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इस गुफा में छिपा है कलयुग के अंत का रहस्य, भगवान गणेश के कटे हुए सिर को भी रखा गया यहां

कैच ब्यूरो | Updated on: 7 March 2019, 11:11 IST

हमारे देश में ऐसे तमाम स्थान हैं जिनमें प्राचीन काल के रहस्य आज भी दबे हुए हैं. इनकी कहानियां आज भी लोगों की जुबान पर हैं.  ऐसी ही एक कहानी ओड़िशा में प्रचलित है. ये कहानी है भगवान गणेश के बारे में. बता दें कि भगवान गणेश को हिंदू धर्म में सर्व प्रथम पूज्य देवता माना जाता है. इसीलिए किसी शुभ काम को करने से पहले भगवान गणेश की ही पूजा की जाता है.

भगवान गणेश को कई नामों से जाना जाता है. जिनमें से उनका एक नाम है गजानन. भगनान गणेश का नाम गजानन इसलिए पड़ा क्योंकि उनका सिर हाथी का है जबकि शरीर एक इंसान की तरह है. ज्यादातर लोग भगवान गणेश के हाथी का सिर लगाए जाने वाली कहानी तो जानते होंगे, लेकिन शायद ही कोई होगा जो इस बात को जानता हो कि भगवान गणेश का कटा हुआ सिर आखिर है कहां.

बता दें कि ये बात यकीनन हैरान करने वाली है कि भगवान गणेश का कटा हुआ सिर आज भी एक गुफा में मौजूद है. ऐसी मान्यता है कि भगवान शिव ने गुस्से में आकर गणेश जी का जो सिर काट दिया था. उसे उन्होंने एक गुफा में रख दिया था. इस गुफा को पाताल भुवनेश्वर के नाम से जाना जाता है.

बता दें कि पाताल भुवनेश्वर में मौजूद भगवान गणेश की मूर्ति को आदि गणेश के नाम से भी जाना जाता है. ऐसी मान्यता है कि कलयुग में इस गुफा की खोज आदिशंकराचार्य ने की थी. यह गुफा उत्तराखंड के पिथौड़ागढ़ के गंगोलीहाट से 14 किलोमीटर दूरी स्थित है.

कहा जाता है कि भगवान गणेश के इस कटे हुए सिर की रक्षा खुद भगवान शिव करते हैं. इस गुफा में भगवान गणेश के कटे शिलारूपी मूर्ति के ठीक ऊपर 108 पंखुड़ियों वाला शवाष्टक दल ब्रह्मकमल के रूप की एक चट्टान है. इस ब्रह्मकमल से भगवान गणेश के शिलारूपी मस्तक पर दिव्य बूंद टपकती है. मुख्य बूंद आदि गणेश के मुख में गिरती हुई दिखाई देती है. ऐसी मान्यता है कि यह ब्रह्मकमल भगवान शिव ने ही यहां स्थापित किया था.

बता दें कि इस गुफा में चारों युगों के प्रतीक रूप में चार पत्थर स्थापित हैं. कहा जाता है कि इनमें से एक पत्थर जिसे कलयुग का प्रतीक माना जाता है, वह धीरे-धीरे ऊपर उठ रहा है. यह माना जाता है कि जिस दिन यह कलयुग का प्रतीक पत्थर दीवार से टकरा जायेगा, उस दिन कलयुग का अंत हो जाएगा.

इस गुफा में भक्तों को केदारनाथ, बद्रीनाथ और बाबा अमरनाथ के भी दर्शन होते हैं. बाबा अमरनाथ की गुफा के पास पत्थर की बड़ी-बड़ी जटाएं फैली हुई हैं. यही नहीं इसी गुफा में कालभैरव की जीभ के भी दर्शन होते हैं. इस जीभ के बारे में कहा जाता है कि अगर इंसान कालभैरव के मुंह से गर्भ में प्रवेश कर पूंछ तक पहुंच जाए तो उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है.

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First published: 7 March 2019, 11:11 IST
 
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