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Mahavir Jayanti 2018: जानिए भगवान महावीर के बारे में कुछ अनसुलझी बातें

कैच ब्यूरो | Updated on: 29 March 2018, 11:26 IST

जैन धर्म के अनुयायी आज पूरी दुनिया में भगवान महावीर की जयंती मना रहे हैं. भगवान महावीर जैन धर्म के 24वें तीर्थकर हैं. उनकी जयंती को जैन अनुयायी त्योहार के रूप में मनाते हैं. भगवान महावीर ने पांच सिद्धांत दिए. आज भी जैन धर्म को मानने वाले उनके इन सिद्धांतों का अनुसरण करते हैं.

आज भगवान महावीर की जयंती पर हम कुछ ऐसी बातें बताने जा रहे हैं. जिन्हें शायद ही आपने पहले कभी सुना होगा. भगवान महावीर का बचपन का नाम वर्धमान था. जैन धर्म की दो शाखाएं हैं. दिगंबर और श्वेतांबर. भगवान महावीर को लेकर दोनों के अलग-अलग मत हैं. दिगंबर जैन मानते हैं कि भगवान महावीर पूरी जिंदगी अविवाहित रहे.

वहीं श्वेतांबर जैनों का कहना है कि भगवान महावीर ने शादी की और उनकी एक बेटी भी थी. 'महावीर मेरी दृष्टि में' नाम की किताब में ओशो भगवान महावीर के बारे में लिखते हैं कि यह असंभव है कि एक अविवाहित व्यक्ति के साथ पत्नी और लड़की भी जुड़ जाए. ओशो का कहना है कि यह करीब-करीब असंभव है. लेकिन यह भी असंभव है कि एक विवाहित व्यक्ति और उसकी एक लड़की और दामाद के होते हुए एक परंपरा उसे अविवाहित घोषित करे.

ओशो की किताब के मुताबिक ये दोनों बातें असंभव हैं. उनका कहा है कि ये दोनों बातें कैसे संभव हो सकती हैं? अगर विवाह हुआ हो, लड़की हुई हो, दामाद हो, और ये सब बातें तथ्य हों, तो कोई कैसे इनकार कर देगा इस बात को कि यह हुआ नहीं? यहां फिर समझ लेने जैसा है कि तथ्य जरूरी नहीं कि सदा सत्य हों. ओशो की किताब में कहा गया है कि यह एक बात समझ लेनी जरूरी है. तथ्य जरूरी नहीं कि सदा सत्य हों. और जिनकी पकड़ सत्य पर है. बहुत बार तथ्यों में बुनियादी हेर-फेर हो जाते हैं. और जो सत्यों को नहीं देख पाते, वे सिर्फ मृत तथ्यों को संगृहीत कर लेते हैं.

ओशो का मामना है कि महावीर का विवाह जरूर हुआ होगा, लेकिन वे बिलकुल अविवाहित की भांति रहे होंगे. और इसलिए बात संभव हो सकी. किताब में कहा गया है कि उनका विवाह हुआ, लेकिन वे अविवाहित की भांति रहे. जिन्होंने तथ्य देखा, उन्होंने कहा, विवाह जरूर हुआ; और जिन्होंने सत्य देखा, उन्होंने कहा, वह आदमी अविवाहित था, अनमैरिड था.

'महावीर मेरी दृष्टि में' पुस्तक के मुताबिक अविवाहित होना एक सत्य है और विवाहित होना सिर्फ एक तथ्य है. कोई व्यक्ति बिना विवाहित हुए विवाहित हो सकता है- मन से, चित्त से, वासना से. किताब में कहा गया है कि विवाहित होने की वासना क्या है, उसे हम समझ लें. विवाहित होने की वासना है कि मैं अकेला काफी नहीं हूं, पर्याप्त नहीं हूं, दूसरा भी चाहिए जो आए और मुझे पूरा करे. मैरिड होने का मतलब क्या है? विवाहित होने का मतलब क्या है?

ओशो कहते हैं कि विवाहित होने का गहरा मतलब यह है कि मैं अपने में पर्याप्त नहीं हूं, जब तक कि कोई मुझे मिले और जोड़े और पूरा न करे. पुरुष अपर्याप्त है अपने में, आधा है, स्त्री जुड़े. यह विवाहित होने की कामना है, यह विवाहित होने का चित्त है. स्त्री अधूरी है अपने में, पुरुष के बिना खाली-खाली है, पुरुष आए और उसे भरे और पूरा करे, यह विवाहित होने की कामना है.

ओशो कहते हैं कि मैं दिगंबरों से कहता हूं कि उन्होंने ठीक ही कहा कि महावीर अविवाहित थे. क्योंकि उस व्यक्ति में किसी से पूरे होने की कोई कामना न बची थी, वह पूरा था. कहीं कोई अधूरापन न था, जो किसी और से उसे पूरा करना है. इसलिए मैं मानता हूं कि श्वेतांबरों से दिगंबरों की आंख गहरी पड़ी, बहुत गहरी पड़ी. बहुत गहरा देखा उन्होंने, कि यह आदमी अविवाहित है. इस साधारण से तथ्य के लिए कि एक स्त्री से इसका विवाह हुआ, इसको विवाहित कहना एकदम अन्याय हो जाएगा. आप मेरा मतलब समझ रहे हैं न?

ओशो कहते हैं कि दिगंबरों ने कहा कि नहीं, इस आदमी ने कभी शादी की ही नहीं. मगर उनसे भी, जैसे-जैसे बात आगे बढ़ी, भूल होती चली गई. किताब के मुताबिक वे भी तथ्य को इनकार करने लगे. उनको भी खयाल न रहा इस बात का कि तथ्य तो था कि शादी की थी. और मैं मानता हूं कि यह भी बात अर्थपूर्ण है कि महावीर ने इनकार नहीं किया शादी के लिए. असल में जो शादी के लिए आतुर है वह, और जो शादी का इनकार करता है वह, वे दोनों स्त्रियों को अर्थ देते हैं. इनकार करने वाला भी स्त्री को अर्थ देता है.

First published: 29 March 2018, 10:08 IST
 
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