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Janmashtami 2018: इस नक्षत्र में हुआ था कन्हैया का जन्म, जानिये कैसे होते है इसमें पैदा हुए बच्चे

कैच ब्यूरो | Updated on: 30 August 2018, 10:07 IST

Janmashtami 2018: भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाएं सब जानते है. उनकी रास लीला की गाथा भक्‍त‍ि की पराकाष्‍ठा है. पूरी दुनिया उनकी सम्मोहक शख्सियत पर मोहित है. लोग आज भी इस बात को जाने के लिए उत्सुक रहते है कि कैसे उन्हें ये शख्‍स‍ियत मिली। ज्योतिषाचार्यों का मानना है कि उनकी इस शख्‍स‍ियत के पीछे नक्षत्र की भूमिका की थी. तो आइये जानते है.

इस नक्षत्र में हुआ था जन्म:

भगवान् श्रीकृष्ण का जन्म में भाद्र मास कृष्ण पक्ष में अष्टमी को रोहिणी नक्षत्र में रात्रि को बारह बजे हुआ था. रोहिणी का स्वामी शुक्र है. इस नक्षत्र को वृष राशि का मस्तक कहा जाता है. इस नक्षत्र का शुक्र स्वामी होता है. इस नक्षत्र में पैदा होने वाले लोग संगीत, काव्य और लेखन विधा में अत्यंत कुशल होते हैं.  

इस नक्षत्र की जानकारी देते हुए सुजीत जी महाराज इस नक्षत्र का स्वामी शुक्र है. मान्यताओं के अनुसार चंद्रमा की 27 पत्नियों में सबसे सुंदर और आकर्षक रोहिणी है. जैसे-जैसे चंद्रमा रोहिणी के पास जाता है, उसका प्रेम और निखर जाता है और वह उसके प्रेम पाश में एकाकार होकर छुप भी जाती है. 

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ऐसे में इस नक्षत्र में पैदा होने वाले लोग बहुत ही सुंदर और आकर्षक होता है. वह प्रेम और सौंदर्य का पुजारी होता है. उसके व्यक्तित्व में एक अलग प्रकार का आकर्षण होता है.

इस नक्षत्र में पैदा होने वाले लोग सफल होते है:

इस नक्षत्र में पैदा होने वाले लोग विपरीत लिंग के प्रति आकर्षण और कई प्रेम संबंध बनाता है. इस नक्षत्र में पैदा होने वाले प्रया प्रेम विवाह करते है. इसके अलावा ये लोग अभिनय की दुनिया में अच्छा नाम कमाते है.

इसके अलावा जातक अपने जीवनकाल में बहुत यात्रा करता हूँ. जातक को घूमने का शौक होता है. ये लोग प्रशासन तथा राजनीति में किसी बड़े पद पर पहुंचते हैं.

First published: 30 August 2018, 10:07 IST
 
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