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गणेश चतुर्थी 2018: श्वेत गणपति की पूजा करने से मिलेगा मोक्ष, इन चीजों को भी करें नजरअंदाज

कैच ब्यूरो | Updated on: 12 September 2018, 9:52 IST

कल यानि गुरुवार को गणेश चतुर्थी का त्योहार मनाया जाएगा. भक्तगण भगवान गणेश की पूजा अर्चना कर अपनी मनोकामना पूरी होने का वरदान मांगेंगे. कई स्थानों पर गणेश चतुर्थी को विनायक चतुर्थी के रूप में भी मनाया जाता है. इसी दिन भगवान विनायक का अवतरण हुआ था. जिन्हें सभी देवी-देवताओं में सबसे पहले पूज्य माना जाता है.

गणेश चतुर्थी पर चंद्रमा के दर्शन ना करें

इसे कलंक चतुर्थी और शिवा चतुर्थी के रूप में भी जाना जाता है. भगवान गणेश की पूजा करने से भक्तों के सभी विघ्न और बाधाएं समाप्त हो जाती हैं. चतुर्थी तिथि बुधवार यानि 12 सितंबर अपराह्न शुरु हो जाएगी. जो 13 सितंबर को अपराह्न तक रहेगी. इसलिए भगवान गणेश भक्तों को 12 और 13 सितंबर को चतुर्थी तिथि तक चंद्रमा के दर्शन से बचना होगा.

 

ऐसा ना करने पर जातक पर झूठा कलंक लग जाएगा, उसी तरह जैसे भगवान श्रीकृष्ण स्यमंतक मणि चुराने का कलंक लगा था. अगर किसी ने इस दौरान चंद्रमा देख भी लिया तो कृष्ण-स्यमंतक कथा को पढ़ने या विद्वानों से सुनने पर भगवान गणेश क्षमा कर देते हैं. इसके साथ ही कलंक से बचने के लिए हर दूज का चांद देखना आवश्यक माना जाता है.

करें ये उपाय, शत्रुओं से मिलेगा छुटकारा

अगर आप शत्रुओं से परेशान हैं तो भगवान गणेश की पीली कांति वाले स्वरूप का ध्यान करना चाहिए. वहीं किसी को अपनी बात मनवाने के लिए भगवान गणेश के अरुण कांतिमय स्वरूप का मन ही मन ध्यान करें. किसी के मन में अपने लिए प्रेम पैदा करना है तो लाल रंग वाले गणेश जी का ध्यान करें. बलवान आदि होने के लिए भी इसी रूप का ध्यान करें.

जिनको धन पाने की इच्छा हो, उन्हें हरे रंग के गणेश की पूजा करनी चाहिए और जिन्हें मोक्ष प्राप्त करना है, उन्हें सफेद रंग के गणपति की पूजा करनी चाहिए. लेकिन इन कार्यों में पूरी सफलता तभी मिलेगी, जब आप तीनों समय गणपति का ध्यान और जाप करेंगे.

12 मोदक अर्पण करें

गणेश चतुर्थी के दिन मध्याह्न में गणपति पूजा में 21 मोदक अर्पण करने चाहिए. मोदक अर्पण करने के बाद- ‘विघ्नानि नाशमायान्तु सर्वाणि सुरनायक. कार्यं मे सिद्धिमायातु पूजिते त्वयि धातरि', मंत्र का जाप कर भगवान की प्रार्थना करनी चाहिए. गणेश को अर्पित किया गया नैवेद्य सबसे पहले उनके सेवकों- गालव, गार्ग्य, मंगल और सुधाकर को देना चाहिए. चंद्रमा, देवाधिदेव गणेश और चतुर्थी माता को दिन में अर्घ्य अर्पित करें. संभव हो तो रात्रि में विनायक कथा सुनें या भजन करें.

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First published: 12 September 2018, 9:52 IST
 
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