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सभी कारों में एयरबैग और सेफ्टी फीचर्स अगले साल से

कैच ब्यूरो | Updated on: 10 November 2016, 19:38 IST

अब कार लेने वालों को अपनी सुरक्षा का ख्याल रखने के लिए स्टैंडर्ड वर्जन की जगह हायर वर्जन वाली कार खरीदने की जरूरत नहीं पड़ेगी. सरकार के नए आदेश के बाद अब कार निर्माताओं को स्टैंडर्ड वर्जन में ही एयरबैग्स, रिवर्स गियर सेंसर्स, स्पीड वार्निंग सिस्टम और सीटबेल्ड रिमाइंडर जैसे सुरक्षा फीचर्स देने होंगे.

सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय द्वारा बुधवार को जारी सूचना के मुताबिक अक्तूबर 2017 यानी अगले साल से हर कार में न्यूनतम और निर्धारित सुरक्षा मानक देने जरूरी होंगे. जैसे स्पीड अलर्ट फीचर कार चालकों को जैसे ही रफ्तार 80 किलोमीटर प्रतिघंटा से ऊपर जाएगी चेतावनी देगा और 100 की रफ्तार से ऊपर जाने पर यह लगातार ऑडियो अलर्ट देगा. 

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सरकार के इस कदम से सुरक्षा फीचर्स पर भारतीय कारें वैश्विक मानकों की श्रेणी में पहुंच जाएंगी. सरकार ने कार निर्माताओं से इस पर उनकी टिप्पणियां भी मांगी हैं. लेकिन इतना तो तय है कि, "सभी कार मॉडलों में यह सुरक्षा मानक होने तय हैं."

ऑटो कंपनियों के लिए इसकी एक समयसीमा भी निर्धारित कर दी गई है. फिलहाल कुछ ऑटो कंपनियों अपने शुरुआती मॉडल्स में एयरबैग और एबीएस (एंटीलॉक ब्रेकिंग सिस्टम) देती हैं. सरकार का अनुमान है कि इन दो फीचर्स को जोड़ने से कारों के शुरुआती (स्टैंडर्ड या बेस) मॉडल्स की कीमतों में 10 फीसदी ईजाफा हो सकता है.

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सरकार की यह भी योजना है कि वो सुरक्षा मानकों पर कारों को श्रेणीबद्ध करने के लिए खुद की सेफ्टी अथॉरिटी भारत नेशनल कार एसेसमेंट प्रोग्राम (एनसीएपी) भी स्थापित करे. देश में फ्यूल एफीसिएंसी के आधार पर भी कारों का रेटिंग सिस्टम तय किया जाएगा. भारत एनसीएपी यह भी तय करेगा कि कारों का फ्रंट इस तरह से डिजाइन किया जाए ताकि पदयात्रियों के घायल होने की संभावना न्यूनतम हो.

सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने इस बाबत नए कार मॉडलों के लिए अक्तूबर 2017 की समयसीमा तय कर दी है कि वे पैदल यात्रियों की सुरक्षा समेत न्यूनतम फ्रंटल एंड साइड क्रैश टेस्ट को पास करें. कार के फ्रंटल क्रैश टेस्ट 64 जबकि साइड क्रैश टेस्ट 50 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार पर किए जाएंगे. 

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गौरतलब है कि भारत का नाम दुनिया के सर्वाधिक मोटर एक्सीडेंट्स की दर वाले देशों मे आता है और इसका मुख्य कारण ग्राहकों के लिए कम कीमत में कार उपलब्ध कराने के लिए बिना सेफ्टी फीचर्स वाले वाहन उत्पादन करना है.

First published: 10 November 2016, 19:38 IST
 
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