Home » धर्म » Corona Virus Disease can ends by Yagya and worship this tree
 

लॉकडाउन में शनि को शांत करने के लिए करें इस पौधे की पूजा, यज्ञ करने से समाप्त होगा कोरोना का असर

कैच ब्यूरो | Updated on: 20 April 2020, 15:10 IST

Corona Virus Treatment by Yagya: वैश्विक महामारी कोरोना वायरस ने पूरी दुनिया में हाहाकार मचा रखा है. दुनियाभर के वैज्ञानिक और डॉक्टर अभी तक कोरोना वायरस का सटीक इलाज या किसी वैक्सीन की खोज नहीं कर पाए हैं. ऐसे में हम धर्म शास्त्रों के आधार पर कोरोना जैसे जानलेवा वायरस से मुक्ति पा सकते हैं. ज्योतिशाचार्यों के अनुसार, धर्म शास्त्रों में ऐसे तमाम पौधों के बारे में पता चलता है जो ग्रह-नक्षण संबंधी समस्याओं का निदान कर देते हैं.

इनमें शनि का प्रकोप सबसे अधिक माना जाता है. शन‍ि देव के प्रकोप से राहत पाने के लिए अन्‍य पूजा के साथ पीपल वृक्ष के उपायों की बात भी सामने आती है. कोरोना के संक्रमण को लेकर ज्योतिष इसके कारण में शनि को भी एक खास तरजीह दे रहे हैं. हालांकि, पीपल को घर में लगाने की मनाही है तो कई बार इसकी पूजा कर पाना संभव नहीं होता. खासतौर पर लॉकडाउन के इस पीर‍ियड में आप घर से बाहर नहीं जा सकते और ना ही पीपल की पूजा कर सकते हैं.


बता दें कि प्राचीन भारतीय संस्कृति में दिनचर्या का शुभारंभ हवन, यज्ञ, अग्निहोत्र आदि से होता था. तपस्वी और ऋषि-मुनि, सद्गृहस्थों, वटुक-ब्रह्मचारी नित्य प्रति यज्ञ किया करते थे. प्रातः और सायं यज्ञ करके संसार के विविध रोगों का निवारण भी होता था. ब्रह्मवर्चस शोधसंस्थान की किताब ‘यज्ञ चिकित्सा’ में बताया गया है कि यज्ञों का वैज्ञानिक आधार है. कोरोना वायरस से बचाव के लिए भी प्राचीन चिकित्‍सा पद्धति का सहारा लिया जा सकता है, जानकारों की ओर से इसी क्रम में संक्रमण की रोकथाम और विषाणुओं को नष्‍ट करने के लिए प्राचीन वेद और पुराण में यज्ञ करने की बात कही गई है और वातावरण की शुद्धि के लिए बहुत ही कारगर बताया गया है.

वेदकाल से भारत में यज्ञ कर्म किए जाते हैं. भारतीय संस्कृति में यज्ञों का आध्यात्मिक लाभ होता था साथ ही इससे वैज्ञानिक स्तर पर भी अनेक लाभ बताए गए हैं. सहज सरल और प्रतिदिन किया जाने वाला यज्ञ है ‘अग्निहोत्र’. अग्निहोत्र नियमित करने से वातावरण की शुद्धि होती है. साथ ही उससे पीड़ित व्यक्ति की शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक शुद्धि भी होती है. यही नहीं यज्ञ करने से वास्तु और पर्यावरण की भी रक्षा होती है. अग्निहोत्र प्राचीन वेद-पुराणों में वर्णित एक साधारण धार्मिक संस्कार है, जो प्रदूषण को अल्प करने तथा वायुमंडल को आध्यात्मिक रूप से शुद्ध करने के लिए किया जाता है.

 

यज्ञ के धुएं से विषाणु नष्‍ट हो जाते हैं. बता दें कि वातावरण में विषाणु होते हैं जो यज्ञ के धुएं ने नस्ट हो जाते हैं. ऐसे यज्ञ को आप घर बैठे यानी बिना किसी पुरोहित या पुजारी के भी सम्पन्न कर सकते हैं. अग्निहोत्र नित्य करने से धर्माचरण तो होगा ही, साथ ही पर्यावरण के साथ ही समाज की भी रक्षा होती है. अग्निहोत्र के संदर्भ में अनेक वैज्ञानिक प्रयोग किए गए हैं. जो कि यह बताते हैं इसका धुंआ नेगेटिव एनर्जी को खत्‍म करने के साथ ही वातावरण से विषाणुओं का भी नाश करता है.

यज्ञ करने से प्रदूषित हवा के घातक सल्फर डाइ ऑक्‍साइड का असर 10 गुना कम होता है. पौधों की वृद्धि नियमित की अपेक्षा अधिक होती है. अग्निहोत्र की विभूति कीटाणुनाशक होने से घाव, त्वचा रोग इत्यादि के लिए अत्यंत उपयुक्त है. पानी के कीटाणु और क्षारीयता भी कम होती है. वहीं ये भी माना जाता है कि यज्ञोपैथी का स्वास्थ्य पर बड़ा ही अनुकूल प्रभाव होता है. इन दिनों कोरोना के संक्रमण में ज्योतिष शनि को भी एक कारण बता रहे हैं. ऐसे में ज्‍योतिष शास्‍त्र में शन‍ि देव को प्रिय एक अन्‍य पौधे का जिक्र मिलता है. इसे आप अपने घर में लगाकर यदि न‍ियमित रूप से पूजन-अर्चन करें तो शन‍ि प्रकोप से राहत मिलती है.

घर पर भूलकर भी न लगाएं ये चीजें, वास्तु के हिसाब से होता है अशुभ

घर को बुरी नजर बचाने के लिए अपनाएं ये वास्तु टिप्स, नेगेटिविटी रहेगी दूर!

सुबह जल्दी उठकर ये काम करने से घर में आएगी सुख-समृद्धि

First published: 20 April 2020, 15:10 IST
 
पिछली कहानी
अगली कहानी