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Sawan Shivratri 2020: ये है सावन शिवरात्रि पर पूजा का शुभ मुहूर्त, ऐसे करें भगवान शिव का जलाभिषेक

कैच ब्यूरो | Updated on: 19 July 2020, 9:58 IST

Sawan Shivratri 2020: भगवान शिव (Lord Shiva) की आराधना (Worship) का सबसे महत्वपूर्ण दिन शिवरात्रि (Shivratri) का माना जाता है. शिवरात्रि हर महीने (Every Month) होती है, लेकिन माघ महीने की शिवरात्रि और सावन की शिवरात्रि (Savan Shiratri) का सबसे अधिक महत्व है. आज सावन माह (Savan Month) की शिवरात्रि है. इस दिन भगवान भोले नाथ (Lord Bholenath) के भक्त शिवालयों (Shivalayas) जाकर शिव का जलाभिषेक करते हैं और पूरे दिन व्रत (Fast) कर भगवान (God) से कामना करते हैं. सावन महीने में पड़ने वाली शिवरात्रि का महाशिवरात्रि (Maha Shivratri) की तरह ही विशेष महत्व है.

ऐसा माना जाता है कि इस दिन भोलेनाथ की आराधना करने से वह स्‍वयं महामृत्‍युंजय बनकर उपासक की रक्षा करते हैं. सावन मास की श‍िवरात्रि इस बार रविवार यानी 19 जुलाई को है. शास्‍त्रों के अनुसार इस दिन श‍िवजी का अभिषेक अन्य दिनों की अपेक्षा अधिक फलदायी होता है. सावन के महाने में शिव भक्त कांवड़ लाते हैं और शिवालयों में जलाभिषेक करते हैं, लेकिन इस साल कोरोना के चलते शिवभक्तों की ये मनोकामना पूरी नहीं हो पाई और वो इस साल कांवड़ नहीं ला सके. लेकिन इस बार शिव भक्त भगवान शिव को प्रसंन्न करने के लिए शिवालयों में सिर्फ जल अर्पित कर सकते हैं.


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इसके लिए ज्योतिषाचार्यों ने शुभ मुहूर्त निकाला है. इस शुभ मुहूर्त में जलाभिषेक करने से भोले के भक्त पुण्य के भागी बन सकते हैं. ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक, इस बार चतुर्दशी तिथि प्रारंभ 18 जुलाई की मध्यरात्रि के बाद 12 बजकर 42 मिनट से शुरु हुआ है जो 19 जुलाई को मध्यरात्रि 12 बजकर 10 मिनट तक रहेगी. इस दौरान महानिशिथ काल पूजा 19 जुलाई को रात 11 बजकर 33 मिनट से 12 बजकर 10 मिनट तक रहेगा. वहीं पारण का समय- जो लोग सोमवार व्रत नहीं कर रहे हैं उनके लिए 20 जुलाई की सुबह तक होगा. यानी वो शिवजी का अभिषेक करने के बाद पारण कर सकते हैं.

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ज्योतिष के जानकारों का कहना है कि शिवलिंग पर अभिषेक करने के लिए शुभ समय सूर्योदय के बाद दोपहर 2 बजकर 45 तक है, लेकिन प्रदोष काल और रात्रि में महानिशिथ काल में पूजा भी शुभ फलदायी कहा गया है. वैसे आर्द्रा नक्षत्र और मिथुन लग्न के संयोग में सुबह 5:40 बजे से 7:52 बजे तक का समय सर्वोत्तम रहा जो अब निकल चुका है. हालांकि अब, शाम को 7:28 बजे से रात 9:30 बजे तक प्रदोष कल में भी अभिषेक किया जा सकता है. इसके बाद निशीथ और महानिशीथ काल आरंभ हो जाएगा.

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बता दें कि सावन शिवरात्रि के मौके पर भोलेनाथ की सच्‍चे मन से आराधना करने पर मनोवांछित कामना पूरी होती है. ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक, शास्त्रों में बताया गया है कि, शिवरात्रि के दिन सुबह जल्‍दी उठकर सबसे पहले नित्यकर्म और स्नान करना चाहिए . इसके बाद साफ वस्त्र धारण करके मंदिर जाकर शिवजी की पूजा-अर्चना करनी चाहिए. इस साल कोरोना संकट के कारण बहुत से मंदिरों में श्रद्धालुओं के लिए कपाट बंद रखे गए हैं, ऐसे में घर पर ही शिवजी की आराधना की जा सकती है.

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शिवजी के अभिषेक के लिए शिवपुराण में बताया गया है कि दूध, दही, शहद, घी, चीनी, इत्र, चंदन, केसर और भांग का प्रयोग करना चाहिए. इस सभी वस्तुओं से अभिषेक का अलग-अलग परिणाम बताया गया है. ऐसी मान्‍यता है कि सावन शिवरात्रि पर भोलेनाथ को तिल चढ़ाने से जातक के संपूर्ण पापों का नाश होता है. इसके अलावा शिव को गेहूं से बनीं वस्‍तुओं का भोग भी लगाना शुभ माना जाता है. इसके अलावा ऐश्‍वर्य पाने की आकांक्षा रखने वाले जातकों को भगवान शिव को मूंग का भोग लगाना चाहिए. वहीं मनचाहा वर पाने की चाह रखने वाली कन्याएं दाल का भोग लगाएं.

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First published: 19 July 2020, 9:58 IST
 
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