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दीपावली पर ऐसे करें मां लक्ष्मी का पूजन, घर में आएगी सुख-समृद्धि, ये है पूजा का शुभ मुहूर्त

कैच ब्यूरो | Updated on: 7 November 2018, 10:10 IST

भारत के साथ-साथ आज दुनियाभर में दीपावली का पावन पर्व मनाया जा रहा है. दीपों के इस त्योहार को कार्तिक मास की अमावस्या तिथि को मनाते हैं. दीपावली को हिंदू धर्म का मुख्य त्योहार माना जाता है. पुराणों के अनुसार आज ही के दिन भगवान राम लंका पर विजय पाकर अयोध्या नगरी लौटे थे. मर्यादा पुरुषोत्तम के अयोध्या वापस आने की खुशी में अयोध्यावासियों ने प्रभू राम के स्वागत के लिए घी के दिए जलाए और जमकर खुशियां मनाईं. इसी खुशी को हर साल याद करने के लिए दीपावली का त्योहार मनाया जाता.

इस दौरान काली रात रोशनी की जगमगाहट से रोशन हो जाती है. धन की देवी को खुश करने की यह खास रात है. इस दिन लक्ष्मी पूजन करने की परंपरा है. ऐसा माना जाता है कि इस दिन लक्ष्मी पूजन से घर में सुख-समृद्धि आती है और घर खुशियों से भर जाता है.

दीपावली के लिए ये है पूजन सामग्री

दीपावली की पूजा के लिए रौली, मौली, सुपारी-5, धूप, पान पत्ते-5, लौंग, इलायची-5, कमल गट्टे -20, कमल का फूल, फूल माला, खुले फूल, 5 फल, 5 मिठाई, दूध आधा किलो, दही-250 ग्राम, शहद, केसर, लक्ष्मी-गणेश जी की फोटो या मूर्ति, आम के पत्ते, कपूर,जनेऊ, चंदन, दूब, मिट्टी के दीये-12 छोटे एक बड़ा, सरसों का तेल, देसी घी, रूई, ज्योति आदि अवश्य रखें.

इसके साथ ही पंच मेवा पांच मिठाई, चांदी का सिक्का, अष्ट गंध, माता का शृंगार, चावल सवा किलो, शक्कर 50 ग्राम, खीलें, बताशे, मिठाई, मोमबत्ती, गंगाजल, माचिस, शंख, रेशमी वस्त्र, पीली सरसों, सिंदूर, पंचामृत, हवन सामग्री, जौ, तिल, तुलसी की माला, हवन कुंड, आसन, दक्षिणा आदि रखना भी शुभ माना जाता है.

पूजन विधि

दीपावली के दिन स्नान करें, पूजा के लिए उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुख रखें और कोई दरी या कम्बल बिछा लें. द्वार पर रंगोली बनाएं. थाली में अष्ट दल बना कर नव ग्रहों की आकृति आटे से बना कर लक्ष्मी जी की प्रतिमा स्थापित करें और आह्वान करें. अक्षत, पुष्प, अष्टगंध युक्त जल अर्पित करें. दिशा रक्षण के लिए बाएं हाथ से पीली सरसों लेकर दाएं हाथ में ढंक कर चारों दिशाओं में फेंके.

गणेश जी, लक्ष्मी जी व सरस्वती जी की मूर्तियां रखें. चौकी पर लाल वस्त्र बिछा कर थाली रखें. कलश, धूप दीप रखें. कलश में जल भर कर उसमें गंगाजल, थोड़े से चावल, एक चांदी का या प्रचलित सिक्का डाल दें. कलश पर आम के 5 या 7 पत्ते रखें. पानी वाले नारियल पर 3 या 5 चक्र कलावा या मौली बांधकर कलश पर रख दें.

केसर, चंदन से स्वस्तिक बना कर गणेश जी, लक्ष्मी जी व श्रीयंत्र को स्थापित करें. लक्ष्मी जी को गणेश जी के दाएं रखें. गणेश जी पर अक्षत-पुष्प चढ़ाएं. पंचामृत-दूध, दही, घी, शहद व शक्कर से स्नान कराएं फिर जल डालें.

फिर मौली, जल, चंदन, कुमकुम, चावल, पुष्प, दूर्वा, सिंदूर, रोली, इत्र, धूप दीप, मेवे प्रसाद फल पान, सुपारी, लौंग, इलायची व द्रव्य-11 रुपए बारी-बारी चढ़ाएं. दूध, दही, घी, मधु, शक्कर पंचामृत,चंदन, गंगा जल से प्रतिमा को स्नान करवाएं. वस्त्र, उप वस्त्र, आभूषण, चंदन, सिंदूर, कुमकुम, इत्र, फूल आदि समर्पित करें. लक्ष्मी जी की प्रतिमा के हर अंग को पुष्प से पूजें.

इस मंत्र का जाप करते जाएं

ओम् श्रीं हृीं श्रीं महालक्ष्म्यै नम:

दीपावली शरद सरस्वती पूजन मुहूर्त

सुबह 10:45 से दिन 12:00 तक. यह शुभ काल है.

संध्या कालीन दीपावली पूजन मुहूर्त

शाम 17:27 से रात 20:06 तक. इस समय प्रदोष काल रहेगा.

वृषभकाल दीपावली पूजन मुहूर्त

शाम 05:57 से शाम 19:53 तक. इस समय स्थिर वृष लग्न है.

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First published: 7 November 2018, 10:10 IST
 
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