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स्मार्टफोन खरीदने जा रहे हैं तो ध्यान रखें यह 7 बातें

अमित कुमार बाजपेयी | Updated on: 29 October 2016, 16:22 IST

स्मार्टफोन अब जरूरत से ज्यादा शो, स्टेटस सिंबल और अपडेटेड दिखने का जरिया बनता जा रहा है. लोग अब स्मार्टफोन खराब होने या फिर उसकी स्क्रीन टूटने का इंतजार नहीं करते बल्कि बाजार में नया फोन आने पर खरीद लेते हैं.

हालांकि इस आदत के चलते कई बार लोग ऐसा फोन ले लेते हैं जो बाद में उनकी उम्मीदों पर खरा नहीं उतरता और उन्हें पछताना पड़ता है. ऐसे में सिवाए परेशान होने या औने-पौने में इसे बेचने का अलावा कोई विकल्प नहीं रह जाता.

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अगली बार से ऐसा न हो और आपने जो स्मार्टफोन खरीदा है वो बाद में आपको परेशान करे इसके लिए कुछ जरूरी बातें हैं जिन्हें फोन खरीदने से पहले ही ध्यान रखना चाहिए.

आइए आपको बताते है वो 7 बातें जिन्हें मोबाइल खरीदने से पहले या खरीदते वक्त ध्यान रखना बहुत जरूरी है.

1. स्क्रीन साइज

अगर स्मार्टफोन लेने का मकसद ज्यादा कॉलिंग और कम मल्टीमीडिया इस्तेमाल है, तो आपको 5 इंच या इससे छोटा फोन लेना चाहिए.

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वहीं, अगर मल्टीमीडिया मसलन वीडियो-गेमिंग आदि का ज्यादा शौक है और कॉलिंग पर ही फोकस नहीं है तो फैबलेट यानी 5.5 इंच या 6 इंच तक का स्मार्टफोन ले सकते हैं.

2. बैटरी बैकअप

अधिकांश यूजर की आज सबसे बड़ी परेशानी यह है कि स्मार्टफोन की बैटरी पूरा दिन साथ नहीं निभाती. दोपहर या शाम होते-होते चार्जिंग प्वाइंट या पॉवर बैंक ढूंढ़ना पड़ता है.

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ऐसे में स्मार्टफोन लेते वक्त बैटरी की क्षमता देखना बहुत जरूरी है. अगर 5 इंच तक का स्मार्टफोन ले रहे हैं तो 3,000-3,500 एमएएच जबकि 5.5 इंच या इससे ज्यादा डिस्प्ले वाले फोन के लिए 3,500 एमएएच से ऊपर की बैटरी सामान्यता पूरा दिन चलती है. इसलिए फोन के स्क्रीन साइज के मुताबिक बैटरी वाले फोन को प्राथमिकता दें.

3. 4G LTE या VoLTE

अब चूंकि देश में रिलायंस जियो 4जी सेवा शुरू हो चुकी है और फिलहाल कंपनी के मुफ्त वेल्कम ऑफर के चलते लोग इसकी सेवाएं ले रहे हैं, इसलिए अगर आप आगे चलकर रिलायंस जियो की सेवाएं लेना चाहते हैं तो बहुत जरूरी है कि 4G LTE सपोर्ट करने वाला फोन न खरीदें. बल्कि जिन फोन में VoLTE सपोर्ट है उन्हें ही खरीदें.

इसकी वजह यह है कि जियो वॉयस कॉलिंग केवल VoLTE आधारित है, इसलिए अगर आप 4G LTE फोन लेते हैं तो आपको हर वक्त कॉल करने या रिसीव करने के लिए मोबाइल डाटा चालू रखना होगा जबकि VoLTE में बिना मोबाइल डाटा ऑन किए भी कॉलिंग-रिसीविंग कर सकते हैं.

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इसका फायदा यह होता है कि फोन 4जी कनेक्टिविटी में रहने के लिए बहुत ज्यादा प्रोसेसिंग नहीं करता जिससे यह गर्म नहीं होता और ज्यादा बैटरी नहीं खाता.

4. कैमरा

अगर फोटोग्राफी के लिहाज से फोन खरीद रहे हैं तो ध्यान रखें कि मेगापिक्सल से फर्क नहीं पड़ता बल्कि कैमरे का सेंसर और अपरचर से ज्यादा मायने रखता है. इसलिए अगर सोनी (सबसे बेहतरीन) या सैमसंग के सेंसर वाला कैमरा है (कई कंपनियां आजकल इस्तेमाल करती हैं), तो कम मेगापिक्सल में भी अच्छी तस्वीर आएगी. 

