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कार चलाते समय कभी न करें ये पांच गलतियां

अमित कुमार बाजपेयी | Updated on: 9 April 2016, 20:37 IST

अगर आप भी कार चलाते हैं तो यह खबर आपके काफी काम आ सकती है. अधिकांश कार चालक ड्राइविंग के दौरान अक्सर कुछ गलतियां करते हैं. ड्राइविंग के दौरान किसी भी गलती का खामियाजा या तो ड्राइवर को या फिर कार को भुगतना पड़ता है. 

अगली बार से जब आप कार चलाएं तो आपसे वो पांच गलतियां न हों, इसलिए आप इन बातों पर जरूर गौर फरमाएं.

1. चलती कार में गियर नॉब पर हाथ रखना

ज्यादातर कार चालक ऐसी गलती करते हैं. अमूमन अधिकांश लोग हैंडरेस्ट के रूप में इस्तेमाल करते हैं. 

लेकिन हमेशा ध्यान रखें कि आपकी मैन्युअल ट्रांसमिशन वाली कार का गियर नॉब हैंडरेस्ट प्लेटफॉर्म नहीं बल्कि आपकी कार को चलाने और उसे न्यूट्रल करने के काम आता है. गियर नॉब के नीचे एक मैकेनिकल राड होती है जो गियर बॉक्स से जुड़ी होती है. 

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जब भी आप गियर बदलते हैं तब रॉड से जुड़ा सेलेक्टर फोर्ट रोटेटिंग कॉलर में संबंधित गियर की जगह फिट हो जाता है. चलती कार में रोटेटिंग कॉलर से सेलेक्टर फोर्ट के मिलने पर प्रेशर लगता है और यह कुछ वियर एंड टीयर पैदा करता है. 

हालांकि गियर नॉब पर हाथ रखने से न तो बहुत ज्यादा प्रेशर लगता है और न ही सेलेक्टर फोर्ट रोटेटिंग कॉलर में बहुत ज्यादा वीयर एंड टियर पैदा करता है. लेकिन अगर यह आपकी आदत में शुमार है तो निश्चित ही इससे आपके गियर बॉक्स का जीवन कम हो रहा है. क्योंकि नियमितरूप से चलती कार में यह प्रेशर गियर बॉक्स को वक्त से पहले खराब कर देता है. 

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अगर आप अपनी कार का ओनर मैन्युअल देखेंगे तो इसमें भी लिखा रहता है कि गियर नॉब को हैंड रेस्ट की तरह इस्तेमाल नहीं करना चाहिए. दूसरा, आपको कार चलाते वक्त अपने दोनों हाथ स्टीयरिंग व्हील पर ही रखने चाहिए, जिससे इमरजेंसी में जरूरत पड़ने पर आप कार को नियंत्रित कर सकें.

2. लाल बत्ती में भी गियर लगाए रखना

हर रेड लाइट पर आपको पता होता है कि कितनी देर रुकना है. वैसे अच्छा तो यह होता है कि दो मिनट से ज्यादा रुकने पर आप इंजन बंद कर दें, लेकिन अगर आप ऐसा नहीं करते हैं तो भी आपको अपनी कार गियर में नहीं रखनी चाहिए.

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ऐसा इसलिए क्योंकि जितनी भी देर तक रेड लाइट में आपकी कार गियर लगी खड़ी रहती है, आप उतनी देर तक क्लच दबाए रहते हैं. गियर लगी गाड़ी में नियमित रूप से क्लच दबाए रखना क्लच प्लेट्स पर बेवजह का दबाव डालता है और उसे वक्त से पहले खराब करता है.

साथ ही गियर में खड़ी आपकी कार बेवजह ज्यादा ईंधन इस्तेमाल करती है क्योंकि न्यूट्रल गियर की तुलना में यह ज्यादा मैकेनिकल काम कर रही होती है. इसके साथ ही इतनी ही देर तक क्लच दबाए रखने से आपके पैरों में तनाव बना रहता है जो शरीर के लिए सही नहीं है. 

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इसके अलावा अगर आप कार में गियर लगाकर क्लच दबाए बैठें हैं और अचानक आपके आसपास कुछ हो जाता है या फिर आपका ध्यान भंग होता है तो इतना तो बिल्कुल तय है कि आपकी कार आगे खड़ी कार से जाकर टकरा जाएगी. 

इसलिए अगली बार से जब भी लाल बत्ती पर हो तो अपनी कार को न्यूट्रल में रखें और हैंड ब्रेक लगा लें.

3. कम आरपीएम पर ज्यादा एक्सीलरेटर देना

कई बार ऐसा होता है कि ऊंचे गियर पर कार चलाने के दौरान आपको अचानक ब्रेक लगाना पड़ता है और कार की रफ्तार कम हो जाती है, लेकिन आप गियर कम किए बिना और कम आरपीएम पर ही रफ्तार बढ़ाने के लिए एक्सीलरेटर दबा देते हैं.

लेकिन इंजन चूंकि कम आरपीएम (रिवोल्यूशंस पर मिनट) पर होता है इसलिए एक्सीलरेटर बढ़ाने पर कार तुरंत उस हिसाब से रफ्तार नहीं पकड़ पाती.

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हालांकि ऐसा करने से आपके इंजन पर बेवजह का दबाव पड़ता है. कार का गियर हमेशा उचित इंजन आरपीएम पर बदलना चाहिए और उसी के मुताबिक एक्सीलरेटर दबाना चाहिए.

