Home » धर्म » Gupt Navratri 2020: Know whet celebrated Gupt Navratri and why it is special for Tantric Practices
 

Gupt Navratri 2020: जानिए क्या होते हैं गुप्त नवरात्र, तांत्रिकों के लिए क्यों होते हैं खास

कैच ब्यूरो | Updated on: 23 June 2020, 14:10 IST

Gupt Navratri 2020: हमारा देश तीज-त्योहारों (Festivals) का देश माना जाता है. जहां आए दिन कोई न कोई त्योहार या व्रत (Vrat) मनाया जाता है. इन्हीं में से एक है गुप्त नवरात्र (Gupt Navratri). देश में अधिकत लोग सिर्फ दो नवरात्र के बारे में ही जानते हैं, जिनमें एक चैत्र नवरात्र और दूसरे शारदीय नवरात्र (Shardiya Navratri) शामिल हैं. लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि एक साल में चार नवरात्र आते हैं. इनमें चैत्र और आश्विन माह के नवरात्रों को सामान्य माना जाता है. जबकि माघ और आषाढ़ मास के नवरात्र गुप्त रहते हैं. गुप्त नवरात्र का तांत्रिकों के लिए विशेष महत्व है. क्योंकि इन नवरात्रों में तंत्र-मंत्र से संबंधित उपासना की जाती है.

इस साल ये नवरात्र 22 जून से शुरु हो गए हैं और ये 29 जून तक चलेंगे. ज्योतिषाचार्यों केे मुताबिक, इन दिनों दस महाविद्याओं की आराधना की जाती है. इन दस महाविद्याओं में काली, तारा देवी, त्रिपुर-सुंदरी, भुवनेश्वरी, छिन्नमस्ता, त्रिपुरी भैरवी, मां धूमावती, मां बगलामुखी, मातंगी व कमला देवी शामिल हैं. ज्योतिष के ज्ञाता बतातें हैं कि महाविद्याओं की पूजा पूरे विधि-विधान के साथ ही की जानी चाहिए, अन्यथा पूजा का विपरीत असर भी हो सकता है. इसीलिए किसी योग्य ब्राह्मण के मार्गदर्शन में ही गुप्त नवरात्र की पूजा करनी चाहिए. बता दें कि गुप्त नवरात्र का महत्व प्रकट नवरात्र से अधिक होता है. ये नवरात्र साधकों के लिए खास होते हैं. इन समय साधक को सिद्धियों की प्राप्ति होती है.


Surya Grahan 2020: कल आसमान में दिखेगा अद्भुत नजारा, 38 साल बाद बना ऐसा संयोग

Solar Eclipse 2020: सूर्य ग्रहण देखने के दौरान इन बातों का रखें ख्याल, नहीं तो हो सकता है बड़ा नुकसान

इन नवरात्रों में दस महाविद्याओं की साधना करके साधक मनोवांछित फल पा सकते हैं. गुप्त नवरात्र में संहारकर्ता देवी-देवताओं के गुणों एवं गणिकाओं यानी भूत-प्रेत, पिशाच, बैताल, डाकिनी, शाकिनी, खण्डगी, शूलनी, शववाहनी, शवरूढ़ा आदि की साधना की जाती है. ऐसी साधनाएं शाक्त मतानुसार शीघ्र ही सफल होती हैं. दक्षिणी साधना, योगिनी साधना, भैरवी साधना के साथ पंच मकार जिनमें मद्य, मछली, मुद्रा, मैथुन, मांस शामिल होता है की साधना भी इसी नवरात्र में की जाती है.गुप्त नवरात्र में दुर्गा सप्तशती का पाठ करना शुभ माना जाता है.

Solar Eclipse 2020: लग गया सूतक काल अब भूलकर भी ना करें ये काम

इस दुर्गा सप्‍तशती को ही शतचण्डि, नवचण्डि अथवा चण्डि पाठ भी कहा जाता है. ऐसा कहा जाता है कि रामायण के दौरान लंका पर चढ़ाई करने से पहले भगवान श्रीराम ने इसी चंडी पाठ का आयोजन किया था, जो कि शारदीय नवरात्र के रूप में आश्विन मास की शुक्‍ल पक्ष की प्रतिपदा से नवमी तिथि तक रहती है. इसीलिए नवरात्र के दौरान नव दुर्गा के नौ रूपों का ध्‍यान, उपासना व आराधना की जाती है तथा नवरात्र के प्रत्‍येक दिन मां दुर्गा के एक-एक शक्ति रूप का पूजन किया जाता है.

Solar Eclipse 2020: घर बैठे इन तरीकों से देख सकते हैं सूर्य ग्रहण, यहां होगा लाइव टेलिकास्ट

Solar Eclipse 2020: सूर्य ग्रहण के समाप्त होने के बाद जरूर करने चाहिए ये काम

ब्रह्मदेव ने कहा कि जो मनुष्‍य दुर्गा सप्तशती का पाठ करेगा उसे सुख मिलता है. गुप्त नवरात्र में तांत्रिक पूजा करने का विधान है. ये नवरात्र तांत्रिक सिद्धियां पाने के लिए यह एक अच्छा अवसर होता है. जिसमें तांत्रिक सिद्धियां पाते हैं. इसके लिए वो किसी सूनसान जगह पर जाकर दस महाविद्याओं की साधना करते हैं. इन नवरात्र तक माता के मंत्र का 108 बार जाप किया जाता है. यही नहीं सिद्धिकुंजिकास्तोत्र का 18 बार पाठ करना शुभ माना जाता है. ब्रम्ह मुहूर्त में श्रीरामरक्षास्तोत्र का पाठ आपको दैहिक, दैविक और भौतिक तापों से मुक्त करता है.

Lunar Eclipse 2020: अब अगले महीने इस तारीख को लगेगा ग्रहण, जानिए तारीख और समय

First published: 23 June 2020, 14:10 IST
 
अगली कहानी