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Easter Day 2018: दुनिया भर में मनाया जा रहा है ईस्टर संडे, ये है परंपरा

कैच ब्यूरो | Updated on: 1 April 2018, 15:09 IST

आज पूरी दुनिया में ईस्टर डे मनाया जा रहा है. ईस्टर डे को ईसाई धर्म के लोग धूम-धाम से मनाते हैं. ईसाई धर्म में ईस्टर एक बेहद महत्त्वपूर्ण दिन माना जाता है. यह पर्व कभी भी साल के किसी निश्चित दिन नहीं मनाया जाता, बल्कि इसकी तारीख हर साल बदलती रहती है. आमतौर पर यह मार्च और अप्रैल महीने के बीच में ही मनाया जाता है. इस बार इस पर्व को 1 अप्रैल को मनाया जा रहा है.

क्यों मनाया जाता है ईस्टर डे

ईसाई धर्म के मुताबिक इस पर्व को गुड फ्राइडे के तीसरे दिन मनाया जाता है. यानी गुड फाइडे के बाद आने वाले रविवार को मनाया जाता है. ऐसी मान्यता है कि सूली पर चढ़ाए जाने के तीन दिन बार प्रभु ईशु दोबारा जिंदा हो गये थे. इसी खुशी में ईसाई समुदाय के लोग ईस्टर डे या ईस्टर संडे मनाते हैं. ईसाई धर्म के मुताबिक माना जाता है कि प्रभु ईसा सूली पर लटकाने के बाद दोबारा जीवित हो गए और 40 दिनों तक अपने शिष्यों के बीच रहे और अंत में स्वर्ग चले गए.

गिफ्ट में दिये जाते हैं अंडे

ईस्टर डे के दिन ईसाई धर्म के लोग एक-दूसरे को अंडे गिफ्ट के रूप में देते हैं. इस दिन अंडों को विशेष रूप से सजाता जाता है. बता दें की ईसाई धर्म में अंडों को बहुत पवित्र चीज माना जाता है. इस धर्म के लोगों को मानना है कि अंडा नया उत्साह और नई उमंग का संदेश देता है. इस दिन ईस्टर का पर्व उषाकाल में महिलाओं द्वारा किया जाता है, माना जाता है इसी समय प्रशु यीशु दोबारा जीवित हुए थे. उन्हें सबसे पहले मरियम मगदलीनी नाम की महिला ने देखा और उसके बाद अन्य महिलाओं को इस बारे में बताया था.

क्या है ईस्टर काल

ईस्टर काल 40 दिनों तक मनाया जाता है, इस दौरान सभी ईसाई उपवास, प्रार्थना और प्रायश्चित करते हैं. ईस्टर काल के मुताबिक ईस्टर से पहले वाले शुक्रवार को गुडफ्राइडे मनाया जाता है. गुडफ्राइडे के दिन ही ईसा मसीह को सूली पर लटकाया गया था. ईस्टर से पहले आने वाले सप्ताह को पवित्र सप्ताह कहा जाता है.

 

पश्चिम के देशों में उपवास करते हैं लोग

हर धर्म और संस्कृति में वातावरण का भी फर्क देखने को मिलता है. पश्चिमी देशों में ईसाई धर्म के लोग ईस्टर सीजन के दौरान ऐश वेड्नस्डे को उपवास रखना शुरू करते हैं और ईस्टर संडे को अपने उपवास का अंत करते हैं. वहीं पूर्वी ईसाई सभ्यता के लोग चर्चों में ईस्टर काल के दौरान सोमवार से उपवास रखना शुरू किया जाता है.

लोगों को भाईचारा और एकता संदेश, फिर भी सूली पर चढ़ा दिए गये प्रभु ईसा

प्रभु ईसा ने पूरे जीवन अपने भक्तों को भाईचारा, एकता, मानवता और शांति का संदेश दिया. ईसा लोगों में ईश्वर के प्रति आस्था जगाने में लगे थे. वह खुद को ईश्वर का पुत्र मानते थे. ईसा मसीह की बढ़ती लोकप्रियता धर्मगुरुओं को पसंद नहीं आ रही थी. इसके बाद धर्मगुरुओं ने रोम के शासक को ईसा के बारे में गलत जानकारिया देना शुरु कर दिया.

धर्मगुरुओं ने ईसा को ईश्वर पुत्र बताने को भारी पाप करार दिया. शासक ने ईसा को क्रूस पर लटकाने का आदेश दे दिया. माना जाता है क्रूस पर लटकाने से पहले ईसा को अनेक यातनाएं दी गईं. उनके सिर पर कांटों का ताज रखा गया. उन्हें शराब पिलाई गई. इन सब यातनाओं के बाद ईसा को सूली पर कीलों के साथ टांग दिया गया. 

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First published: 1 April 2018, 14:58 IST
 
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