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Ganga Dussehra 2020: जानिये कब और क्यों मनाया जाता है गंगा दशहरा

कैच ब्यूरो | Updated on: 28 May 2020, 14:12 IST

Ganga Dussehra 2020: हमारे देश को तीज-त्योहारों (Festivals) का देश कहा जाता है, जहां आए दिन कोई न कोई त्योहार या उत्सव मनाया जाता है. ऐसा ही एक त्योहार है गंगा दशहरा (Ganga Dussehra) का. जिसे हर साल ज्येष्ठ महीने की शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाता है. ये त्योहार देवी गंगा (Devi Ganga) के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने के लिए मनाया जाता है. जो गंगावतरण (Gangavtran) के रूप में भी देशभर में लोकप्रिय है.

इस त्योहार को गंगा के पृथ्वी पर अवतरण के दिन के रूप में मनाया जाता है. ऐसा माना जाता है कि पवित्र गंगा के पृथ्वी पर आने से ये शुद्ध हो गई और इसे दिव्य दर्जा प्राप्त हुआ था. ये त्योहार दस दिनों तक चलता है. गंगादशहर निर्जला एकादशी से एक दिन पहले शुरु होता है.


क्या है गंगा दशहरा का महत्व?

गंगा दशहरा पवित्र गंगा की क्षमता से, दस पापों को शुद्ध करने को दर्शाता है जो कि कार्यों, भाषण और विचारों से संबंधित हैं. ऐसा माना जाता है कि जब भक्त इस दिन देवी गंगा की पूजा करते हैं तो वे अपने वर्तमान और पिछले पापों से छुटकारा पाने के साथ-साथ मोक्ष भी प्राप्त करते हैं. ये दिन निवेश करने, नया घर खरीद, वाहन आदि खरीदने और नए घर में प्रवेश करने के लिए भी शुभ माना जाता है.

कैसे मनाया जाता है गंगा दशहरा का त्योहार

इस दिन भक्त सुबह जल्दी उठ जाते हैं और और गंगा के पवित्र जल में स्नान करते हैं. उसके बाद शाम के समय, भक्त गंगा आरती भी करते हैं और पवित्र नदी में फूल, दीया, सुपारी, फल और मिठाई चढ़ाते हैं. इसके अलावा बहुत से भक्त गंगा तट पर ध्यान भी करते हैं.

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गंगा दशहरा की कथा-

हिंदू धर्मग्रंथों और पौराणिक कथाओं के मुताबिक, यह कहा जाता है कि सत्य युग में, सगर नामक एक राजा था जो सूर्यवंश राज-कुल पर शासन करता था. राजा सगर राजा भागीरथ के पूर्वज थे. एक बार, राजा सगर ने अपनी उत्कृष्टता और संप्रभुता साबित करने के लिए अश्वमेध यज्ञ किया. यज्ञ के परिणामों और चिंता और भय के कारण भगवान इंद्र डर गए और उन्होंने अश्वमेध यज्ञ के घोड़ों को चुरा लिया, ताकि यह पूरा न हो सके. उन्होंने ऋषि कपिला के आश्रम में घोड़ों को छोड़ दिया.

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जब राजा सगर और उनके पुत्रों को घोड़ों के बारे में पता चला, तो उन्होंने गलती से ऋषि कपिला को अपने घोड़ों को चुरा लेने के आरोप में क्रोधित होकर पवित्र ऋषि पर हमला करने को तैयार हो गए. लेकिन इससे पहले कि वे इस तरह के पापपूर्ण कृत्य को करते, ऋषि ने उन्हें श्राप दे दिया और परिणामस्वरूप, वे सभी जल गए. पूर्ण परिदृश्य के बारे में जानने पर, ऋषि कपिला ने राजा सगर के आयुष्मान नाम के पोते को घोड़े लौटा दिए. उन्होंने ऋषि से अपने श्राप को वापस लेने का अनुरोध किया. इसके लिए, ऋषि कपिला ने उनसे कहा कि वे अपने श्राप से तभी छुटकारा पा सकते हैं जब देवी गंगा पृथ्वी पर आकर उन सभी को अपने दिव्य जल से शुद्ध करेंगी.

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उसके बाद भागीरथ, राजा के उत्तराधिकारियों में से एक ने देवताओं की मदद लेने और पिछले कर्म से छुटकारा पाने और अपने पूर्वजों की आत्माओं की शुद्धि करने के लिए घोर तपस्या की. वह जानता था कि केवल गंगा ही उन्हें पवित्र करने की शक्ति रखती है. भागीरथ ने कठोर तपस्या की और आखिरकार युगों के बाद, भगवान ब्रह्मा ने उन्हें आश्वासन दिया कि देवी गंगा पृथ्वी पर अवतरित होंगी और उनकी मदद करेंगी.

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इसमें एक एक बड़ी समस्या थी क्योंकि गंगा का बहाव इतना मजबूत था कि यह पृथ्वी को पूरी तरह से नष्ट कर सकता था. भगवान ब्रह्मा ने भागीरथ को भगवान शिव से अपने बालों से नदी को छोड़ने का अनुरोध करने के लिए कहा, क्योंकि वह एकमात्र ऐसे हैं जो गंगा के प्रवाह को नियंत्रित कर सकते हैं. भागीरथ की भक्ति और सच्ची तपस्या के कारण, भगवान शिव सहमत हो गये और इस तरह गंगा पृथ्वी पर आईं और उनके पूर्वजों की आत्माओं को शुद्ध कर दिया.

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First published: 28 May 2020, 14:12 IST
 
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