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Vishwakarma Jayanti: जानिए आखिर 17 सितंबर को ही क्यों होती है भगवान विश्वकर्मा की पूजा

कैच ब्यूरो | Updated on: 17 September 2019, 12:11 IST

भगवान विश्वकर्मा को हिंदू धर्म में निर्माण और सृजन का देवता माना जाता है. यही नहीं भगवान विश्वकर्मा को दुनिया का सबसे पहला इंजीनियर भी कहा जाता है. वह अपनी शिल्‍प कला के लिए मशहूर हैं और सभी देवताओं में आदरणीय हैं. पौराणिक मान्‍यताओं के मुताबिक, विश्‍वकर्मा सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा के सातवें धर्म पुत्र हैं. वास्तुकला के आचार्य भगवान विश्वकर्मा ने देवताओं के लिए महलों, हथियारों और भवनों का निर्माण किया था.

भगवान विश्वकर्मा के जन्‍मदिवस को विश्‍वकर्मा जयंती के रूप में हर साल 17 सितंबर को ही मनाया जाता है. विश्‍वकर्मा पूजा का विशेष महत्‍व है. भगवान विश्वकर्मा की पूजा के दौरान औजारों, मशीनों और दुकानों की पूजा करने का विधान है. अगर इस दिन कारोबारी और व्यवसायी लोग भगवान विश्वकर्मा की पूजा करें तो उन्हें धन लाभ होता है.

हिंदू धर्म की मान्यताओं के मुताबिक, अश्विन मास की प्रतिपदा को भगवान विश्वकर्मा का जन्म हुआ था, लेकिन आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि लगभग सभी मान्यताओं के अनुसार यही एक ऐसा पूजन है जो सूर्य के पारगमन के आधार पर तय होता है. इसलिए हर साल 17 सितम्बर को ही विश्कर्मा जयंती मनाई जाती है.

पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक, भगवान विश्‍वकर्मा को निर्माण का देवता माना जाता है. ऐसी मान्‍यता है कि एक बार असुरों के अत्याचार से परेशान देवताओं की गुहार पर विश्‍वकर्मा ने महर्षि दधीची की हड्डियों से देवताओं के राजा इंद्र के लिए वज्र बनाया. यह वज्र इतना प्रभावशाली था कि इससे राक्षसों का सर्वनाश हो गया.

इसीलिए सभी देवताओं में भगवान विश्‍वकर्मा का विशेष स्‍थान है. ऐसा माना जाता है कि उन्‍होंने रावण की लंका, कृष्‍ण नगरी द्वारिका, पांडवों के लिए इंद्रप्रस्‍थ नगरी और हस्तिनापुर का निर्माण किया था. इसके अलावा उन्‍होंने उड़ीसा स्थित जगन्नाथ मंदिर के लिए भगवान जगन्नाथ सहित, बलभद्र और सुभद्रा की मूर्ति का निर्माण अपने हाथों से किया था.

यही नहीं उन्‍होंने कई अमोघ अस्त्र-शस्त्र भी बनाए, जिनमें भगवान शिव का त्रिशूल, भगवान विष्‍णु का सुदर्शन चक्र और यमराज का कालदंड शामिल हैं. दानवीर कर्ण के कवच-कुंडल और कुबेर का पुष्‍पक विमान भी भगवान विश्वकर्मा द्वारा बनाया माना जाता है.

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भगवान विश्‍वकर्मा के जन्‍मदिन को विश्‍वकर्मा पूजा, विश्‍वकर्मा दिवस या विश्‍वकर्मा जयंती के नाम से भी जाना जाता है. भगवान विश्‍वकर्मा को ‘देवताओं का शिल्‍पकार’, ‘वास्‍तुशास्‍त्र का देवता’, ‘प्रथम इंजीनियर’, ‘देवताओं का इंजीनियर’ और ‘मशीन का देवता’ कहा जाता है. सामाजिक, आर्थिक और सांस्‍कृतिक विकास के लिए श‍िल्‍प ज्ञान का होना बेहद जरूरी है. अगर शिल्‍प ज्ञान जरूरी है तो शिल्‍प के देवता विश्‍वकर्मा की पूजा का महत्‍व भी बढ़ जाता है. ऐसी मान्‍यता है कि विश्‍वकर्मा की पूजा करने से व्‍यापार में दिन-दूनी रात चौगुनी वृद्धि होती है.

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First published: 17 September 2019, 12:11 IST
 
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