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ये हैं भगवान शिव के अद्भुत मंदिर, दर्शन मात्र से हर परेशानी हो जाती है दूर

कैच ब्यूरो | Updated on: 1 March 2019, 16:11 IST

सोमवार चार मार्च को पूरे देश में महाशिवरात्रि का त्योहार मनाया जाएगा. भगवान शिव को समर्पित इस पर्व पर भोलेनाथ के भक्त कांवड़ लाते हैं और शिवलिंग का अभिषेक करते हैं. महाशिवरात्रि के इस पावन पर्व के अवसर पर हम आपको देश के कुछ ऐसे मंदिरों से रूबरू कराने जा रहे हैं जो भगवान शिव को समर्पित हैं. ऐसा माना जाता है कि इन मंदिरों के दर्शन मात्र से भोले अपने भक्तों के हर दुख-दर्द और पापों को हर लेते हैं.

भगवान शिव को समर्पित टूटी झरना मंदिर

टूटी झरना मंदिर भगवान शिव को समर्पित है. ये मंदिर बेहद अद्भुत है क्योंकि यहां शिवलिंग का जलाभिषेक कोई और नहीं बल्कि स्वयं मां गंगा करती हैं. ये मंदिर झारखंड के रामगढ़ जिले में स्थित है. टूटी झरना मंदिर में स्थापित शिवलिंग का जलाभिषेक साल के बारह महीने और चौबीसों घंटे स्वयं मां गंगा करती हैं. ऐसा माना जाता है कि सदियों से मां गंगा शिवलिंग की पूजा करती चली आ रही हैं.

ऐसा माना जाता है कि जो भक्त इस मंदिर में आकर सच्चे दिल से प्रार्थन करता है उसकी इच्छा जरूरी पूरी होती है. स्थानीय लोगों के मुताबिक साल 1925 में अंग्रेजी सरकार ने इस स्थान पर रेलवे लाइन बिछाने के लिए खुदाई का कार्य शुरु किया था, तब उन्हें जमीन के अंदर कोई गुंबद के आकार की चीज नजर आई. गहराई पर पहुंचने के बाद उन्हें पूरा शिवलिंग मिला और शिवलिंग के ठीक ऊपर गंगा की प्रतिमा मिली जिसकी हथेली पर से गुजरते हुए आज भी जल शिवलिंग पर गिरता है. यही वजह है कि यह रहस्यमय मंदिर आज भी आस्था का केन्द्र बना हुआ है.

उत्तर भारत का ‘सोमनाथ’ यानि भोजेश्वर मंदिर

भोजेश्वर मंदिर मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल से करीब 32 किलोमीटर दूरी है. भगवान शिव को समर्पित ये मंदिर में आज भी अधूरा शिवलिंग स्थापित है. भोजेश्वर या भोजपुर नाम से विख्यात इस मंदिर की स्थापना परमार वंश के राजा भोज ने करवाई थी. यह मंदिर कला का एक बेहद अद्भुत नमूना है. बेहद विशाल इस मंदिर का चबूतरा 35 मीटर लंबा है.

बताया जाता है कि बहुत समय पहले भोजेश्वर मंदिर के पश्चिम में बहुत बड़ी झील हुआ करती थी, जिसपर एक बांध भी बना हुआ था, लेकिन अब उस बांध के सिर्फ अवशेष ही बाकी रह गए हैं. इस मंदिर को उत्तर भारत का ‘सोमनाथ’ भी कहा जाता है.

भगवान शिव को समर्पित परशुराम मंदिर को विष्णु के अवतार  बनाया था

ऐसा माना जाता है कि शिव को समर्पित, परशुराम महादेव मंदिर का निर्माण स्वयं विष्णु के अवतार परशुराम ने अपनी कुल्हाड़ी से गुफाओं को काटकर किया था. यह मंदिर राजस्थान के पाली जिले में स्थित है. परशुराम ने अपने आराध्य शिव की पूजा के लिए इस मंदिर का निर्माण किया था, जो गुफाओं के बीच मौजूद है.

नौ प्राकृतिक कुंड

यह गुफा सागर से करीब 3,995 फुट ऊपर है, जिसमें गणेश और शिव की मूर्तियां स्थापित हैं. जिनके विषय में माना जाता है कि ये अपने आप अवतरित हुई हैं. इस मंदिर के पास नौ प्राकृतिक कुंड भी हैं, जिनका पानी कभी नहीं सूखता.

लक्ष्मणेश्वर मंदिर

लक्ष्मणेश्वर मंदिर छत्तीसगढ़ का काशी कहा जाता है. यह मंदिर अपने आप में बेहद अद्भुत है. ऐसा माना जाता है कि रावण के संहार के पश्चात लक्ष्मण ने अपने भाई राम से इस मंदिर की स्थापना करवाई थीऐसी मान्यता है कि मंदिर के गर्भगृह में श्रीराम के छोटे भाई लक्ष्मण द्वारा स्थापित लक्ष्यलिंग मौजूद है. इस मंदिर को लखेश्वर महादेव भी कहा जाता है क्योंकि इसमें एक लाख लिंग मौजूद हैं. इस मंदिर में एक पातालगामी लक्ष्य छिद्र है जिसमें जितना भी जल डाला जा वह उसमें समाहित हो जाता है. इन छिद्रों में एक ऐसा छिद्र भी है जिसमें हमेशा जल भरा रहता है, जिसे अक्षय कुंड कहते हैं.

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First published: 1 March 2019, 16:11 IST
 
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