Home » धर्म » Kailash Mansarovar Yatra 2020: Now you will complete your journey in just one week
 

कैलाश मानसरोवर यात्रा पर जाने वालों के लिए खुशखबरी, एक हफ्ते में कर सकें भोलेनाथ के दर्शन

कैच ब्यूरो | Updated on: 9 May 2020, 13:10 IST

Kailash Mansarovar Yatra 2020: अगर आप कैलाश मानसरोवर (Kailash Mansarovar) की यात्रा पर जाना चाहते हैं तो आपके लिए खुशखबरी है. क्योंकि अब आपको कैलाश मानसरोवर यात्रा पर जाने के लिए आपको ज्यादा समय नहीं लगाना पड़ेगा और अब आप सिर्फ एक हफ्ते में बाबा भोलेनाथ (Baba Bholenath) के दर्शन कर पाएंगे. दरअसल, कैलाश मानसरोवर यात्रा मार्ग में प्रसिद्ध धारचूला (Dharchula) से लिपुलेख (चीन सीमा) (China Border) तक 80 किलोमीटर लंबा सड़क मार्ग चालू कर दिया गया है.

जिससे अब कैलाश मानसरोवर यात्रा में दो से तीन हफ्ते का समय कम लगेगा. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह (Rajnath Singh) ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये इस सड़क मार्ग का उद्घाटन किया. बता दें कि इस सड़क के चालू होने से भारत-चीन सीमावर्ती क्षेत्र में कनेक्टिविटी को बढ़ाने में भारी मदद मिलेगी. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस मौके पर पिथौरागढ़ से गुंजी तक वाहनों के एक काफिले को भी रवाना किया. इस दौरान रक्षा मंत्री ने कहा कि इस सड़क मार्ग के बनने से लोगों के दशकों पुराना स्थानीय लोगों और तीर्थयात्रियों का सपना पुरा हुआ है.


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उन्होंने उम्मीद जताई कि इससे क्षेत्र आर्थिक विकास और व्यापार को बढ़ाने में मदद मिलेगी. बता दें कि धार्चूला-लिपुलेख सड़क पिथौरागढ़-तवाघाट-घाटीबगढ़ सड़क का विस्तार है. यह घाटीबगढ़ से निकलती है और कैलाश मानसरोवर के प्रवेश द्वार लिपुलेख दर्रे पर समाप्त होती है. इसी के साथ 80 किलोमीटर की इस सड़क की ऊंचाई 6000 फीट से बढ़कर 17,000 फीट हो जाती है. इस परियोजना के पूरा होने के साथ, बेहद ऊंचाई वाले इस इलाके के माध्यम से कैलाश मानसरोवर यात्रा के तीर्थयात्रियों को कठिन ट्रैकिंग से बचाया जा सकेगा इसके साथ ही यात्रा की अवधि यानी यात्रा में लगने वाले समय को कम किया जा सकेगा.

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बता दें कि वर्तमान में, कैलाश मानसरोवर की यात्रा के लिए सिक्किम या नेपाल के रास्तों से जाना पड़ता है जिसमें दो से तीन सप्ताह का समय लगया है. वहीं लिपुलेख मार्ग में ऊंचाई वाले इलाकों के माध्यम से 90 किलोमीटर के ट्रैक को पार करने में बुजुुर्गों को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है. लेकिन अब इस यात्रा को वाहनों द्वारा पूरा किया जा सकता है डीजी बॉर्डर रोड्स लेफ्टिनेंट जनरल हरपाल सिंह का कहना है कि इस सड़क का निर्माण कई समस्याओं के कारण बाधित हुआ था. लगातार बर्फ गिरने, ऊंचाई में अत्यधिक वृद्धि और बेहद कम तापमान के चलते साल में केवल पांच महीने की काम हो पाता था.

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First published: 9 May 2020, 13:10 IST
 
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