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Parshuram Jayanti 2018: जानें भगवान परशुराम से जुड़ी बातें, जिन्हें आज भी माना जाता है जीवित

कैच ब्यूरो | Updated on: 18 April 2018, 11:59 IST

भगवान विष्णु के छठे अवतार परशुराम की आज जयंती है. भगवान परशुराम की जयंती हर साल अक्षय तृतीया के दिन मनाई जाती है. परशुराम को न्याय का देवता भी कहा जाता है. बताया जाता है कि भगवान परशुराम ने 21 बार धरती को क्षत्रिय विहीन किया था. उन्हें अपने क्रोध के लिए भी जाना जाता है. क्योंकि एक बार उन्होंने अपने क्रोध से भगवान गणेश को भी नहीं बख्शा था.

भगवान परशुराम का जन्म माता रेणुका और ऋषि जमदग्नि के घर हुआ. वे अपनी मां-बाप की चौथी संतान थे. परशुराम भगवान शिव के उपासक थे. शिव भक्ति के कारण इन्हें भोले भंडारी से वरदान स्वरूप परशु मिला था. इसीलिए इनका नाम परशुराम पड़ गया. ऐसी मान्यता है कि भगवान परशुराम आज भी धरती पर मौजूद हैं. उन्हें सात अमर देवताओं में एक माना जाता है. इसीलिए भगवान परशुराम का उल्लेख सतयुग, त्रेतायुग और द्वापर युग में भी मिलता है.

 

पौराणिक कथाओंं के मुताबिक भगवान परशुराम ने पिता की आज्ञा का मान रखने के लिए अपनी मां का वध कर दिया था. फिर पिता से ही वरदान मांगकर उन्हें पुनः जीवित किया था. वहीं त्रेता युग में भगवान राम ने ही परशुराम को द्वापर युग तक सुदर्शन चक्र संभालने की जिम्मेदारी थी. इसीलिए गुरु संदीपनी के यहां आकर परशुराम ने श्रीकृष्ण को सुदर्शन चक्र सौंपा था. परशुराम ने ही द्वापर युग के सर्वश्रेष्ठ धनुर्धारियों में शुमार भीष्म और कर्ण को धनुर्विद्या सिखाई.

भगवान गणेश के तोड़ दिए थे दांत

बताया जाता है कि एक बार परशुराम भगवान शिव के दर्शन करने के लिए कैलाश पर्वत पहुंचे, लेकिन भगवान गणेश ने उन्हें मिलने से इनकार कर दिया. इस बात पर परशुराम को क्रोध आ गया और उन्होंने अपने फरसे से भगवान गणेस का एक दांत तोड़ दिया. इसीलिए भगवान गणेश एकदंत भी कहा जाता है.

कहा जाता है कि अरावली की पहाड़ियों की गुफा में परशुराम ने अपने फरसे के वार से चट्टान पर एक मंदिर का निर्माण कर दिया था. इस गुफा के अंदर एक स्वयंभू शिवलिंग है. जहां पर परशुराम ने भगवान शिव की तपस्या की थी. परशुराम की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें फरसा, धनुष और अक्षय तरकश दिया था. इस तरकश के तीर कभी भी खत्म नहीं होते थे. ऐसी मान्यता है कि आज भी ऐसे 8 चिरंजीव देवता और महापुरुष है, जो जीवित हैं. जिनमें भगवान परशुराम का नाम भी शामिल है.

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First published: 18 April 2018, 11:59 IST
 
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