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Solar Eclipse December 2020: ये है सूर्य ग्रहण की धार्मिक मान्यता और ग्रहण की कथा

कैच ब्यूरो | Updated on: 10 December 2020, 21:43 IST

Surya Grahan December 2020: हर साल कई ग्रहण (Solar Eclipse) लगते हैं ये ग्रहण सूर्य और चंद्रमा पर लगते हैं. शास्त्रों के मुताबिक, सूर्य ग्रहण को बहुत ही अशुभ माना जाता है. जिस समय सूर्य ग्रहण होता है. उस समय पृथ्वी के कुछ हिस्सों में अंधकार हो जाता है. यही नहीं सूर्य ग्रहण की वजह से पृथ्वी पर रहने वाले सभी जीवों को भी कष्ट भोगना पड़ता है. आज हम आपको सूर्य ग्रहण से संबंधित कुछ नई जानकारियां आपके साथ साझा कर रहे हैं. धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, सूर्य ग्रहण से पहले सूतक काल (Sutak Kaal) लग जाता है.

बता दें कि सूर्य को जगत की ऊर्जा माना जाता है जब सूर्य पर ग्रहण लगता है उस समय पृथ्वी पर कई तरह की अशुभ घटनाएं घटने लगती हैं. इस साल का आखिरी सूर्य ग्रहण सोमवार 14 दिसंबर 2020 को लग रहा है. यह सूर्य ग्रहण पूर्ण सूर्य ग्रहण ( Solar Eclipse) होगा. हालांकि इस ग्रहण को भारत में नहीं देखा जा सकेगा. बता दें कि इस सूर्य ग्रहण अशुभ प्रभाव पूरी पृथ्वी पर पड़ेगा. इसलिए आपको दिसंबर माह में पड़ने वाले इस सूर्य ग्रहण (Surya Grahan) की पूरी जानकारी होनी चाहिए.


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सूतक काल- ये सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा. इसलिए भारत में सूतक काल मान्य नहीं होगा. इसीलिए इसका कोई समय नहीं है. सूर्य ग्रहण की धार्मिक मान्यताओं की बात करें तो सूर्य ग्रहण के दिन राहु और केतु सूर्य भगवान को अपना ग्रास बना लेते हैं. जिसकी वजह से पूरी पृथ्वी अंधकारमय हो जाती है. इस समय में सूर्य देव अत्याधिक पीड़ा में रहते है. धार्मिक मान्यता के मुताबिक, सूर्य ग्रहण के दौरान सूर्य पर आपत्ति आती है. जिसके लिए धरती पर जप,तप और हवन आदि किए जाते हैं. जब सूर्य देव को ग्रहण लगता है उस समय पृथ्वी पर तो अंधेरा छा ही जाता है साथ ही उस समय में प्राकृतिक आपदाएं, सत्ता परिवर्तन और साथ ही राजा और प्रजा के बीच में तनाव में भी देखने को मिलता है. इसलिए सूर्य ग्रहण को बहुत ही ज्यादा अशुभ माना जाता है.

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ये है सूर्य ग्रहण की कथा (Surya Grahan Story)-

विष्णु पुराण के मुताबिक, जिस समय समुद्र मंथन हुआ था. उस समय देवता और असुरों के बीच अमृत को पाने के लिए झगड़ा हो गया. इस समस्या को सुलझाने के लिए भगवान विष्णु ने मोहिनी रूप धारण कर लिया. जिस दिन भगवान विष्णु ने मोहिनी रूप धारण किया था. उस दिन मोहिनी एकादशी थी. जिसके बाद भगवान विष्णु ने देवाताओं और असुरों को अलग-अलग पंक्तियों में बैठने को कहा, लेकिन उनमें से एक असुर देवता का रूप धारण करके देवाताओं की पंक्ति में बैठ गया और अमृत पान कर लिया. देवों की पंक्ति में बैठे सूर्य और चंद्र ने उस असुर को पहचान लिया और भगवान विष्णु को इसके बारे में बता दिया.

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जिसके बाद भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से उस असुर का सिर धड़ से अलग कर दिया. लेकिन अमृत पान करने के कारण उसकी मृत्यु होना असंभव था. जिसके कारण उस असुर का सिर और धड़ तो अलग हो गया. लेकिन वह मरा नहीं. शास्त्रों के अनुसार सिर वाले भाग को राहु और धड़ वाले भाग को केतु कहा जाता है. इसी वजह से सूर्य और चंद्र को राहु केतु अपना दुश्मन मानते हैं और जिसके कारण वह सूर्य को अपना ग्रास बना लेते हैं. इसलिए हर साल सूर्य लगता है.

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First published: 10 December 2020, 21:44 IST
 
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