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Janmashtami 2018 : ये है श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की सही तिथि और समय, जानें कैसे करें इस दिन व्रत

कैच ब्यूरो | Updated on: 30 August 2018, 10:49 IST

कन्हैया, गोपाल, कान्हा और ना जाने कितने नामों ने भक्त भगवान श्रीकृष्ण को पुकारते हैं. भगवान विष्णु के अवतार श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद की अष्टमी तिथि को हुआ था. इसीलिए इस दिन को श्रीकृष्णजन्माष्टमी के रूप में मनाया जाता है. पूरे देश में इस दिन भगवान कृष्ण का जन्मदिन मनाया जाता है. श्रीकृष्ण का जन्म रोहिणी नक्षत्र में मध्य रात्रि वृष लग्न में हुआ था.

इस बार यह संयोग 2 सितंबर को बन रहा है. इस दिन कृष्ण के भक्त दिनभर व्रत रखेंगे और रात्रि में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव मनाएंगे. इस दिन अष्टमी तिथि रात्रि 8.46 मिनट से अगले दिन यानी सोमवार को शाम 7.19 मिनट तक रहेगी. रोहिणी नक्षत्र रविवार को रात्रि 8.48 बजे से सोमवार 8.40 बजे तक रहेगा. इस बीच रविवार को वृष लग्न रात्रि 10 बजे से 11.57 बजे तक रहेगी. इन तीनों के संयोग में ही कृष्ण जन्माष्टमी मनाई जाएगी.

ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक उदयातिथि का सिद्धांत तिथिविचार में अत्यंत महत्व रखता है, लेकिन इनके साथ पंचांग के समस्त सिद्धांतों का विचार भी आवश्यक है. भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद माह की मध्य रात्रि में अष्टमी तिथि, रोहिणी नक्षत्र और वृष लग्न में हुआ. ऐसे में यहां उदयातिथि के विचार के तुलना में तिथि नक्षत्र और लग्न का संयोग अधिक महत्वपूर्ण है.

भगवान श्रीकृष्ण को लगाएं धनिए की पंजीरी का भोग

जन्माष्टमी के दिन भगवान कृष्ण को भोग लगाना अतिआवश्यक है, इस दिन कृष्ण को धनिए की पंजीरी का भोग लगाएं. कारण, रात्रि में त्रितत्व वात पित्त और कफ में वात और कफ के दोषों से बचने के लिए धनिए की पंजीरी का प्रसाद बनाकर ही भगवान श्रीकृष्ण को चढ़ाना चाहिए. बता दें कि धनिए के सेवन से वृत संकल्प भी सुरक्षित रहता है.

जन्माष्टमी पर करें कृष्ण लीलाओं का श्रवण और गीतापाठ

भगवान श्रीकृष्ण का जन्म अत्यंत कठिनाई में मातुल कंस की जेल में हुआ. कृष्ण को जेल से बाहर ले जाने के लिए पिता वासुदेव ने उफनती यमुना को पार कर रात्रि में ही उन्हें वृंदावन में यशोदा-नन्द के घर पहुंचा दिया था. यशोदानंदन को खोजने और मारने कंस ने कई राक्षस-राक्षसनियों को वृंदावन भेजा.

नन्हे बालगोपाल ने स्वयं को इनसे बचाया. इंद्र के प्रकोप और घनघोर बारिश से वृंदावनवासियों को बचाने गोवर्धन पर्वत उठाया. कृष्ण ने गोपिकाओं से माखन लूटा. गाएं चराईं. मित्र मंडली के साथ खेल खेल में कालियादह का मानमर्दन किया. वहीं राधा और अन्य गोपियों के साथ रास किया और दुष्ट कंस का वध किया.

भगवान कृष्ण ने अपने बालमित्र सुदामा की दोस्ती को द्वारकाधीश होकर की बनाए रखा. वहीं द्रोपदी का चीरहरण निष्प्रभावी किया और पांडवों की हर हालत में रक्षा की. उसके बाद अर्जुन को कुरुक्षेत्र में गीता का उपदेश दिया. गीता के ऐसे कई श्लोक हैं जिन्हें आज भी जिंदगी में उतार लिया जाए तो जिंदगी सफल हो जाएगी. देश में हर साल कृष्णजन्माष्टमी के दिन मटकी फोड़ प्रतियोगिताओं का भी आयोजन किया जाता है.

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First published: 30 August 2018, 10:49 IST
 
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