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जानिए क्या हैं दुनिया के 5 सबसे खतरनाक नशे

अमित कुमार बाजपेयी | Updated on: 8 March 2016, 16:34 IST

दुनिया का कौन सा ऐसा नशा है जिसकी लत सबसे बुरी होती है? इसका जवाब इस बात पर निर्भर है कि आप ये सवाल किससे पूछ रहे हैं?


शोधकर्ताओं के अनुसार किसी नशे की लत का अंदाजा कई बातों से लगाया जाता है. मसलन यह कितना नुकसानदायक है, इसको पाने की कीमत, कितनी मात्रा दिमाग के डोपामाइन सिस्टम को सक्रिय करती है, लोग ड्रग को कितना सुकून देने वाला बताते हैं, ड्रग को छोड़ने पर दिखने वाले लक्षण किस स्तर के होते हैं और कितनी आसानी से ड्रग एक व्यक्ति को अपना लती बना सकता है. 

इसके अलावा किसी नशे में लती बनाने की कितनी क्षमता है इसे जांचने के कई और पहलू भी हैं और ऐसे तमाम शोधकर्ता भी हैं जो इस बात पर बहस करते हैं हर नशा ऐसा नहीं होता जिसकी हमेशा लत लग जाए. नशे की लत को श्रेणीबद्ध करने के लिए अलग-अलग नशों और शोधकर्ताओं के निष्कर्ष को मानने से अच्छा है कि एक्सपर्ट पैनल से पूछा जाए.

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2007 में डेविड नट और उनके सहकर्मियों ने इनके विशेषज्ञों से सवालात कर कुछ दिलचस्प परिणाम पाए. अंग्रेजी वेबसाइट द कनवर्सेशन में सेंट एंड्र्यूज यूनिवर्सिटी के साइकोलॉजी और न्यूरोसाइंस के प्रोफेसर एरिक बोमैन ने इस पर अपनी रिपोर्ट पेश की. 

1. हेरोइन

विशेषज्ञों ने हेरोइन को 3 में से अधिकतम 2.5 प्वाइंट देते हुए इसे सबसे ज्यादा एडिक्टिव ड्रग (नशा) यानी जिसकी लत सबसे आसानी से लग जाती है, बताया. जानवरों पर इसके परीक्षण से पता चला कि अफीमयुक्त नशा यानी हेरोइन की खुराक पाते ही मस्तिष्क में डोपामाइन का स्तर 200 फीसदी तक पहुंच जाता है. 

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सबसे ज्यादा लत लगने वाले नशे के साथ ही विवादास्पद रूप से हेरोइन सबसे ज्यादा खतरनाक भी है. क्योंकि इसकी चरम आनंद देने वाली खुराक की मात्रा का पांच गुना ही जानलेवा साबित हो सकता है. 

हेरोइन लेने वालों और समाज, दोनों को नुकसान पहुंचाने के मामले में इसे दूसरा सबसे ज्यादा नुकसानदायक नशा कहा गया है. 2009 में दुनिया भर में हेरोइन समेत अफीमयुक्त नशे का अनुमानित अवैध बाजार तकरीबन 4,62,400 करोड़ रुपये का था.

2. अल्कोहल

विशेषज्ञों से पूछे जाने पर शराब (अल्कोहल) को दुनिया का दूसरा सबसे लत लगने वाला मादकद्रव्य बताया गया. इसे 3 में से 2.2 का स्कोर दिया गया. दिमाग पर अल्कोहल के कई प्रभाव पड़ते हैं. 

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जानवरों पर किए गए प्रयोगशाला परीक्षण में पता चला कि अल्कोहल मस्तिष्क के डोपामाइन स्तर को 40-360 फीसदी तक बढ़ा देती है. साथ ही जितना ज्यादा अल्कोहल दिया गया डोपामाइन का स्तर उतना ज्यादा बढ़ता गया.

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करीब 22 फीसदी लोग जो अल्कोहल ड्रिंक लेते हैं, उनके जीवन के किसी मोड़ पर वे इसपर निर्भर हो जाते हैं. डब्लूएचओ (विश्व स्वास्थ्य संगठन) ने अनुमान लगाया था कि 2002 में 200 करोड़ लोग अल्कोहल का सेवन करते थे और 2012 में मदिरा सेवन से हुए नुकसान के चलते 30 लाख से ज्यादा लोगों की मौत हो गई. अल्कोहल को अन्य विशेषज्ञों द्वारा भी सर्वाधिक नुकसान पहुंचाने वाला ड्रग बताया गया है. 

