथ जलाशयों में मनाते हैं. इस पर्व में अमीर-गरीब सबको मिट्टी के चूल्हे पर ही प्रसाद बनाना होता है. प्रसाद में भी मौसमी फल, ईख, कंद-मूल आदि की प्रधानता होती है.

ये हैं छठ पर्व के तीसरे दिन यानि 13 नवंबर की पूजा का शुभ मुहूर्त

छठ पूजा के दिन सूर्योदय– 06:41

छठ पूजा के दिन सूर्यास्त– 05:28

षष्ठी तिथि आरंभ– 01:50 यानि 13 नवंबर 2018

षष्ठी तिथि समाप्त– 04:22 यानि 14 नवंबर 2018

छठ पर्व की पूजा विधि

बता दें कि चार दिनों तक चलने वाला ये पर्व कार्तिक शुक्ल चतुर्थी को शुरु होता है और सप्तमी को अरुण वेला में इस व्रत का समापन होता है.

कार्तिक शुक्ल चतुर्थी को "नहाय-खाय" के साथ इस व्रत की शुरुआत होती है. इस दिन से स्वच्छता की स्थिति अच्छी रखी जाती है. इस दिन लौकी और चावल का आहार ग्रहण किया जाता है.

वहीं दूसरे दिन को "लोहंडा-खरना" कहा जाता है. इस दिन उपवास रखकर शाम को खीर का सेवन किया जाता है. खीर गन्ने के रस की बनी होती है. इसमें नमक या चीनी का प्रयोग नहीं होता.

तीसरे दिन उपवास रखकर डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है. साथ में विशेष प्रकार का पकवान "ठेकुवा" और मौसमी फल चढाएं. अर्घ्य दूध और जल से दिया जाता है.

चौथे दिन बिल्कुल उगते हुए सूर्य को अंतिम अर्घ्य दिया जाता है. इसके बाद कच्चे दूध और प्रसाद को खाकर व्रत का समापन किया जाता है.

इस बार पहला अर्घ्य 13 नवंबर को संध्या काल में दिया जाएगा और अंतिम अर्घ्य 14 नवंबर को अरुणोदय में दिया जाएगा.

 

छठ पर्व का प्रसाद

छठ पर्व पर कई तरह का प्रसाद बनाया जाता है. इसमें ठेकुआ, मालपुआ, खीर-पूरी, खजूर, सूजी का हलवा, चावल का बना लड्डू, जिसे लडुआ भी कहा जाता है. जिसे प्रसाद के रूप में चढ़ाया जाएगा. टोकरी को धोकर उसमें ठेकुआ के अलावा नई फल सब्जियां भी रखी जाती हैं. जैसे कि केला, सेब, सिंघाड़ा, मूली,अदरक पत्ते समेत, गन्ना, कच्ची हल्दी, नारियल आदि रखते हैं.

छठ पर्व के दौरान सूर्य को अर्घ्य देते वक्त सारा प्रसाद सूप में रखते हैं. सूप में ही दीपक जलता है. लोटा से सूर्य को दूध गंगाजल और साफ जल से फल प्रसाद के ऊपर चढ़ाते हुए अर्घ्य दिया जाता है.

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First published: 13 November 2018, 10:32 IST
 
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