Home » धर्म » Happy Holi 2021: Know the history of Holi, how many country celebrates holi festival
 

Holi 2021: जानिए क्यों मनाया जाता है होली का त्योहार, किन-किन देशों में रंगों से खेलते हैं लोग

कैच ब्यूरो | Updated on: 29 March 2021, 10:28 IST
Holi (Social Media)

पूरे देश में आज होली (Holi) का त्योहार धूम-धूम से मनाया जा रहा है. लोग एक दूसरे को रंग गुलाल (colours and gulal) लगाकर होली की शुभकामनाएं दे रहे हैं. वहीं कहीं डीजे की धुन पर होरी के हुरियारों की टोलियां नाच-गा रही हैं. होली के इस पावन पर्व पर हम आपको होली के इतिहास और उससे जुड़ी कुछ जरूरी बातों को आपके साथ साझा कर रहे हैं. होली का त्योहार वसंत ऋतु में मनाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण भारतीय त्योहार है. यह पर्व हिंदू पंचांग के मुताबिक, फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है. हिंदू धर्म में होली अत्यंत प्राचीन पर्व है जो भारत का भी सबसे प्राचीनतम पर्व माना जाता है.

इसे कुछ स्थानों पर होलिका या होलाका नाम से मनाया जाता था. वसंत ऋतु में हर्षोल्लास के साथ मनाए जाने के कारण इसे वसंतोत्सव और काम-महोत्सव के नाम से भी जाना जाता है. इतिहासकारों का मानना है कि आर्य भी पर्व को मनाया करते थे, लेकिन अधिकतर यह पूर्वी भारत में ही मनाया जाता था. होली का वर्णन अनेक पुरातन धार्मिक पुस्तकों में मिलता है. जैमिनी के पूर्व मीमांसा-सूत्र और कथा गार्ह्य-सूत्र. नारद पुराण औऱ भविष्य पुराण जैसे पुराणों की प्राचीन हस्तलिपियों और ग्रंथों में भी होली का उल्लेख किया गया है. विंध्य क्षेत्र के रामगढ़ स्थान पर स्थित ईसा से 300 वर्ष पुराने एक अभिलेख में भी इसका उल्लेख किया गया है. संस्कृत साहित्य में वसंत ऋतु और वसन्तोत्सव अनेक कवियों के प्रिय विषय रहे हैं.


इसके साथ ही सुप्रसिद्ध मुस्लिम पर्यटक अलबरूनी ने भी अपने ऐतिहासिक यात्रा संस्मरण में होलिकोत्सव का वर्णन किया है. यही नहीं भारत के अनेक मुस्लिम कवियों ने अपनी रचनाओं में इस बात का उल्लेख किया है कि होलिकोत्सव केवल हिंदू ही नहीं कई मुसलमान भी मनाते हैं.

शायस्ता खां के दरबार में खेली जाती थी होली

ऐसा नहीं है कि होली का त्योहार केवल हिंदू ही मनाते हैं बल्कि इस त्योहार को कई स्थानों पर मुस्लिम धर्म के अनुयाई भी मनाते हैं. प्राचीन काल से अविरल होली मनाने की परंपरा को मुगलों के शासन में भी मनाया जाता था. कुछ मुगल बादशाहों ने तो धूमधाम से होली मनाने में अग्रणी भूमिका निभाई है. अकबर, हुमायूं, जहांगीर, शाहजहां और बहादुरशाह जफर होली के आगमन से बहुत पहले ही रंगोत्सव की तैयारियां शुरु करवाया करते थे. अकबर के महल में सोने चांदी के बड़े-बड़े बर्तनों में केवड़े और केसर से युक्त टेसू का रंग घोला जाता था. उसके बाद राजा अपनी बेगम और हरम की सुंदरियों के साथ होली खेलते थे. शाम को महल में उम्दा ठंडाई, मिठाई और पान इलायची से मेहमानों का स्वागत किया जाता था और मुशायरे, कव्वालियों और नृत्य-गानों की महफि़लें सजती थीं.

इसके अलावा जहांगीर के समय में महफि़ल-ए-होली का भव्य कार्यक्रम आयोजित किया जाता था. इस अवसर पर राज्य के साधारण नागरिक भी बादशाह पर रंग डाल सकते थे. शाहजहां होली को ईद गुलाबी के रूप में धूमधाम से मनाते थे. वहीं बहादुरशाह जफर होली खेलने के बहुत शौकीन थे और होली को लेकर उनकी सरस काव्य रचनाएं आज तक सराही जाती हैं. मुगल काल में होली के अवसर पर लाल किले के पिछवाड़े यमुना नदी के किनारे आम के बाग में होली के मेले लगते थे.

बता दें कि फाल्गुन माह में मनाए जाने के कारण इसे फाल्गुनी भी कहते हैं. होली का त्योहार वसंत पंचमी से ही आरंभ हो जाता है. उसी दिन पहली बार गुलाल उड़ाया जाता है. चारों तरफ रंगों की फुहार फूट पड़ती है. होली के दिन आम्र मंजरी तथा चंदन को मिलाकर खाने का बड़ा महत्व माना जाता है. वैसे तो होली की तमाम कहानियां माना जाती हैं, लेकिन जो सबसे प्रसिद्ध कहानी प्रह्ललाद की है. माना जाता है कि प्राचीन काल में हिरण्यकशिपु नाम का एक अत्यंत बलशाली असुर था.

