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Sharad Purnima 2018: इस दिन बनाई जाने वाली खीर ऐसे बन जाती है अमृत, ये हैं वैज्ञानिक कारण

कैच ब्यूरो | Updated on: 24 October 2018, 11:12 IST

आज यानि 24 अक्टूबर बुधवार को शरद पूर्णिमा है. शरद पूर्णिमा की रात्रि को अन्य रात्रि के मुकाबले बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है. जहां इसे शरद ऋतु की शुरुआत माना जाता है, वहीं इस रात को चंद्रमा संपूर्ण 16 कलाओं से परिपूर्ण होता है और अपनी चांदनी में अमृत बरसाता है. इसी वजह से लोग इस पूरी रात्रि को खीर बनाकर चांदनी में रख देते हैं, ताकि उसे प्रसाद के रूप में सुबह स्नान करके खाने के बाद निरोग हो जाएं. इस मान्यता के पीछे वैज्ञानिक तथ्य भी है.

बता दें कि शरण पूर्णिमा को कोजगार पूर्णिमा भी कहा जाता है. इसे जागृति पूर्णिमा या कुमार पूर्णिमा के नाम से भी पुकारा जाता है. पुराणों के मुताबिक कुछ रातों का बहुत महत्व है जैसे नवरात्रि, शिवरात्रि और इनमें शरद पूर्णिमा भी शामिल है. श्रीमद्भागवत महापुराण के मुताबिक चन्द्रमा को औषधि का देवता माना जाता है.

मान्यताओं से अलग वैज्ञानिकों ने भी इस पूर्णिमा को खास बताया है, जिसके पीछे कई सैद्धांतिक और वैज्ञानिक तथ्य छिपे हुए हैं. इस पूर्णिमा पर चावल और दूध से बनी खीर को चांदनी रात में रखकर प्रात: 4 बजे सेवन किया जाता है. इससे रोग खत्म हो जाते हैं और रोगप्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है.

ये हैं वैज्ञानिक कारण

वैज्ञानिकों के मुताबिक दूध में लैक्टिक एसिड और अमृत तत्व होता है. यह तत्व किरणों से अधिक मात्रा में शक्ति का शोषण करता है. साथ ही चावल में स्टार्च होता है जो यह प्रक्रिया आसान बनाता है. इसी कारण ऋषि-मुनियों ने शरद पूर्णिमा की रात्रि में खुले आसमान के नीचे खीर रखने का विधान किया, क्योंकि इस दिन चांद की रोशनी सबसे अधिक होती है. एक अन्य वैज्ञानिक शोध के मुताबिक इस दिन दूध से बने उत्पाद का चांदी के पात्र में सेवन करना चाहिए. चांदी में रोग-प्रतिरोधक क्षमता अधिक होती है.

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First published: 24 October 2018, 11:05 IST
 
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