अगर आप ऊंचे गियर और कम आरपीएम पर एक्सीलरेटर दबाते हैं तो आपकी कार के इंजन को बेवजह ज्यादा काम करना पड़ता है और इसकी उम्र कम होती है. इंजन का वियर एंड टीयर बढ़ जाता है.

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गियर और क्लच का सिस्टम

अगर आपकी कार में आरपीएम मीटर नहीं है तो इसे समझने के लिए आप यह कर सकते हैं कि पांचवें गियर में अचानक हल्का ब्रेक लें और रफ्तार को करीब 30-40 किलोमीटर प्रतिघंटा तक कम कर लें और तब एक्सीलरेटर दबाएं. आप देखेंगे कि आपकी कार तुरंत रफ्तार नहीं पकड़ती बल्कि आपको लगता है कि इंजन पर वेबजह का दबाव पड़ रहा है.

इसलिए गियर बदलने या कम करने से कभी भी मत कतराएं और रफ्तार कम होते ही गियर कम करें, एक्सीलरेटर दें और फिर गियर बढ़ाएं. 

4. चलती कार में क्लच पैडल पर पैर रखना

यह एक सामान्य समस्या है और लोगों का इस पर ध्यान नहीं जाता. लेकिन अगली बार से कार चलाते वक्त ध्यान दीजिएगा कि कहीं आपने भी तो क्लच को पैर से नहीं दबा रखा है.

कार के साथ क्लच प्लेट्स लगातार घूमती रहती हैं. जब भी आप क्लच दबाते हैं तो यह घूमती हुई क्लच प्लेटें रुक जाती हैं. यानी उतने वक्त के लिए क्लच गियर से जुड़ा नहीं रहता है.

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गलत तरीका

गियर बदलते वक्त क्लच दबाने से घूमते क्लच रुक जाते हैं और गियर बाक्स में वो गियर लग जाता है. और फिर क्लच पैडल छोड़ते ही क्लच प्लेट्स घूमना शुरू हो जाती हैं.

कार चलाते वक्त क्लच पैडल पर पैर रखने से आपकी क्लच प्लेटें पूरी तरह इंगेज नहीं रहती हैं यानी इन्हें काम करने का पूरा मौका नहीं मिलता और यह उस गियर में कार को अपनी उचित रफ्तार बनाए रखने का मौका नहीं देती.

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सही तरीका

इसका परिणाम यह होता है कि कार का इंजन अपनी पूरी ऊर्जा नहीं दे पाता और आपकी कार की क्लच प्लेट्स समय से पहले खराब हो जाती हैं. इतना ही नहीं क्लच पैडल को लंबे वक्त तक दबाए रखने से गियर बॉक्स की खराबी के साथ ही इंजन पर भी नकारात्मक असर पड़ता है. जो आपकी कार की उम्र के लिए सही नहीं है.

5. पहाड़ी चढ़ते वक्त क्लच पैडल दबाए रखना

पहाड़ों पर चढ़ाई करते वक्त अक्सर लोग कार का क्लच पैडल दबाए रखते हैं. उन्हें लगता है कि इससे कार को पीछे जाने से बचाया जा सकेगा. 

लेकिन ध्यान रखिए जैसे ही आप क्लच पैडल दबाते हैं आपकी कार न्यूट्रल में यानी बिना गियर के हो जाती है. इसका मतलब कि आपकी कार आगे जा रही है और आप क्लच दबा देते हैं तो अगर यह ढाल पर है तो पीछे जाने लगेगी.

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इसलिए जब आप पहाड़ों पर कार चढ़ा रहे हों तो इंजन को गियर में ही रखें. क्लच का इस्तेमाल केवल गियर बदलने के लिए करें. अगर कहीं पर आपको कार रोकनी पड़े तो हैंड ब्रेक का इस्तेमाल करें और आगे बढ़ने के लिए क्लच दबाएं, गियर लगाएं, एक्सीलरेटर दबाएं और हैंडब्रेक हटाएं, जिससे आपकी कार बिना पीछे जाए आगे बढ़ेगी. 

साथ ही जैसा पहले बताया जा चुका है कि बेवजह क्लच दबाने से होने वाला नुकसान भी नहीं होगा.

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उम्मीद है कि अगली बार जब आप कार ड्राइव करेंगे तो इन छोटी सी लेकिन जरूरी बातों का ध्यान रखेंगे और अपनी कार और उसके इंजन का जीवन बढ़ा सकेंगे. यह न केवल आपकी जेब के लिए बेहतर रहेगा बल्कि आपकी कार की क्षमता भी बेहतर करेगा.

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First published: 9 April 2016, 20:37 IST
 
अमित कुमार बाजपेयी @amit_bajpai2000

पत्रकारिता में एक दशक से ज्यादा का अनुभव. ऑनलाइन और ऑफलाइन कारोबार, गैज़ेट वर्ल्ड, डिजिटल टेक्नोलॉजी, ऑटोमोबाइल, एजुकेशन पर पैनी नज़र रखते हैं. ग्रेटर नोएडा में हुई फार्मूला वन रेसिंग को लगातार दो साल कवर किया. एक्सपो मार्ट की शुरुआत से लेकर वहां होने वाली अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनियों-संगोष्ठियों की रिपोर्टिंग.

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