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शिवरात्रि पर बेलपत्र और जल से क्यों होती है शिव जी की पूजा, क्यों होते हैं भोलेनाथ इससे प्रसन्न

कैच ब्यूरो | Updated on: 2 March 2019, 12:55 IST

पूरे देशभर में आज शिवरात्रि का पर्व बहुत ही धूमधाम से मनाया जाता है. शिव जी के मंदिर में भक्तों का तांता लगा हुआ है. इस दिन भगवान शिव की उपासना करते हैं. भगवान भोलेनाथ को खुश करने के लिए श्रद्धालु उन पर बेलपत्र और जल चढ़ाते हैं. भगवान शिव को बेलपत्र काफी प्रिय है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि भगवान शिव जी को बेलपत्र इतना प्रिय क्यों है? चलिए जानते हैं-

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, सागर मंथन के समय जब हालाहल से विष निकलने लगा, तो सभी देवता एवं जीव-जंतु व्याकुल होने लगे. ऐसे समय में भगवान शिव ने विष को अपनी अंजुली में लेकर पी लिया. उनके शरीर पर विष का कोई प्रभाव ना हो इसलिए उन्होंने विष को कंठ में रख लिया, जिसकी वजह से उनका कंठ नीला पड़ गया और शिव जी नीलकंठ कहलाने लगे. लेकिन विष के प्रभाव से शिव जी का मस्तिष्क गर्म हो गया.

भगवान शिव जी के मस्तिष्त को गर्म होते देख सभी देवताओं ने उनके मस्तिष्क पर जल और बेलपत्र डालना शुरू कर दिया. बेलपत्र की तासीर का ठंढ़ी होती है इसलिए शिव जी को बेलपत्र चढ़ाया गया. तब से लेकर शिव जी की पूजा बेलपत्र औऱ जल से शुरू हो गयी.

पौराणिक कथाओं के अनुसार, शिव जी काफी गुस्सैल थे. इसलिए उनकी मस्तिष्क को शीतलता और शांति प्रदान करने के लिए बेलपत्र चढ़ाया जाता है. इसलिए बेलपत्र और जल से शिव जी की पूजा की जाती है. ताकि शिव जी प्रसन्न हों.

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First published: 2 March 2019, 12:55 IST
 
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