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Mahashivratri 2020: 117 साल बाद बन रहा शुक्र और शनि का दुर्लभ योग, ये काम करने की न करें गलती

कैच ब्यूरो | Updated on: 16 February 2020, 13:11 IST

Mahashivratri 2020: भगवान शिव (Lord Shiva) को समर्पित महाशिवरात्रि (Mahashivratri) का त्योहार इस साल 21 फरवरी (21st February) शुक्रवार (Friday) को मनाया जाएगा. इस दिन भोले के भक्त पूरे दिन व्रत (Fast) करते हैं और शिवालयों (Shivalaya) में शिवलिंग (Shivling) का जलाभिषेक करते हैं. बता दें कि महाशिवरात्रि (Mahashivratri) का त्योहार हर साल फाल्गुन मास (Falgun Month) के कृष्ण पक्ष (Krishna Paksha) की चतुर्दशी को मनाया जाता है.

इस साल की महाशिवरात्रि को बेहद खास माना जाता है. क्योंकि इस बार महाशिवरात्रि के पर्व पर 117 साल बाद शुक्र और शनि का दुर्लभ योग बन रहा है. इसलिए इस महाशिवरात्रि पर ऐसे कुछ काम है जिनके बारे में आपको जान लेना चाहिए. अगर आप ऐसा नहीं करेंगे तो ये आपके लिए परेशानी का सबब बन सकती है.


ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक, शिवरात्रि के पर्व पर भगवान शिव की उपासना करते वक्त शंख का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए. पौराणिक कथाओं के मुताबिक, भगवान शिव ने शंखचूड़ नाम के असुर का वध किया था. शंख को उसी दैत्य का प्रतीक माना जाता है, जो भगवान विष्णु का भक्त था. इसलिए शिवजी की बजाए विष्णु की पूजा में शंख बजाया जाता है.

बता दें कि भगवान शिव की पूजा करते वक्त केसर, दुपहरिका, मालती, चम्पा, चमेली, कुन्द, जूही आदि के फूल नहीं चढ़ाने चाहिए. बल्कि शिवरात्रि के दौरान शिवलिंग पर भांग-धतूरे का इस्तेमाल करना शुभ माना जाता है. बता दें कि कुछ लोग भगवान शिव की आराधना करते हुए करताल बजाते हैं, लेकिन ऐसा करना अशुभ माना जाता है. इसके साथ ही शिव की पूजा में कभी तुलसी के पत्ते का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए. जलंधर नामक असुर की पत्नी वृंदा के अंश से तुलसी का जन्म हुआ था, जिसे भगवान विष्णु ने पत्नी रूप में स्वीकार किया था. भगवान शिव को तिल या तिल से बनी चीजें भी नहीं चढ़ानी चाहिए. ऐसी मान्यता है कि तिल भगवान विष्णु के मैल से उत्पन्न हुआ है, इसलिए इसे भगवान शिव को नहीं अर्पित करना चाहिए.

इसके अलावा भगवान शिव की पूजा करते वक्त इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि भगवान शिव की पूजा में साबुत चालवों का ही इस्तेमाल करना चाहिए. दरअसल, अशुद्ध होने की वजह से टूटे हुए चावल से भगवान शिव प्रसन्न नहीं होते हैं. बता दें कि भगवान शिव को वैरागी कहा जाता है इसलिए उनकी उपासना करते हुए कभी कुमकुम भेंट नहीं करनी चाहिए. लेकिन ये सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है.

यही नहीं महाशिवरात्रि के दिन देर तक सोना भी उचित नहीं माना जाता. इसलिए शिवरात्रि के दिन सुबह जल्दी उठ जाना चाहिए. साथ ही सोकर उठने के बाद स्नान करना चाहिए और फिर पूरे दिन नींद नहीं लेनी चाहिए. शिवरात्रि के शुभ अवसर पर अगर आप भगवान शिव को प्रसन्न करना चाहते हैं तो इस दिन काले कपड़े पहनने से भी परहेज करें. इसके साथ ही शिवरात्रि के दिन मांस और मदिरा का सेवन भी नहीं करना चाहिए.

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First published: 16 February 2020, 13:10 IST
 
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