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गणेश चतुर्थी 2018: ऐसे करें विघ्नहर्ता गणेश का पूजन, बनेंगे सभी बिगड़े काम

कैच ब्यूरो | Updated on: 8 September 2018, 11:02 IST

हमारा देश कृषि के साथ उत्सव प्रधान भी है. यहां हर महीने, हर सप्ताह कोई ना कोई उत्सव जरूर मनाया जाता है. उन्हीं में से एक है गणेश चतुर्थी. भगवान गणेश को समर्पित गणेश चतुर्थी हर साल देशभर में बड़ी धूमधाम से मनाई जाती है. ऐसे में विघ्नहर्ता गणेश का पूजन अगर विधि विधान से किया जाए तो मां पार्वती के लाल की भक्तों पर हमेशा कृपा बनी रहेगी.

इस साल गणेश चतुर्थी का पर्व गणेश महोत्सव 13 से 23 सितंबर तक चलेगा. इसी के साथ इस साल गणेश चतुर्थी पर कई साल बाद अद्भुत संयोग बन रहा है. ऐसे में अगर भक्त खास तरह से पूजन करेंगे तो उन्हें दोगुना फल मिलेगा. ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक, इस बार गणेश चतुर्थी पर गुरू स्वाति योग बन रहा है. भगवान गणेश सुख और समृद्धि के देवता हैं इसलिए यह योग अधिक फलदायी होगा.


इस बार चतुर्थी बुधवार यानी 12 सितंबर शाम 04:08 बजे से शुरू होगी, जो 13 सितंबर यानी गुरुवार दोपहर 02.52 बजे तक रहेगी. चतुर्थी के गुरूवार को पड़ने से ये महासंयोग बन रहा हैगणेश चतुर्थी पर पूजन के लिए सुबह 11:10 बजे से दोपहर 01:38 बजे तक शुभ मुहूर्त है. वहीं इस बार गणेश पूजा में राहु दोष से भी मुक्ति मिलेगी. वहीं इस दिन की गई गणेश स्थापना से आपके जीवन में आ रही तमाम बाधाएं खत्म हो जाएंगी और आपको जीवन में कामयाबी मिलेगी.

गणेश पूजन में भूल से भी ना करें ये गलती

शास्त्रों के मुताबिक, गणेश जी की पीठ के दर्शन करना अशुभ फलदायी होता है. गणेश जी की पीठ पर दरिद्रता का निवास होता है. ऐसी मान्यता है कि इसके दर्शन करने से व्यक्ति का दुर्भाग्य आता है. ऐसा करने से किस्मत वाले लोग भी कंगाल हो जाते हैं.

गणेश महोत्सव के मौके पर अगर आप भी गणेश जी की प्रतिमा स्थापित कर रहे हैं तो इस बात का विशेष ध्यान रखें कि, उनका मुख हमेशा दक्षिण और पश्चिम दिशा की ओर हो. इसके विपरीत दिशा में मुंह होने से घर में दरिद्रता आती है. इसलिए शुभ फल के लिए मूर्ति सही दिशा में स्थापित करनी चाहिए.

बता दें कि अगर आप घर में गणेश जी की प्रतिमा स्थापित कर रहे हैं, तो प्रतिमा बहुत बड़ी नहीं होनी चाहिए. अगर खुद नदी की मिट्टी से प्रतिमा बनाएं तो उसका फल सर्वश्रेष्ठ होता है. वहीं पूजा के बाद चन्द्रमा को अर्घ्य दिए बिना व्रत का समापन नहीं करना चाहिए.

गणेश पूजन के समय इस बात का विशेष ध्यान रखें कि पूजा में तुलसी न चढ़ाएं. कहा जाता है कि तुलसी को गणेश ने श्राप दिया था. जिसके बाद से ही तुलसी को गणेश पूजा से वर्जित कर दिया गया था. ऐसा करने से गणेश जी नाराज हो जाते हैं.

इसके साथ ही गणेश पूजन में सफेद फूलों का प्रयोग नहीं करना चाहिए. गणेश जी का पूजन लाल फूल से करना उचित माना जाता है. बता दें कि गणेश जी उत्साह और ऊर्जा के प्रतीक माने जाते हैं. वहीं उन्होंने चंद्रमा को उनका उपहास करने पर श्राप दिया था. जिसके बाद ही सफेद चीजें उनकी पूजा में वर्जित मानी जाती हैं.

इसलिए इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि गणेश पूजा के वक्त पूजन की थाली में सिर्फ लाल रंग के फूल हों. वहीं सफेद रंग के फूलों को गणेश पूजन में इस्तेमाल नहीं करना चाहिए. ऐसा करने के गणेश जी भक्तों से प्रसन्न होंगे और उनकी मनोकामना पूरी करेंगे.

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First published: 8 September 2018, 11:02 IST
 
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