Home » धर्म » Holi celebrations in entire India know the amazing celebration tips
 

रंग-गुलाल से ही नहीं इन तरीकों से भी मनाया जाता है होली का त्योहार, जानकर रह जाएंगे दंग

कैच ब्यूरो | Updated on: 17 March 2019, 14:10 IST

हमारा देश त्योहारों का देश है. जो अनेकता में एकता की खूबी रखता है. यहां हर दिन कोई ना कोई त्योहार या पारंपरिक आयोजन जरूर होता है. होली भी एक ऐसा ही त्योहार है जो हमारे देश की परंपरा और विविधता को दर्शाता है. पूरे देश में होली का त्योहार मनाया जाता है लेकिन इसे मनाने के हर जगह अलग-अलग नियम और कानून है. गुरुवार यानि 21 मार्च को पूरे देश में होली का त्योहार धूमधाम से मनाया जाएगा. जिसका लिए लोगों पर अब खुमार चढ़ने लगा है.

लट्ठमार होली- होली सिर्फ रंग और गुलाल का ही त्योहार नहीं है बल्कि बरसाना में तो होली के दौरान लाठी डंडे चलते हैं. जिसे लट्ठमार होली कहा जाता है. बता दें कि बरसाना राधा का जन्मस्थान है. मथुरा के पास बरसाना में होली कुछ दिनों पहले ही शुरू हो जाती है. इस दिन लट्ठ महिलाओं के हाथ में रहता है और नन्दगांव के पुरुषों जो राधा के मन्दिर 'लाडलीजी' पर झंडा फहराने की कोशिश करते हैं, उन्हें महिलाओं के लट्ठ से बचना होता है. इस दौरान होरी भी मनाई जाती है. जो श्रीकृष्ण और राधा के बीच वार्तालाप पर आधारित होती है.

बिहार में फागुवा होली- वहीं बिहार में होली का त्योहार तीन दिनों तक मनाया जाता है. पहले दिन रात में होलिका दहन होता है, जिसे यहां संवत्‍सर दहन के नाम से भी जाना जाता है और लोग इस आग के चारों ओर घूमकर नृत्‍य करते हैं. अगले दिन इससे निकली राख से होली खेली जाती है, जो धुलेठी कहलाती है और तीसरा दिन रंगों का होता है. स्‍त्री और पुरुषों की टोलियां घर-घर जाकर डोल की थाप पर नृत्‍य करते हैं. फाल्गुन मतलब लाल रंग होता है इसलिए इसे फगुवा होली भी कहते है.

हरियाणा की धूलेंडी होली- हरियाणा में भी होली का त्योहार अनोखे ढंग से मनाया जाता है. यहां होली धुलेंडी के रूप में मनाई जाती है और सूखी होली-गुलाल और अबीर से खेलते हैं. भाभियों को इस दिन पूरी छूट रहती है कि वे अपने देवरों को साल भर सताने का दण्ड दें. भाभियां देवरों को तरह-तरह से सताती हैं और देवर बेचारे चुपचाप झेलते हैं, क्योंकि इस दिन तो भाभियों का दिन होता है. शाम को देवर अपनी प्यारी भाभी के लिए उपहार लाता है और भाभी उसे आशीर्वाद देती है.

महाराष्ट्र में रंगपंचमी- महाराष्ट्र में मछुआरों की बस्ती के लिए इस त्योहार का मतलब नाच-गाना और मस्ती होता है. क्योंकि सारे मछुआरे इस त्योहार पर एक-दूसरे के घरों को मिलने जाते हैं और काफी समय मस्ती में बीतता है. महाराष्‍ट्र में पूरनपोली नाम का मीठा स्‍वादिष्‍ट पकवान बनाया जाता है.

बंगाल में डोल पूर्णिमा- वहीं पश्चिम बंगाल में होली बहुत खूबसूरत रूप से मनाई जाती है. इस दिन लोग बसंती रंग के कपड़े पहनते हैं और फूलों से श्रंगार करते हैं. सुबह से ही नृत्‍य और संगीत का कार्यक्रम चलता है. घरों में मीठे पकवान और बनते हैं. इस पर्व को डोल जात्रा के नाम से भी जाना जाता है. इस मौके पर राधा-कृष्‍ण की प्रतिमा झूले में स्‍थापित की जाती है और महिलाएं बारी-बारी से इसे झुलाती हैं.

भूलकर भी ना करें इस तरह दिन की शुरुआत, वरना पूरा समय हो जाएगा खराब

First published: 17 March 2019, 14:10 IST
 
पिछली कहानी
अगली कहानी