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Saturday Vastu Tips: शनिदेवा का आशीर्वाद पाने के लिए शनिवार को अपनाएं ये उपाय

कैच ब्यूरो | Updated on: 17 July 2021, 10:56 IST
Shani Dev (Social Media)

सप्ताह के सातों दिन किसी न किसी ग्रह या भगवान को समर्पित हैं. शनिवार का दिन भी न्याय के देवता शनि को समर्पित किया गया है. शनि अगर किसी से रूठ जाएं तो उसके सब बने काम ही नहीं बिगड़ जाएंगे बल्कि उसपर दरिद्रता आने लगेगी. ऐसा माना जाता है कि शनिदेव कर्मों के आधार पर दंड के विधान के तहत कार्य करते हुए दंड देते हैं. वहीं जिस जातक से वह प्रसन्न हो जाते हैं उसे फर्श से उठाकर अर्श तक पहुंचा देते हैं. ज्योतिष के मुताबिक, नौ ग्रहों में शनि की गति सबसे मंद यानी धीमा होती है. जबकि इनका प्रभाव सबसे अधिक होता है.

भले ही शनि के दंड के न्याय विधान के कारण लोगों में इन्हें नकारात्मक धारणा बनी हुई हो और वे इसके नाम से भयभीत भी रहते हों. परंतु ज्योतिष के जानकारों का मानना है कि शनि ग्रह को भले एक क्रूर हैं, परंतु यह गलत कर्म करने या पीड़ित होने पर ही जातकों को नकारात्मक फल देते है. वहीं यदि किसी व्यक्ति का शनि उच्च हो और उसके कर्म भी बुरे न हों तो माना जाता है कि शनिदेव उसे रंक से राजा तक बना देते है.


हिन्दू धर्म के मुताबिक, शनिदेव को सूर्य पुत्र माना जाता है. ऐसे में इस दिन शनिदेव और हनुमान जी की आराधना की जाती है. जानकारों का मानना है कि बहुत कम लोग जानते हैं कि शनिवार के दिन कुछ छोटे-छोटे उपायों को आजमाने से किस्मत चमक सकती हैं. ऐसा करने से शनिदेव प्रसन्न हो जाते हैं और जातक को मन चाहा वर प्रदान करते हैं. शनिवार के दिन नीले वस्त्र धारण करने चाहिए. इस दिन हनुमान मंदिर में पूजा अर्चना करना भी शुभ माना जाता है. साथ ही इस दिन हनुमानजी को पान का बीड़ा चढ़ाना चाहिए. इसके अलावा हनुमान जी के चरणों में लाल फूल अर्पित करने चाहिए. साथ ही ॐ प्रां प्रीं प्रौं स: शनैश्चराय नम: मंत्र का जाप कर घर से निकलना शुभङ माना जाता है. शनिवार के दिन तिल का सेवन करना भी शुभ माना जाता है. नीले या जामुनी फूल शनि मंदिर में चढ़ाने चाहिए. वहीं काम पर जाते वक्त नीला रूमाल अवश्य साथ रखना चाहिए.

ऐसा माना जाता है कि शनि मंदिर में भगवान शनिदेव की प्रतिमा की आंखों में आंखें डालकर नहीं देखना चाहिए. दर्शन करते समय उनके चरणों पर ही नजर रखें साथ ही दिल व वाणी से उनके प्रति श्रद्धा का भाव रखना चाहिए. इसके साथ ही शनिदेव को तेल चढ़ाते समय ये भी ध्यान रखें कि तेल इधर-उधर ना गिरे और चढ़ाया जा रहा तेल खराब ना हो यानि अच्छे व शुद्ध तेल का ही उपयोग करें. यदि छायादान कर रहे हैं तो उस तेल को न चढ़ाएं, बल्कि उसे कटोरी सहित ही शनिदेव के चरणों में रख देना चाहिए. शनिदेव की मूर्ति के एकदम सामने खड़े होकर कभी भी पूजा या प्रार्थना नहीं करनी चाहिए.

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इसके अलावा इस बात का अवश्य ध्यान रखें कि अगर शनि मंदिर में या बाहर कोई गरीब, अपंग या भिखारी हो तो उसे दान जरूर करना चाहिए. दान नहीं दे सकते हों तो कम से कम उनका तिरस्कार ना करें. शनि मंदिर में किसी भी प्रकार की बातचीत करना वर्जित होता है. इसलिए चुपचाप पूजा या प्रार्थना के बाद मंदिर की सीढ़ियों पर कुछ देर के लिए बैठ जाएं और उसके बाद लौट आना चाहिए. शनि की पूजा में दिशा का विशेष महत्व होता है. शनि को पश्चिम दिशा का स्वामी माना जाता है इसलिए शनि की पूजा करते समय इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि अपका मुख पश्चिम दिशा में ही रहे. माना जाता है कि शनिदेव को लाल रंग पसंद नहीं है इसलिए शनिवार को पूजा में भूलकर भी लाल रंग के फूल या कोई लाल सामाग्री का इस्तेमाल न करें.

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First published: 17 July 2021, 10:56 IST
 
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