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वहीं, अपरचर यानी f/2.2 या f/1.9 जैसी संख्या कम रोशनी में अच्छी तस्वीर खींचने का काम करती है. इसलिए ध्यान रखें कि जितना कम अपरचर होगा कम रोशनी में उतनी अच्छी तस्वीर आएगी, साथ ही चीजों को फोकस करना आसान हो जाएगा.

इसके अलावा ऑटोफोकस की जगह पीडीएफ (फेज डिटेक्शन ऑटो फोकस) और मैन्युअल फोकस को वरीयता दें. यह भी ध्यान रखें कि फोन के कैमरे के साथ फ्लैश होना भी बेहतर साबित होता है.

5. एक्सेसरीज की कीमत और सर्विस

आजकल तमाम स्मार्टफोन निर्माता कंपनियां ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए फोन तो सस्ते कीमत में पेश करती हैं, लेकिन जब फोन या उनका चार्जर खराब हो जाए तो मोटी कीमत वसूलती हैं.

ऐसे में जिस ब्रांड का जो भी मॉडल खरीद रहे हैं, कस्टमर केयर पर फोन करके पहले ही उसके चार्जर-स्क्रीन रिप्लेसमेंट की कीमत के बारे में जान लें जिससे बाद में कभी ऐसी स्थिति आने पर पछताना न पड़े.

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इसके अलावा नए ब्रांड के फोन चुनते वक्त उनके नजदीकी सर्विस सेंटर के बारे में भी जानकारी जुटाना हर लिहाज से बेहतर साबित होता है.

6. रैम और मेमोरी

हमेशा ध्यान रखें कि ज्यादा रैम और मेमोरी देखकर कभी भी स्मार्टफोन की खरीदारी न करें. सबसे पहले अपनी जरूरत देखें. अगर आपको गेमिंग, मल्टी टास्किंग, ढेरों ऐप्स के साथ फोटो-वीडियो एडिटिंग की जरूरत पड़ती है तो ही आपको 1 जीबी से ज्यादा रैम की जरूरत होती है.

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वर्ना सामान्यता कॉलिंग-मल्टीमीडिया (वीडियो प्ले) के लिए 1 जीबी रैम बहुत है. इसके अलावा इंटर्नल मेमोरी को भी बढ़ाने का विकल्प होता है जिसे माइक्रोएसडी कार्ड से बढ़ा सकते हैं. तो स्मार्टफोन खरीदते वक्त रैम-मेमोरी को देखकर मत ललचाएं बल्कि अपनी अकल लगाएं.

7. एचडी या फुल एचडी

यहां यह बात जानना भी बहुत जरूरी है कि एचडी यानी 1280X720 पिक्सल और फुल एचडी यानी 1920X1080 पिक्सल रिजोल्यूशन की जरूरत केवल उस वक्त ही होती है जब आप इतने रिजोल्यूशन वाले कंटेंट देखते हैं.

अगर आप सामान्यता एचडी वीडियो ही देखते हैं, या फिर फुल एचडी ही सही तो भी आपको एचडी डिस्प्ले बेहतरीन पिक्चर क्वॉलिटी देने के लिए काफी है.

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वैसे अगर आपको बेहतरीन पिक्चर क्वॉलिटी ही चाहिए तो केवल फुल एचडी नहीं बल्कि पिक्सल डेंसिटी यानी कितने पीपीआई (पिक्सल पर इंच) को भी देखना चाहिए. क्योंकि जितना ज्यादा पीपीआई होगा पिक्चर क्वॉलिटी उतनी ही ज्यादा बेहतर होगी.

First published: 29 October 2016, 16:22 IST
 
अमित कुमार बाजपेयी @amit_bajpai2000

पत्रकारिता में एक दशक से ज्यादा का अनुभव. ऑनलाइन और ऑफलाइन कारोबार, गैज़ेट वर्ल्ड, डिजिटल टेक्नोलॉजी, ऑटोमोबाइल, एजुकेशन पर पैनी नज़र रखते हैं. ग्रेटर नोएडा में हुई फार्मूला वन रेसिंग को लगातार दो साल कवर किया. एक्सपो मार्ट की शुरुआत से लेकर वहां होने वाली अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनियों-संगोष्ठियों की रिपोर्टिंग.

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