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Happy Dussehra 2020: दशहरे पर यहां राम की जगह होती है रावण की पूजा, नहीं होता है दहन

कैच ब्यूरो | Updated on: 25 October 2020, 11:10 IST

Happy Dussehra 2020: बुराई के प्रतीक रावण के पुतले का पूरे देश में दहन किया जा रहा है. हालांकि देश में कुछ ऐसे हिस्से हैं जहां रावण की पूजा होती है. देश में आज विजयादशमी का त्यौहार धूमधाम से मनाया जा रहा है. देश के कई जिले और कस्बे में कभी भी रावण दहन नहीं होता. इन जगहों पर दशानन की पूजा का रिवाज है.

मध्यप्रदेश के मंदसौर जिले में रावण की पूजा होती है. मंदसौर के खानपुरा क्षेत्र में रावण रूण्डी नामक स्थान पर रावण की बहुत ही विशाल मूर्ति है. रावण मंदसौर (दशपुर) का दामाद था. उसकी पत्नी मंदोदरी की वजह से ही दशपुर मंदसौर के नाम से जाना जाता है. रावण को यहां काफी सम्मान दिया जाता है. इसके अलावा विदिशा जिले के गांव में राक्षसराज रावण का मंदिर है.

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उत्तर प्रदेश के कानपुर में भी रावण की पूजा होती है. कानपुर के शिवाला में दशानन का मंदिर है. इस मंदिर में रावण की पूजा शक्ति के प्रतीक के रूप में होती है. रावण का मंदिर 1890 में बनाया गया था. कर्नाटक के कोलार जिले में रावण की पूजा होती है. कर्नाटक के लोग लोग रावण की पूजा इसलिए करते हैं क्योंकि रावण भगवान शिव का भक्त था. मंडया जिले के मालवल्ली तहसील में भी रावण का मंदिर है. यहां बड़ा मेला लगता है, दूर-दूर से लोग रावण की भक्ति में शामिल होते हैं.

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हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा में बैजनाथ कस्बा शिवनगरी के लोग रावण का पुतला जलाने को महापाप मानते हैं. कुछ साल बैजनाथ में रावण ने भगवान शिव की तपस्या की थी. इससे रावण ने मोक्ष का वरदान पाया था. इस कारण शिव भक्त मानते हुए लोग रावण की पूजा करते हैं. इसके अलावा ग्रेटर नोएडा के बिसरख गांव में रावण की पूजा होती है.

रावण का जन्म इसी गांव में माना जाता है. यहां दशहरे के दिन लोग न तो पूजा करते हैं और ना इस गांव में रामलीला का मंचन होता है. इस गांव में रावण का पुतला नहीं जलाया जाता. बिसरख गांव के लोग प्राचीन काल से ही दशहरा नहीं मनाते. इस गांव में रावण के पिता ऋषि विश्रवा रहते थे. राजस्थान के जोधपुर में भी रावण की पूजा होती है. जोधपुर को रावण का विवाह स्थल माना जाता है. 

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First published: 25 October 2020, 10:56 IST
 
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