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रियो की उम्मीदें: बिंद्रा से बीजिंग वाली सफलता दोहराने की आस

कैच ब्यूरो | Updated on: 22 July 2016, 8:25 IST
QUICK PILL
नाम- अभिनव बिंद्राखेल- निशानेबाजीउम्र- 33 साल

पिछले 20 सालों में भारत को निशानेबाजी में कई अंतरराष्ट्रीय सफलता दिलाने वाले अभिनव बिंद्रा पांचवीं बार ओलंपिक में हिस्सा लेने जा रहे हैं. भारत के शूटिंग स्टार बिंद्रा बीजिंग ओलंपिक (2008) में 10 मीटर एयर राइफल में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच चुके हैं. ओलंपिक के 116 वर्षों के इतिहास में पहली बार किसी भारतीय (बिंद्रा) ने किसी व्यक्तिगत स्पर्धा में स्वर्ण पदक हासिल किया था.

18 साल की उम्र में पहली बार ओलंपिक में हिस्सा लेने वाले बिंद्रा का यह आखिरी ओलंपिक है. 33 वर्षीय बिंद्रा ने खुद बताया है कि रियो खेलों के बाद वो निशानेबाजी से संन्यास ले लेंगे. बिंद्रा उद्घाटन समारोह में भारतीय दल के ध्वजवाहक होंगे और उन्हें गुडविल अंबेसडर भी बनाया गया है.

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33 वर्षीय बिंद्रा फिलहाल शानदार फॉर्म में चल रहे हैं. पिछले साल सितंबर महीने में उन्होंने एशियन एयर गन चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीता है.

उत्तराखंड के देहरादून में जन्मे बिंद्रा 1998 में महज 15 साल की उम्र में मलेशिया में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स में हिस्सा लिया था. सिडनी ओलंपिक (2000) में वे भारतीय दल के सबसे युवा खिलाड़ी थे. हालांकि उन्हें पहली अंतरराष्ट्रीय सफलता 20 साल की उम्र में मैनचेस्टर कॉमनवेल्थ गेम्स (2002) में मिली. यहां उन्होंने स्वर्ण पदक जीता था.

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इसके बाद उन्होंने साल 2006 के मेलबर्न, 2010 में दिल्ली और 2014 में ग्लासगो में कॉमनवेल्थ खेलों में 10 मीटर एयर राइफल (पेयर) में स्वर्ण पदक जीता है. हालांकि, एशियाई खेलों में उन्हें कभी स्वर्णिम सफलता नहीं मिली है. बिंद्रा ने साल 2010 में ग्वांग्झू एशियाई खेलों में रजत पदक जीता था जबकि 2014 इंचियोन एशियाई खेलों में उन्हें कांस्य पदक से संतोष करना पड़ा. इसके अलावा बिंद्रा जागरेब वर्ल्ड चैंपियनशिप 2006 में सोने पर निशाना लगा चुके हैं.

इस स्टार निशानेबाज को 2001 में महज 19 साल की उम्र में राजीव गांधी खेल रत्न अवॉर्ड से नवाजा जा चुका है. अर्जुन अवॉर्डी बिंद्रा को 2001 में पद्म श्री और 2009 में भारत के तीसरे सबसे सर्वोच्च सम्मान पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था. इसके अलावा 2011 में उन्हें टेरिटोरियल आर्मी में लेफ्टिनेंट कर्नल की रैंक दी गई है.

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बीजिंग ओलंपिक में अपने करियर का सबसे बड़ा कारनामा करने वाले बिंद्रा क्वॉलिफाइंग राउंड में चौथे स्थान पर रहे थे. लेकिन अंतिम मुकाबले में उन्होंने सबको पीछे छोड़कर स्वर्ण पदक जीता. भारतीय फैंस बिंद्रा से इस बार बीजिंग वाली सफलता दोहराने की उम्मीद कर रहे हैं. रियो में 12 भारतीय निशानेबाज हिस्सा ले रहे हैं जिनमें बिंद्रा से पदक की उम्मीदें सबसे ज्यादा है.

First published: 22 July 2016, 8:25 IST
 
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