Home » धर्म » Mysterious Temple Of Muktagiri Jain Teerth Where Sandal And Saffron Drops As Rain
 

मध्य प्रदेश के इस मंदिर में होती है केसर और चंदन की बारिश, अद्धभुत होता है नज़ारा

कैच ब्यूरो | Updated on: 8 September 2018, 13:17 IST

हमारे देश में ऐसे कई मंदिर हैं जिन्हें चमत्कारी मंदिर के रूप में जाना जाता है. इन मंदिरों में होने वाले चमत्कारों को देखने के लिए श्रद्धालु दूर-दूर से पहुंचते हैं. यहां पूजा-अर्चना कर भगवान से मन्नत मांगते हैं. ऐसा ही एक मंदिर है मध्य प्रदेश के बैतूल जिले में है. जिसे सब मुक्तागिरी जैन तीर्थ के नाम से जानते हैं.

बता दें कि मुक्तागिरी मंदिर सतपुड़ा के घने जंगलों के बीच में बसा है और यहां पर प्रकृति का अद्भुत नजारा देखने को मिलता है. मुक्तागिरी मंदिर के पास में ही एक झरना है, जहां लगभग 250 मीटर की ऊंचाई से पानी की धारा गिरती है जो इस जगह को और सुंदर बना देती है.

इस मंदिर में हर अष्टमी चौदस को एक चमत्कार देखने को मिलता है. दरअसल, हर अष्टमी चौदस को यहां केसर और चन्दन की बारिश होती हैं. इस अद्भुुत नजारे को देखने के लिए देशभर से तीर्थयात्री यहां पहुंचते हैं. लोक कथाओं के मुताबिक हजारों साल पहले यहां एक मुनि ध्यान में मग्न थे. उनके सामने ही एक मेंढक पहाड़ की छोटी से गिर कर मर गया.

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Muktagiri is a Jain Pilgrimage centre, located on border of Madhya Pradesh and Maharashtra in India. It comes under Bhainsdehi tehsil of Betul district or Baitul district in Madhya Pradesh, India. It is 14 km away from Paratwada, Dist. Amravati, Maharashtra. Muktagiri is 7 km away from Kharpi village on Paratwada - Baitul road. There are 52 temples on the mountain, surrounding a beautiful waterfall. The waterfall is generally visible only when there is enough rainfall in the area. A lot of monkeys can be seen near the 10th Temple - Bhagwan Sheetalnath temple - near which the waterfall is located. The 10th Temple is called Medhagiri Temple is an ancient temple inside an ancient cave built in 10th century.The cave is prone to stonefall (which is generally said to happen only during night). Also, lot of honeybees are at a large distance from the cave. The 1st Temple, 10th Temple, 26th Temple and 40th Temple are the main temples. P.C google images #india #jainism #jain #traditions #heritage #muktagiri #spiritual #faith #god #life #religion #believe #mptourism #madhyapradesh #incredibleindia #religious #indian #temples #indiantraveler21

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मुनि ने उसके कान में णमोकार मंत्र का जाप किया. जिससे उस मेंढक को स्वर्ग में देवगति की प्राप्ति हुई. तभी से इस पर्वत श्रंखला का नाम मेढ़ागिरी पर्वत पड़ गया.

कहा जाता है कि मृत्यु के बाद जब वो मेंढक मुनि के दर्शन के लिए आया, तो उस दिन केसर और चन्दन की बारिश हुई. तभी से ऐसी मान्यता प्रचलित है कि हर अष्टमी चौदस को यहां केसर-चन्दन की बारिश होती है. बता दें कि इस पर्वत श्रेणी पर लगभग 52 छोटे-बड़े मंदिर हैं. जिसमें सबसे ज्यादा भीड़ मुक्तागिरी तीर्थ धाम में होती है. इस मंदिर के द्वार तक पहुंचने में लगभग 600 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं.

बता दें कि पूरे साल जाकर कोई भी इस मंदिर में जाकर भगवान के दर्शन कर सकता है. लेकिन अष्टमी चौदस के दिन यहां दर्शन करने के लिए हजारों की संख्या में भक्तों की भीड़ पहुंचती है.

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First published: 8 September 2018, 13:17 IST
 
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