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महाशिवरात्रि का क्या है महत्व और कैसे करें पूजा अर्चना और मंत्रों का जाप

कैच ब्यूरो | Updated on: 2 March 2019, 12:47 IST

4 फरवरी को महाशिवरात्रि की देशभर में पूजा अर्चना की जाएगी. फाल्गुन माह में आने वाली शिवरात्रि को महाशिवरात्रि कहा जाता है. मान्यता है कि इस दिन मनुष्य अपने अंदर ऊर्जा सकारात्मक रूप में एकत्रित कर सकता है. हिन्दू धर्म में महाशिवतरि विशेष महत्व रखती है. बड़ी संख्या में शिव भक्तों का उत्साह मंदिरों में इस दिन देखा जा सकता है. हर साल महत्वमहाशिवरात्रि फाल्गुन माह की कृष्ण पक्ष की चर्दतुशी तिथि को मनाई जाती है.

पुराणों में कहा गया है कि महाशिवरात्रि को भगवान शिव और पार्वती का विवाह हुआ था. हिन्दू धर्म में मान्यता है कि महाशिवरात्रि के दिन शिव अपनी शिवलिंग पर स्वयं प्रकट होते हैं. इस दिन लोग शिवपूजा के साथ शिवस्त्रोत का पाठ करते हैं. व्रत के बाद भोजन में खीर को महत्व दिया जा सकता है. इस दिन भक्त अक्सर भस्म का तिलक लगाते हैं.जबकि कई रुद्राक्ष की माला का जाप करते हैं.

कैसे करें पूजा

माना जाता है कि महाशिवरात्रि को ईशान कोण दिशा की ओर मुख करके पूजा करना लाभदायक होता है. धूप, पुष्प, बेलपत्र के साथ विधिवत पूजन करनी चाहिए. शिवलिंग पर पंचामृत से शंकर भगवान का अभिषेक करना शुभ मन जाता है. शिवलिंग के अभिषेक के लिए दूध, जल शहद मिलाया जाता है. अभिषेक के लिए मिट्टी के बर्तन में पानी रखकर उसमे बेलपत्र, आक, धतूरे के पुष्प, चावल आदि शिवलिंग को अर्पण किया जाता है. शिवलिंग पर चंदन का टीका लगाया जाता है.

मान्यता के अनुसार इस दिन व्रत के दौरान ऊं नम: शिवाय या शिवाय नम: मन्त्रों का जाप करना चाहिए. कई लोग यह भी मानते हैं कि इस दिन नमक खाने से बचना चाहिए. मीठे भोजन को महत्व ऐना चाहिए. महाशिवरात्रि के अगले दिन जौ तिल, खीर बेलपत्र का हवन शुभ माना जाता है. मान्यता है कि भगवान शिव ने विषपान करके सृष्टि को बचाया था.

First published: 2 March 2019, 12:44 IST
 
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