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Holi 2020: इस विधि से होलिका पूजन करने से मिलेगा शुभ फल, ये है होलिका दहन का शुभ मुहूर्त

कैच ब्यूरो | Updated on: 5 March 2020, 13:10 IST

Holika Dahan Shubh Muhurt and Timing: हमारे देश में तमाम तीज-त्योहार (Festivals) मनाए जाते हैं. हर त्योहार का समय भी निश्चित है. हिन्दू कैलेंडर (Hindu Calendar) के मुताबिक, हर साल फाल्गुन माह (Falgun Month) की पूर्णिमा (Purnima) को होली का त्योहार (Holi Festival) मनाया जाता है. वहीं श्रावण मास में रक्षा बंधन (Raksha Bandhan) और कार्तिक माह में दिवाली (Diwali) का त्योहार मनाया जाता है.

इस साल होली का त्योहार 09-10 मार्च को मनाया जाएगा. इससे पहले होलिका पूजन (Holika Pujan) और फिर होलिका दहन (Holika Dahan) किया जाएगा. बता दें कि होलिका दहन के लिए प्रदोष काल का समय सबसे उत्तम माना गया है. लेकिन कई बार भद्रा होने की वजह से होलिका दहन का समय बदल जाता है. लेकिन इस बार भद्रा काल दोपहर में ही खत्म हो रहा है जिस कारण शाम को सूर्यास्त के बाद होलिका दहन किया जाएगा.

ये है होलिका दहन का शुभ मुहूर्त और पूजन विधि-

इस साल होलिका दहन का शुभ मुहूर्त 09 मार्च को शाम 06:26 से 08:52 बजे तक का है. वहीं भद्रा पुंछा का शुभारंभ सुबह 09:50 बजे से 10:51 बजे तक रहेगा. वहीं भद्रा मुखा का समय सुबह 10:51 से 12:32 बजे तक का है. बता दें कि होलिका दहन का पूजन प्रदोषकाल में शास्त्रसम्मत माना जाता है. इस समय होलिका पूजन का शुभ मुहूर्त है. महिलाओं को होलिका पूजन के बाद भोजन करना शुभ माना जाता है.

पूजा के लिए पूजा की थाली में रोली, कच्चा सूत, पुष्प, हल्दी की गांठें, खड़ी मूंग, बताशे, मिष्ठान्न, नारियल, बड़बुले आदि को मुख्य रूप से शामिल करना चाहिए. होलिका पूूजन के दौरान सबसे पहले यथाशक्ति संकल्प लेकर गोत्र-नामादि का उच्चारण कर पूजा करना शुभ माना जाता है. सबसे पहले भगवान गणेश व गौरी का पूजन करनी चाहिए. वहीं ‘ॐ होलिकायै नम:’ मंत्र से होली का पूजन शुरु करना भी शुभ माना जाता है.

उसके बाद ‘ॐ प्रहलादाय नम:’ से प्रहलाद का पूजन करना चाहिए. इसके पश्चात ‘ॐ नृसिंहाय नम:’ से भगवान नृसिंह (भगवान विष्णु के अवतार) का पूजन करना चाहिए. उसके बाद अपनी समस्त मनोकामनाएं करनी चाहिए. इसके बाद एक कच्चा सूत लेकर होलिका पर चारों तरफ लपेटकर 3 परिक्रमा करनी चाहिए. साथ ही अगर आप चाहते हैं तो 7 बार भी परिक्रमा कर सकते हैं.

परिक्रमा पूरी होने के बाद लोटे का जल चढ़ाकर ‘ॐ ब्रह्मार्पणमस्तु’ का जाप करें. बता दें कि होली का त्योहार भी बुराई पर अच्छाई की जीत के रूप में मनाया जाता है. होलिका दहन के दिन एक पवित्र अग्नि जलाई जाती है जिसमें सभी तरह की बुराई, अहंकार और नकारात्मकता को जलाया जाता है. उसके अगले दिन अपने मित्र-परिजनों को रंग-गुलाल लगाकर शुभकामनाएं दी जाती है. होली का त्योहार मनाने के पीछे एक कहानी है.

पुराणों के मुताबिक, दानवराज हिरण्यकश्यप ने जब देखा कि उसका पुत्र प्रह्लाद सिवाय विष्णु भगवान के किसी अन्य की पूजा अर्चना नहीं करता है तो वह क्रोधित हो उठा और अंततः उसने अपनी बहन होलिका को आदेश दिया की वह प्रह्लाद को गोद में लेकर अग्नि में बैठ जाए, क्योंकि होलिका को वरदान प्राप्त था कि उसे अग्नि नुकसान नहीं पहुंचा सकती. किन्तु प्रह्लाद की भक्ति के कारण, होलिका जलकर भस्म हो गई और भक्त प्रह्लाद को कुछ भी नहीं हुआ था. इसी के बाद हर साल फाल्गुन मास में होलिका दहन के बाद होली का त्योहार मनाया जाने लगा.

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First published: 5 March 2020, 13:10 IST
 
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