अपने बल के दर्प में वह स्वयं को ही ईश्वर मानने लगा था. उसने अपने राच्य में ईश्वर का नाम लेने पर ही पाबंदी लगा दी थी. हिरण्यकशिपु का पुत्र प्रह्ललाद ईश्वर भक्त था. प्रह्ललाद की ईश्वर भक्ति से क्रुद्व होकर हिरण्यकशिपु ने उसे अनेक कठोर दंड दिए, परंतु उसने ईश्वर की भक्ति का मार्ग न छोड़ा. हिरण्यकशिपु की बहन होलिका को वरदान प्राप्त था कि वह आग में भस्म नहीं हो सकती. हिरण्यकशिपु ने आदेश दिया कि होलिका प्रह्ललाद को गोद में लेकर आग में बैठे. आग में बैठने पर होलिका तो जल गई, पर प्रह्ललाद बच गया.

ईश्वर भक्त प्रह्ललाद की याद में इस दिन होली जलाई जाती है. प्रतीक रूप से यह भी माना जता है कि प्रह्ललाद का अर्थ आनन्द होता है. वैर और उत्पीड़न की प्रतीक होलिका जलती है और प्रेम तथा उल्लास का प्रतीक प्रह्ललाद अक्षुण्ण रहता है. प्रह्ललाद की कथा के अतिरिक्त यह पर्व राक्षसी ढुंढी, राधा कृष्ण के रास और कामदेव के पुनर्जन्म से भी जुड़ा हुआ है. कुछ लोगों का मानना है कि होली में रंग लगाकर, नाच-गाकर लोग शिव के गणों का वेश धारण करते हैं तथा शिव की बारात का दृश्य बनाते हैं. कुछ लोगों का यह भी मानना है कि भगवान श्रीकृष्ण ने इस दिन पूतना नामक राक्षसी का वध किया था. इसी खु़शी में गोपियों और ग्वालों ने रासलीला की और रंग खेला था.

भारत के अलावा इन देशों में भी मनाई जाती है होली

भारत ही नहीं बल्कि विदेशो में भी होली मनाने का चलन है. नेपाल में होली के अवसर पर काठमांडू में एक सप्ताह के लिए प्राचीन दरबार और नारायणहिटी दरबार में बांस का स्तम्भ गाड़ कर आधिकारिक रूप से होली के आगमन की सूचना दी जाती है. वहीं पाकिस्तान, बंगलादेश, श्री लंका और मरिशस में भारतीय परंपरा के अनुरूप ही होली मनाई जाती है. प्रवासी भारतीय जहां-जहां जाकर बसे हैं वहां होली मनाने की परंपरा है. कैरिबियाई देशों में बड़े धूमधाम और मौज-मस्ती के साथ होली का त्यौहार मनाया जाता है. यहां होली को फगुआ के नाम से जाना जाता है और लोग परंपरागत तरीके से इसे मनाते हैं. 19वीं सदी के आखिरी और 20वीं सदी के शुरू में भारतीय लोग मजदूरी करने के लिए कैरिबियाई देश गए थे.

इस दौरान गुआना और सुरिनाम तथा ट्रिनीडाड जैसे देशों में बड़ी संख्या में भारतीय जाकर बस गए. भारतीय लोगों के साथ उनके त्यौहार और रस्मों-रिवाज भी इन देशों में पहुंच गए. धीरे-धीरे फगुआ गुआना और सूरीनाम के सबसे महत्वपूर्ण त्यौहारों में एक हो गया. गुआना में होली के दिन राष्ट्रीय अवकाश रहता है. इस देश की कुल आबादी में हिंदुओं का प्रतिशत लगभग 33 है. यहां की लड़कियों और लड़कों को रंगीन पाउडर और पानी के साथ खेलते हुए देखा जा सकता है. गुआना के गांवों में इस अवसर पर विशेष तरह के समारोहों का आयोजन होता है.

Holi 2021: देश के अलग अलग हिस्सों में ऐसे मनाया जाता है रंगो का त्योहार, यहां जाने होली के सब रंग

कैरिबियाई देशों में कई सारे हिंदू संगठन और सांस्कृतिक संगठन सक्रिय हैं. ये संगठन नृत्य, संगीत और सांस्कृतिक उत्सवों के ज़रिए फगुआ मनाते हैं. वहीं ट्रिनीडाड एंड टोबैगो में होली को काफ़ी कुछ उसी तरह से मनाया जाता है, जैसे भारत में मनाया जाता है. हाल के वर्षों में इसकी रौनक में बढ़ोतरी हुई है. इसके अलावा विदेशी विश्वविद्यालयों में भी होली का आयोजन होता रहा है. विलबर फ़ोर्ड के स्टैनफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी कैंपस पर होली के कुछ सुंदर दृश्य देखे जा सकते हैं. इसी तरह रिचमंड हिल्स में होली का उत्साह लोगों में देखा जा सकता है.

Holi 2021: कहीं खेली जाती है जूतामार होली तो कहीं मनाया जाता है मातम, तो कहीं भागकर करते हैं शादी, जानें होली की इन अजब-गजब परंपराओं को

First published: 29 March 2021, 10:28 IST
 
पिछली कहानी
अगली कहानी