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पुलवामा में है प्राचीन शिव मंदिर, पुजारी या पंडित नहीं बल्कि मुस्लिम परिवार करता है इसकी देखभाल

कैच ब्यूरो | Updated on: 3 March 2019, 16:02 IST

जम्मू-कश्मीर का पुलवामा 14 फरवरी के बाद सुर्खियों में है. पुलवामा दक्षिण कश्मीर का एक इलाका है. 14 फरवरी के दिन यहां आतंकियों ने CRPF के काफिले पर हमला किया था, जिसमें 40 से ज्यादा जवान शहीद हो गए थे. हम आपको इस हमले से जुड़ी जानकारी नहीं देने जा रहे है, बल्कि शिवरात्रि के पावन पर्व पर इसी जमीन पर स्थित एक ऐसे शिव जी के मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं, जो आस्था का प्रतीक है. इस मंदिर की सबसे अलग बात ये है कि इस मंदिर की देखभाल को पुजारी या पंडित नहीं करता बल्कि इस मंदिर की देखभाल एक मुस्लिम परिवार करता है. यहां आने वाले लोग ऐसा देखकर हैरान हो जाते हैं.

बताया जाता है कि वर्षों पहले जब यहां कश्मीरी पंडितों को परेशान किया जाता था, तब मंदिर की देखभाल करने वाले लोग यहां से चले गए. इस घटना के बाद से जब मंदिर का देखभाल करने वाला कोई पंडित नहीं बचा, तो सदियों पुराने शिव मंदिर की देखभाल की जिम्मेदारी एक मुस्लिम परिवार ने ली. इस प्राचीन मंदिर को पयार शिव मंदिर के नाम से जाना जात है.

इसकी देखभाल कश्मीरी मुस्लिम गुलाम नबी शेख का परिवार करता है. खबरों के मुताबिक, शेख परिवार साल 1974 से इस मंदिर की देखभाल कर रहे हैं. इस मंदिर को 1974 से एएसआई में स्मारक परिचारक के रूप में शामिल किया गया है. कश्मीर के पुलवामा का यह शेख परिवार देशी-विदेशी पर्यटकों और शोधकर्ताओं को ना सिर्फ इस मंदिर के दर्शन कराता है बल्कि उनके उत्सुकता भरे सवालों का जवाब भी देता है. गुलाम नबी शेख 2013 में एएसआई से सेवानिवृत्त हुए, इनके बाद उनके चचेरे भाई, मुश्ताक अहमद ने मंदिर की देखभाल करने की जिम्मेदारी अपने कंधों पर ले ली.

स्थानीय लोककथाओं के अनुसार, "पांडवों द्वारा निर्मित पयार गांव में पांच मंदिर थे. इन मंदिरों को हथियाने के लिए एक बार दुश्मनों ने आक्रमण कर दिया, लेकिन पांचो पांडवों ने इस मंदिर को बचा लिया. पौराणिक कथाओं के अनुसार, इस आक्रमण के बाद माता कुंती अपने हाथ में एक ड्रम लेकर इस मंदिर की रक्षा करने के लिए मंदिर के बाहर खड़ी रहती थी, जब भी कई शत्रु बाहर से आता दिखता तो वे डोल बजा देती थी. तब आराम कर रहे पांडव सतर्क हो जाते थे. एक बार शत्रु ने अचानक बड़ा आक्रमण कर दिया और पांडवों ने अपने मंदिरों को सुरक्षित रखने के लिए उन्हें उठा लिया और सुरक्षित स्थान पर ले गए, लेकिन आनन-फानन में यह एक मंदिर यहां छूट गया. जिसमें दुश्मन ने लूट-पाट की."

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First published: 3 March 2019, 16:02 IST
 
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