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Janmashtami 2018: इस विधि से करें जन्माष्टमी में पूजा, हर कामना पूरी करेंगे कान्हा

सुहेल खान | Updated on: 2 September 2018, 11:07 IST

पूरे देश में आज श्री कृष्ण जन्माष्टमी मनाई जा रही है. वहीं उदया तिथि अष्टमी एवं उदय कालिक रोहिणी नक्षत्र को मानने वाले वैष्णव जन सोमवार यानी 3 सितम्बर को श्री कृष्ण जन्माष्टमी का व्रत पर्व मनाएंगे. बता दें कि अष्टमी तिथि रविवार की शाम 5:09 बजे से शुरु होकर अगले दिन यानी सोमवार को दोपहर दिन में 3:29 मिनट तक रहेगी.

इसी के साथ रोहिणी नक्षत्र भी 2 सितंबर यानी रविवार की सायं 6:29 बजे से प्रारम्भ होकर अगले दिन सोमवार को दिन में 5:35 बज तक व्याप्त रहेगी. वहीं 2 सितम्बर यानी रविवार को ही अष्टमी एवं रोहिणी नक्षत्र दोनों का योग अर्धरात्रि के समय मिल रहा है. इसलिए 2 सितम्बर यानी रविवार को ही जयन्ती योग में श्रीकृष्णावतार एवं जन्माष्टमी का व्रत सबके लिए होगा.

कब करें बालकृष्ण का जन्म

बालकृष्ण का जन्म रात 12 बजे के बाद करें. उसके बाद बालकृष्ण को स्नान कराएं. कान्हा को स्नान कराने के लिए कुछ जरूरी सामना पहले से ही खरीद लें.

बालकृष्ण के स्नान का सामान

दूध, दही, घी, शहद- बालकृष्ण को पहले दूध से फिर दही, घी से उसके बाद शहद से स्नान कराएं.

जन्माष्टमी की पूजा सामग्री

भगवान कृष्ण के जन्मदिन पर विशेष पूजा सामग्री की जरूर होगी. इसके लिए एक खीरा, एक चौकी, पीला साफ कपड़ा, बाल कृष्ण की मूर्ति, और एक सिंहासन, पंचामृत, गंगाजल, दीपक, दही, शहद, दूध, घी, बाती, धूप बत्ती, गोकुलाष्ट चंदन और अक्षत का पहले से ही इंतजाम कर लें.

किस चीज का लगाएं भोग

बालगोपाल को तुलसी के पत्ता, माखन, मिसरी का भोग लगाएं.

कैसे करें बाल गोपाल का श्रृंगार

बाल गोपाल का श्रृंगार करने के लिए इत्र, कान्हा के नए पीले वस्त्र, बांसुरी मोर पंख, गले के लिए वैजयंती माला लेनी चाहिए. वहीं माथे के लिए मोर मुकुट और हाथों के लिए चूड़ियां लेना आवश्यक है.

कैसे करें जन्मोत्सव

रात 12 बजे के बाद बालकृष्ण का जन्म करें. जन्म के बाद उन्हें स्नान कराएं. पहले दूध से फिर दही, घी से और उसके बाद शहद से स्नान कराना चाहिए. अंत में गंगाजल से बालगोपाल को स्नान कराएं. वहीं बालकृष्ण को छोटे बच्चे की तरह लंगोट जरूर पहनाएं. ध्यान रहे नंदलाल को नए वस्त्र ही पहनाएं.

मंगल गीत गाकर मनाएं खुशियां

नंदलाल के जन्म के बाद मंगल गीत गाकर खुशियां मनाएं.. नंद गोपाल का श्रृंगार करें. मोर पंख का मुकुट पहनाएं. साथ ही कन्हैया की बांसुरी उनके पास रख दें और चंदन, अक्षत लगाएं. धूप-दीप से पूजा करें. माखन, मिसरी और तुलसी का भोग लगाना चाहिए.

कान्हा के जन्म पर लगाएं ये जयकारे

नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल कीकान्हा का जन्म कराने के बात पूरी रात बालकृष्ण की पूजा अर्चना करें.

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First published: 2 September 2018, 10:07 IST
 
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