3. कोकीन

मस्तिष्क में एक न्यूरॉन से दूसरे न्यूरॉन तक संदेश पहुंचाने में डोपामाइन के इस्तेमाल में कोकीन सीधे असर डालती है. सीधे शब्दों में कहें तो कोकीन न्यूरॉन्स को डोपामाइन का असर बंद करने का संकेत देने से रोकती है. जानवरों पर किए प्रयोग में कोकीन ने डोपामाइन के सामान्य स्तर को असामान्य ढंग से तीन गुना से ज्यादा बढ़ा दिया. 

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अनुमान लगाया जाता है कि दुनिया में 1 करोड़ 40 लाख से लेकर 2 करोड़ लोग कोकीन लेते हैं और 2009 में कोकीन का बाजार करीब 5,10,000 करोड़ रुपये का था.

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क्रैक कोकीन को विशेषज्ञों द्वारा तीसरा सबसे खतरनाक नशा बताया गया है जबकि पाउडर कोकीन को पांचवा. कोकीन को एक बार आजमाने वाले करीब 21 फीसदी लोग जीवन में इस पर निर्भर हो जाते हैं. कोकीन एक तरह से अन्य उत्तेजक पदार्थों मसलन मेथैम्फेटैमीन और एम्फेटैमीन की तरह है. 

4. बार्बीचुरेट्स (डौनर्स)

नींद की गोली, ब्लू बुलेट्स, गोरिल्लाज, नेंबीज, बार्ब्स या पिंक लेडीज के नाम से भी पुकारे जाने वाले बार्बीचुरेट्स एक ऐसे क्लास के ड्रग होते हैं जिनका इस्तेमाल शुरुआत में एंजाइटी से निपटने और नींद दिलाने में किया जाता है. यह मस्तिष्क के केमिकल सिग्नलिंग को प्रभावित करते हैं जिससे मस्तिष्क के कई हिस्से काम करना बंद कर देते हैं. 

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कम मात्रा में बार्बीचुरेट्स कल्पना के सबसे ऊंचे शिखर पर पहुंचने (यूफोरिया) का अहसास दिलाती है जबकि इसकी ज्यादा मात्रा सांस लेने में परेशानी का सबब बनते हुए इसे जानलेवा बना देती है. 

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इन दवाओं पर निर्भरता बहुत आसान होती थी क्योंकि यह दवा पर्चे पर आसानी से मिल जाती हैं. लेकिन बाद में अन्य दवाओं के इनके स्थान पर आ जाने से यह खपत नाटकीय रूप से कम हो गई. नट की विशेषज्ञ टीम बार्बीचुरेट्स को चौथा सवार्धिक नशीला पदार्थ बताती है. 

5. निकोटिन

निकोटिन ही तंबाकू में प्रमुख नशीला पदार्थ होता है. जब एक व्यक्ति सिगरेट पीता है तो फेफड़े निकोटिन लेकर इसे मस्तिष्क में भेज देते हैं. निकोटिन (तंबाकू) को विशेषज्ञों द्वारा केवल 12वां सबसे नशीला पदार्थ बताया गया है. लेकिन तमाम ऐसे कारण है जो बताते हैं निकोटिन बहुत ताकतवर नशीला पदार्थ है.

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एक बार भी स्मोकिंग करने वाले दो तिहाई अमेरिकियों का मानना है कि वे इस पर निर्भर हो गए थे. 2002 में डब्लूएचओ ने अनुमान लगाया था कि दुनिया भर में 100 करोड़ धूम्रपान करने वाले हैं और 2030 तक इसके कारण प्रतिवर्ष 80 लाख से ज्यादा लोग प्रतिवर्ष मरेंगे. 

प्रयोगशाला में जानवरों में धूम्रपान न करने की अच्छी संवेदना देखी गई. जबकि एक बटन दबाकर सीधे अपने खून में निकोटिन पहुंचाने में चूहे शामिल रहे. इससे मस्तिष्क में डोपामाइन का स्तर 25 से 40 फीसदी तक बढ़ गया.

First published: 8 March 2016, 16:34 IST
 
अमित कुमार बाजपेयी @amit_bajpai2000

पत्रकारिता में एक दशक से ज्यादा का अनुभव. ऑनलाइन और ऑफलाइन कारोबार, गैज़ेट वर्ल्ड, डिजिटल टेक्नोलॉजी, ऑटोमोबाइल, एजुकेशन पर पैनी नज़र रखते हैं. ग्रेटर नोएडा में हुई फार्मूला वन रेसिंग को लगातार दो साल कवर किया. एक्सपो मार्ट की शुरुआत से लेकर वहां होने वाली अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनियों-संगोष्ठियों की रिपोर्टिंग.

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