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सावन में क्यों है कांवड़ यात्रा का महत्व, जानें कब से हुई इसकी शुरुआत

कैच ब्यूरो | Updated on: 27 July 2019, 12:10 IST

हिंदू धर्म में सावन का विशेष महत्व होता है. सावन पूरे देश मे हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है. शिव की भक्ति में लीन लोग सावन में कांवड़ यात्रा को विशेष महत्व देते हैं. हर साल लाखों की संख्या में लोग पूरे जोश के साथ पैदल चलकर इस पावन यात्रा को पूरा करते हैं. इस यात्रा में श्रद्धा रखने वाले लोगों का मानना है कि इस महीने में शिव के भक्तों के अंदर एक अलग ही तरह का जोश होता है, जो इस यात्रा को पूरा करने में सहायक होता है.

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान शिव सावन के महीने में अपने ससुराल यानी राजा दक्ष के यहां रहते हैं. यहां रहकर वह तीनों लोक का ध्यान रखते हैं. इसी वजह से शिव भक्त हरिद्वार में जाकर भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं. इस यात्रा की शुरुआत 17 जुलाई को हो चुकी है. लाखों की स्ंख्या में अलग-अलग जगहों से लोग इस यात्रा में शामिल हो रहे हैं.

मान्यताओं के अनुसार, जब समुद्र मंथन हुआ था, तो भगवान शिव ने पूरे संसार को नाश होने से बचाने के लिए समुद्र मंथन से निकले विष को पी लिया. विष पीने के बाद भले ही भगवान शिव ने पूरे संसार को बता लिया, लेकिन विष की वजह से उनका शरीर जलने लगा. इसलिए भगवान शिव पर पूरे देवताओं ने जल डालना शुरू किया. तब से कांवड़ यात्रा की शुरुआत हुई और तभी से भगवान शिव का नाम नीलकंठ पड़ा था.

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First published: 27 July 2019, 12:10 IST
 
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