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Mahavir Jayanti 2018: कल मनाई जाएगी महावीर जयंती, जानें उनके पांच सिद्धांत

कैच ब्यूरो | Updated on: 28 March 2018, 14:48 IST

जैन धर्म के सबसे बड़े तीर्थकर भगवान महावीर की जयंती पूरी दुनिया में हर साल मनाई जाती है. इस साल भगवान महावीर की जयंती 29 मार्च को मनाई जाएगी. भगवान महावीर को वर्धमान महावीर के नाम से भी जाना जाता है. भगवान महावीर जैन धर्म के 24 वें तीर्थकर हैं.

उन्हें अहिंसा, त्याग और तपस्या का संदेश देने वाले के रूप में भी जाना जाता है. इसीलिए जैन धर्म के अनुयाईयों के लिए महावीर जयंती का बहुत महत्व है. महावीर जयंती जैन के प्रमुख त्योहारों में से एक है. भगवान महावीर का जन्म 599 ईसा पूर्व चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की 13वीं तिथि को हुआ था.

भगवान महावीर की मां का नाम त्रिशला और पिता का नाम सिद्धार्थ था. कहा जाता है कि वर्धमान की अद्भुत शक्तियों को देखते हुए ही उन्हें महावीर के नाम से पुकारा जाने लगा. उन्हें जीतेन्द्र भी कहा जाता है. क्योंकि महावीर ने तमाम मानव इन्द्रियों को अपने बस में कर लिया था.

 

महावीर ने 30साल की उम्र में किया था घर त्याग

कहा जाता है महावीर का मन सांसारिक जीवन में नहीं लगता था. इसी लिए उन्होंने 30 साल की उम्र में घर त्याग कर दिया. उनका विवाह कलिंग के राजा की पुत्री यशोदा से हुआ था. लेकिन महावीर तपस्या और मानव कल्याण की ही करना चाहते थे. इसीलिए उन्होंने सांसारिक त्याग कर आध्यात्म का मार्ग अपनाया.

भगवान महावीर के सिद्धांत

12 वर्ष तक कठोर तपस्या करने के बाद महावीर को वैशाख शुक्ल दशमी के दिन ऋजुबालुका नदी के किनारे साल वृक्ष के नीचे कैवल्य ज्ञान की प्राप्ति हुई. महावीर स्वामी ने सबसे बड़ा सिद्धांत अहिंसा का दिया. उन्होंने अपने प्रत्‍येक अनुयायी के लिए अहिंसा, सत्य, अचौर्य, ब्रह्मचर्य और अपरिग्रह के पांच व्रतों का पालन करना आवश्यक बताया है. इन सबमें अहिंसा की भावना शामिल है.

यही वजह है कि जैन विद्वानों का प्रमुख उपदेश यही होता है- 'अहिंसा ही परम धर्म है. अहिंसा ही परम ब्रह्म है. अहिंसा ही सुख शांति देने वाली है. अहिंसा ही संसार का उद्धार करने वाली है. यही मानव का सच्चा धर्म है. यही मानव का सच्चा कर्म है.'

कैसे मनाते हैं महावीर जयंती

दुनियाभर में जैन धर्मावलंबी महावीर जयंती को हर्षोउल्लास से मनाते हैं. इस दिन भगवान महावीर की की मूर्तियों का अभिषेक किया जाता है. इसके बाद एक खूबसूरत रथ पर भगवान की मूर्ति को विराजमान किया जाता है. इसके बाद जुलूस निकाला जाता है. भारत में गुजरात और राजस्थान में इस दिन देखने लायक माहौल होता है. क्योंकि इन दोनों राज्यों में जैन धर्म को मानने वालों की तादात सबसे अधिक है.

First published: 28 March 2018, 14:33 IST
 
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