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Eid Mubarak 2018: जानिए ईद उल-फितर के दिन मुस्लिम क्यों करते है मुंह मीठा ?

कैच ब्यूरो | Updated on: 15 June 2018, 17:41 IST

ईद मुस्लिमों का सबसे बड़ा पर्व है. यह दिन दुनियाभर के मुसलमानों के लिए एक ऐसा दिन होता है जब सभी मिलकर आपस खुशियां बांटते हैं, दावत करते हैं. नए कपड़े पहन कर ईदगाह जाते हैं और खुदा की इबादत करते हैं. ईद की जो इससे भी दिलचस्प बात ईद है वो ये कि ईद किस दिन मनाया जाएगा ये चांद से तय होता है. 30 दिन के रोजे के बाद रमज़ान की आखिरी रात का चांद ही बताता है कि अगले दिन ईद होगी या नहीं. आइए जानते हैं कि आखिर ईद क्या होती है और क्यों मनाई जाती है.

ईद का मतलब है जश्न मनाना या खुशी मनाना. इस्लाम धर्म में ईद दो बार मनाई जाती है. एक बड़ी ईद जिसे ईद-उल-फितर कहा जाता है, दूसरा बकरी ईद जिसे मुस्लिम छोटी ईद भी कहते हैं. ईद रमजान के पावन महीने में 30 दिनों के रोजे के बाद मनाया जाता है. रमजान के पूरे महीने मुस्लिम रोज़ा रखते हैं और फिर रमजान के आखरी रात से चांद दिखने का इंतजार करते हैं.

फिर जिस रात चांद का दीदार होता है, उसके अगले दिन ईद मनायी जाती है. ईद की दिन मुस्लिमों के घर मीठे के रुप में खास तौर पर सेवईयां बनाई जाती है. इसके अलावा वो अपने रिश्तेदारों को सेवईयां उपहार स्वरुप भी देते है. इस दिन सभी एक-दूसरे के गले मिलते हैं और एक दूसरे को ईद की मुबारक बाद भी देते हैं. 

पहली बार कब मनाया गया था ईद

ऐसा माना जाता है कि पहली बार सन् 624 ईस्वी में पैगम्बर हजरत मुहम्मद ने बद्र के युद्ध में जीत हासिल की थी, जिसके बाद इस जीत का जश्न मनाया गया था. तभी से ईद-उल-फितर मनाया जाता है. जो आज भी बरकरार है. इस दिन मुस्लिम समुदाय के लोग मीठे पकवान बनाते है और खाते हैं. साथ ही घर के बड़े छोटों को ईदी भी देते हैं. इसके अलावा इस दिन मुस्लिम दान भी देते है कहा जाता है कि दान देकर वो अल्लाह को याद करते है. इस दान को इस्लाम में फितरा कहते हैं. इसीलिए भी ईद को ईद उल-फितर कहा जाता है.

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First published: 15 June 2018, 17:41 IST
 
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