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सोमवती अमावस्या: पितरों को शांत करने के लिए ऐसे करें पूजा-अर्चना

कैच ब्यूरो | Updated on: 16 April 2018, 13:13 IST

आज वैशाख महीने की अमावस्या तिथि है. वैशाख महीने में सोमवार के दिन पड़ने वाली अमावस्या को सोमवती अमावस्या कहा जाता है. हिन्दू धर्म में सोमवती अमावस्या बहुत ही सौभाग्यशाली फल देने वाली मानी जाती है. इसका विशेष महत्व होता है. इस दिन पितरों की आत्मा शांति के लिए पूजा पाठ किया जाता है. महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए व्रत रखती हैं. वैशाख माह को भगवान शिव और भगवान विष्णु का प्रिय महीना भी माना जाता है.

कैसे करें इस दिन पूजा

महाभारत में भीष्म पितामह ने पांडव पुत्र युधिष्ठिर को इस दिन का महत्व समझाया था. उन्होंने कहा था कि इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने वाला मनुष्य समृद्ध, स्वस्थ्य और सभी दुखों से मुक्त होगा. कहा जाता है कि पांडव पूरे जीवन तरसते रहे परंतु उनके संपूर्ण जीवन में सोमवती अमावस्या नहीं आई. ऐसा माना जाता है कि स्नान करने से पितरों कि आत्माओं को शांति मिलती है.

इस दिन दूध, जल, पुष्प, अक्षत, चन्दन इत्यादि से पूजा करने के बाद पीपल के वृक्ष के चारों ओर 108 बार धागा लपेट कर परिक्रमा करनी चाहिए. पीपल का पूजन करके जल अर्पित करें. फिर ये मंत्र बोलते हुए सात परिक्रमा करें.

मंत्र- ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः

सूर्यदेव को करें जल अर्पित

सोमवार चंद्रमा का दिन है. इस दिन सूर्य तथा चंद्रमा एक सीध में स्थित रहते हैं. इसलिए यह पर्व विशेष पुण्य देने वाला है. सोमवती अमावस्या के दिन सूर्य नारायण को जल अर्पित करने से दरिद्रता दूर होती है. इस दिन नदी या सरोवर में स्नान कर भगवान शिव, माता पार्वती की पूजा करें. अमावस्या के दिन वृक्ष से पत्ता तोडना भी वर्जित माना जाता है.

कहा जाता है कि इस दिन किया गया दान हजार गुना फलदायी होता है. इस दिन गरीबों को भोजन कराने और वस्त्र भेंट करने से जीवन की समस्त बाधाएं दूर हो जाती हैं. अगर गृह क्लेश है तो इस दिन पीपल पर मीठा दूध अर्पित करें. इस दिन खीर का दान करना भी शुभफल देने वाला होता है.

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First published: 16 April 2018, 13:12 IST
 
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