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रियो की उम्मीदें: 'सुपर' साइना पर निगाहें

कैच ब्यूरो | Updated on: 22 July 2016, 17:14 IST
(गेटी)
QUICK PILL
नाम- साइना नेहवालखेल- बैडमिंटनउम्र- 26 साल

“जब मैं पैदा हुई थी तो मेरी दादी ने कई महीनो तक मेरा मुंह नहीं देखा क्योंकि वो पोती नहीं बल्कि पोता चाहती थी.” ये बात लैंगिक असमानता और कन्या भ्रूण हत्या के लिए विख्यात हरियाणा के हिसार में जन्मीं भारतीय बैडमिंटन स्टार साइना नेहवाल ने एक इंटरव्यू में कही थी. लेकिन अटूट इरादों वाली साइना ने पिछले दस सालों में बैडमिंटन में ऐसी कई सफलताएं अर्जित की हैं जो कोई भारतीय पुरुष खिलाड़ी भी नहीं कर सका है.

भारतीय बैंडमिटन स्टार साइना नेहवाल को रियो ओलंपिक महिला एकल वर्ग में पांचवीं वरीयता दी गई है. साइना की वर्तमान फॉर्म में देखते हुए माना जा रहा है कि इस बार वे पिछले ओलंपिक तुलना में अपना रिकॉर्ड सुधारने में सफल रहेंगी.

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लंदन ओलंपिक (2012) में साइना नेहवाल पदक जीतने में कामयाब रहीं. तीसरे स्थान के लिए हुए मैच में चीन की खिलाड़ी शिन वांग उनसे एक गेम जीत चुकी थी, लेकिन घायल होने के कारण वे मैच से हट गईं और साइना को कांस्य पदक मिल गया. भारत को बैडमिंटन में ओलंपिक पदक दिलाने वाली साइना एकलौती खिलाड़ी हैं.

रियो में साइना के अलावा महिला एकल में पीवी सिंधू, पुरुष एकल में किदांबी श्रीकांत, महिला युगल में ज्वाला गुट्टा- अश्विनी पोनप्पा और पुरुष युगल में मनु अत्री- बी सुमीत रेड्डी की जोड़ी हिस्सा ले रहे हैं. रियो में पदक संभावनाओं के बारे में पूछे जाने पर पूर्व ऑल इंग्लैंड चैंपियन और राष्ट्रीय कोच गोपीचंद ने कहा कि पूरी ही टीम से संभावना है, लेकिन शीर्ष खिलाड़ी साइना नेहवाल पदक जीतने में ध्वजवाहक होंगी.

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साइना का पूरा करियर कठिन परिश्रम की बदौलत सफलताओं से भरा है. माता-पि‍ता दोनों ही राज्य स्तर के बैडमिंटन खि‍लाड़ी रहे हैं और इस वजह से नेहवाल की रुचि बचपन से ही इस खेल में थी. महज 8 साल की उम्र में ही बैडमिंटन खेलना शुरू करने वाली साइना का शुरुआती प्रशि‍क्षण हैदराबाद के लाल बहादुर स्‍टेडि‍यम में हुआ.

साइना ने अपने बैडमिंटन जीवन का पहला खिताब इंदौर में 2003 में उस वक्त जीता था, जब वे केवल 12 वर्ष 9 माह की थीं. इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा. साइना ने जून 2006 में मनीला में आयोजित फोर स्टार फिलीपींस ओपन बैडमिंटन का खिताब जीतकर अपना अंतरराष्ट्रीय सफर शुरू किया. अगले चार सालों के अंदर वे दुनिया के टॉप टेन खिलाड़ियों में शुमार हो गईं.

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विश्व जूनियर बैडमिंटन चैंपियनशिप 2008 में साइना स्वर्ण पदक जीत चुकी हैं. इसी साल उन्होंने बीजिंग ओलंपिक में क्वार्टर फाइनल तक का सफर किया. ओलंपिक में अंतिम आठ में पहुंचने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी बनी. 21 जून, 2009 को उन्होंने 'इंडोनेशियाई ओपन' जीतते हुए 'सुपर सीरिज बैडमिंटन टूर्नामेंट' का खिताब अपने नाम किया. यह उपलब्धि उनसे पहले किसी अन्य भारतीय महिला को हासिल नहीं हुई. 2010 में ऑल इंग्लैड बैंडमिटन के सेमीफाइनल में पहुंचने वाली पहली भारतीय महिला होने का गौरव प्राप्त किया.

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साइना के जिंदगी में लंदन ओलंपिक के बाद सबसे बड़ा मुकाम 2015 में तब आया जब वह महिला एकल में विश्व की नंबर वन खिलाड़ी बनीं. इसी साल उन्होंने जकार्ता में विश्व बैडमिंटन चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल जीता. हालांकि वो स्वर्ण जीतने से चूक गईं, लेकिन यह भी एक बड़ी उपलब्धि रही.

सम्मान और पुरस्कार

अर्जुन पुरस्कार (2009)

राजीव गांधी खेल रत्न (2009–2010)

 पद्म श्री (2010)

पद्म भूषण (2016)

First published: 22 July 2016, 17:14 IST
 
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