Home » धर्म » Paush Maas will begin from 22nd December 2019
 

इस दिन से शुरु होगा पौष माह, सूर्य की पूजा-अर्चना करने से मिलेंगे शुभ फल

कैच ब्यूरो | Updated on: 10 December 2019, 13:33 IST

Paush Maas : हिंदू धर्म ग्रंथों के मुताबिक, हिंदू पंचाग का हर महीना कोई न कोई खासियत रखता है. यही नहीं हिंदू पंचाग के हर माह के आराध्य देव भी होते हैं. इस बार पौष माह 22 दिसंबर से शुरु हो रहा है. इस माह में सूर्य नारायम की उपासना का विशेष महत्व माना जाता है. इस मास में सूर्य देव की उपासना भग नाम से की जाती है. हेमंत ऋतु के इस मास में ठंड अपने चरम पर होती है. इस बार पौष माह 20 जनवरी 2020 तक रहेगा.

बता दें कि हिंदू पंचांग के दसवें महीने को पौष माह कहा जाता है. विक्रम संवत में भी पौष माह दसवां महीना होता है. भारतीय महीनों के नाम नक्षत्रों पर आधारित हैं. जिस मास की पूर्णिमा को चंद्रमा जिस नक्षत्र में रहता है उस मास का नाम उसी नक्षत्र के आधार पर रखा गया है. पौष मास के पूर्णिमा को चंद्रमा पुष्य नक्षत्र में रहता है इसलिये इस मास को पौष का मास कहा जाता है. धर्म ग्रंथों को मुताबिक इस माह में की सभी शुभ कार्य बंद हो जाते हैं.

ऐसी मान्यता है कि सूर्य देवता के भग नाम से इस माह में उनकी पूजा करने से पुण्य की प्राप्ति होती है. शास्त्रों में ऐश्वर्य, धर्म, यश, श्री, ज्ञान और वैराग्य को ही भग कहा गया है. जो इनसे युक्त उन्हें भगवान माना गया है. ये भी मान्यता है कि इस मास में मांगलिक कार्य नहीं करने चाहिये, क्योंकि उनका शुभ फल नहीं मिलता. इसका एक कारण यह भी है कि पौष मास में सूर्य अधिकतर समय धनु राशि में रहते हैं. धनु राशि का स्वामी बृहस्पति को माना जाता है.

ऐसी मान्यता है कि देव गुरु बृहस्पति इस समय देवताओं सहित सभी मनुष्यों को धर्म-सत्कर्म का ज्ञान देते हैं. लोग सांसारिक कार्यों की बजाय धर्म-कर्म में रूचि लें. इसी कारण इस माह में शुभ कार्य नहीं होते हैं. पौष माह में शुभ कार्य विवाह, मुंडन, व्रत धारण/उद्यापन, गृहारंभ, गृह प्रवेश आदि कार्यों का करना निषेध माना जाता है. शुभ मुहूर्त में प्रारंभ या संपन्न किए गए कार्य अनेक दोषों का शमन करते हुए सिद्ध व सफल होते हैं.

पौष माह में सूर्य नारायण की पूजा करना शुभ माना जाता है. इस माह में सूर्य की पूजा पौष रोज सुबह स्नान करने के बाद ही करनी चाहिए. सबसे पहले स्नान करें उसके बाद सूर्य को जल अर्पित करें. साथ ही इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए कि जिस पात्र से आप सूर्य को जल अर्पित कर रहे हैं वह तांबे का हो. साथ ही इस जल में रोली और लाल फूल जरूर डाल लें. इसके बाद सूर्य के मंत्र "ॐ आदित्याय नमः" का जाप अवश्य करें. इसके साथ ही इस माह में नमक का सेवन जितना हो सके कम करना चाहिए.

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First published: 10 December 2019, 13:33 IST
 
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